जम्मू-कश्मीर के शिक्षा मंत्री बोले - सेना प्रमुख शिक्षाविद नहीं हैं जो शिक्षा व्यवस्था पर उपदेश दें

जम्मू-कश्मीर के शिक्षा मंत्री सैय्यद अल्ताफ बुखारी ने सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

जम्मू-कश्मीर के शिक्षा मंत्री बोले - सेना प्रमुख शिक्षाविद नहीं हैं जो शिक्षा व्यवस्था पर उपदेश दें
बुखारी ने कहा कि हमें पता है कि शिक्षा व्यवस्था को कैसे चलाना है...(फोटो साभार: ANI)

नई दिल्ली: सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के स्कूलों में छात्रों को भारत और जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग नक्शे के बारे में बताया जाने पर सवाल उठाए थे. सेना प्रमुख ने कहा था, 'जम्मू-कश्मीर के स्कूल में शिक्षक जो पढ़ा रहे हैं वह नहीं होना चाहिए. जम्मू-कश्मीर के स्कूलों में दो नक्शे देखें जा सकते हैं, एक भारत का और दूसरा जम्मू कश्मीर का. आखिर हमें जम्मू कश्मीर के लिए अलग से नक्शे की जरूरत क्यों पड़ी? इससे बच्चों को क्या तालीम मिल रही है.' इस पर 

शनिवार को जम्मू-कश्मीर के शिक्षा मंत्री सैय्यद अल्ताफ बुखारी ने सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. बुखारी का कहना है, "आर्मी चीफ सम्मानित अधिकारी हैं. मुझे नहीं लगता कि वह शिक्षाविद हैं जो शिक्षा पर उपदेश दें. शिक्षा राज्य का विषय है, हमें पता है कि शिक्षा व्यवस्था को कैसे चलाना है. बुखारी ने कहा कि राज्य में दो झंडे भी हैं. साथ ही एक जम्मू कश्मीर का संविधान है और एक भारत का संविधान भी है. हर स्कूल में राज्य का नक्शा जरूरी होता है ताकि उन्हें राज्य के बारे में पढ़ाया जा सके." 

JK minister reply

सेना प्रमुख ने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की बात कही 
सेना प्रमुख ने दावा किया कि जम्मू कश्मीर में सोशल मीडिया और सरकारी स्कूल ‘दुष्प्रचार अभियान’ चला रहे हैं जिससे युवा कट्टरता की ओर बढ़ रहे हैं. उन्होंने राज्य में मस्जिदों और मदरसों पर ‘कुछ नियंत्रण’ की वकालत भी की. उन्होंने कहा कि राज्य में इस समस्या से निपटने के लिए शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है. रावत ने कहा कि दुष्प्रचार रोकने के लिए मस्जिदों और मदरसों पर कुछ हद तक नियंत्रण के मुद्दे पर विचार किया जा रहा है.

'जम्मू कश्मीर में बहुत बड़े स्तर पर दुष्प्रचार अभियान' 
जनरल रावत ने कहा कि जम्मू कश्मीर के सरकारी स्कूलों की हर कक्षा में भारत के नक्शे के अलावा राज्य का अलग से नक्शा लगा है जो दिखाता है कि बच्चों में एक तरह की ‘अलग पहचान’ की सोच पैदा की जा रही है. उन्होंने कहा, ‘‘हमें जो नुकसान हुआ है, वह सोशल मीडिया की वजह से है. जम्मू कश्मीर में बहुत बड़े स्तर पर दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है जिसमें सोशल मीडिया और स्कूलों के माध्यम से युवकों को कट्टर बनाया जा रहा है.’’

रावत ने कहा, ‘‘एक और मुद्दा मदरसों तथा मस्जिदों का है. छात्रों को जो बताया जा रहा है या जो गलत जानकारी दी जा रही है, वो मदरसों और मस्जिदों के जरिये दी जा रही है. मुझे लगता है कि उन पर कुछ पाबंदी लगानी होगी और हम इस बारे में विचार कर रहे हैं.’’  जनरल ने यह भी कहा कि कश्मीर में पथराव करने वाले कुछ युवक सरकारी स्कूलों के हैं और राज्य में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है.

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