नौवहन उपग्रह IRNSS-1H आज होगा लॉन्च, IRNSS-1A की जगह लेगा

आईआरएनएसएस-1एच नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1ए की जगह लेगा, जिसकी तीन रूबीडियम परमाणु घड़ियों (एटॉमिक क्लॉक) ने काम करना बंद कर दिया था. आईआरएनएसएस-1ए ‘नाविक’ श्रृंखला के सात उपग्रहों में शामिल है. 

नौवहन उपग्रह IRNSS-1H आज होगा लॉन्च, IRNSS-1A की जगह लेगा
आईआरएनएसएस-1एच के अभियान की 29 घंटे लंबी उल्टी गिनती बुधवार को दोपहर दो बजे शुरू हो चुकी है. (फाइल - फोटो साभार डीएनए)

बेंगलुरू:  'नाविक' श्रृंखला के मौजूदा सात उपग्रहों में संवर्धन के लिए नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1एच के गुरूवार को होने वाले प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है. प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी39 के जरिए आईआरएनएसएस-1एच को प्रक्षेपित किया जाएगा. आईआरएनएसएस-1एच नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1ए की जगह लेगा, जिसकी तीन रूबीडियम परमाणु घड़ियों (एटॉमिक क्लॉक) ने काम करना बंद कर दिया था. आईआरएनएसएस-1ए ‘नाविक’ श्रृंखला के सात उपग्रहों में शामिल है. 

प्रक्षेपण के लिए 29 घंटे की लंबी गिनती बुधवार से शुरू
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने कहा, ‘‘पीएसएलवी-सी39/आईआरएनएसएस-1एच के अभियान की  29 घंटे लंबी उल्टी गिनती बुधवार को दोपहर दो बजे शुरू हो चुकी है.’’ आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉंन्च पैड से शाम सात बजे इसका प्रक्षेपण किया जाएगा. मिशन तैयारी समीक्षा (एमआरआर) समिति और प्रक्षेपण प्राधिकृति बोर्ड (एलएबी) ने मंगलवार को 29 घंटे लंबी उल्टी गिनती की मंजूरी दी थी. 

प्रक्षेपण के लिए पीएसएलवी के ‘एक्सएल’ संस्करण का इस्तेमाल होगा
प्रक्षेपण के लिए पीएसएलवी-सी39 पीएसएलवी के ‘एक्सएल’ संस्करण का इस्तेमाल करेगा. 1,400 किलोग्राम से ज्यादा वजन के आईआरएनएसएस-1एच का निर्माण इसरो के साथ मिलकर छह छोटी-मझौली कंपनियों ने किया है. भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली है, जिसे भारत ने अमेरिका के जीपीएस की तर्ज पर विकसित किया है. 

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