‘टीपू जयंती’ की जयंती मनाने के लिए कर्नाटक सरकार को लेना पड़ा धारा 144 का सहारा

18वीं शताब्दी में तत्कालीन मैसूर राज्य के विवादित शासक टीपू सुल्तान की जयंती शुक्रवार को  यहां कड़ी सुरक्षा के बीच मनाई गई.

‘टीपू जयंती’ की जयंती मनाने के लिए कर्नाटक सरकार को लेना पड़ा धारा 144 का सहारा
टीपू सुल्तान की फाइल तस्वीर.

बेंगलुरू: 18वीं शताब्दी में तत्कालीन मैसूर राज्य के विवादित शासक टीपू सुल्तान की जयंती शुक्रवार को  यहां कड़ी सुरक्षा के बीच मनाई गई . इस मौके पर कर्नाटक के कई हिस्सों में प्रदर्शनों का भी आयोजन किया गया. टीपू की विरासत को लेकर बंटी हुई राय और बढ़ते सियासी पारे के बीच विपक्षी बीजेपी, कुछ हिंदूवादी संगठनों और व्यक्तियों ने प्रदेश सरकार द्वारा टीपू की जयंती के कार्यक्रमों के आयोजन के विरोध में प्रदेश भर में प्रदर्शन किये. कर्नाटक सरकार की तरफ से जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था जिनमें जिले के प्रभावी मंत्रियों और अन्य ने टीपू की विरासत की प्रशंसा की. इस मौके पर सुरक्षा के मद्देनजर 54 हजार पुलिसकर्मियों के अलावा रैपिड एक्शन फोर्स और कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस की प्लाटून को तैनात किया गया था.

कोडागु जिले में राज्य परिवहन की बस पर पथराव किया गया और स्थानीय बीजेपी विधायक अप्पाचू रंजन समेत 100 लोगों को हिरासत में लिया गया. विपक्ष और कुछ हिंदू संगठनों ने कोडागु जिले में बंद का आह्वान किया था इसके मद्देनजर जिले में शनिवार सुबह तक धारा 144 लागू की गयी है.

टीपू सुल्तान हत्यारा या स्वतंत्रता सेनानी
देश भर में टीपू सुल्तान के स्वतंत्रता सेनानी होने या नहीं होने पर जारी बहस के बीच इतिहासकार ने एक नया पक्ष रखा है. इतिहासकार इरफान हबीब का कहना है कि 18वीं सदी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान न तो स्वतंत्रता सेनानी थे और न ही तानाशाह. उनमें से बहुत से इतिहासकार इस बात पर सहमत हैं कि टीपू इतिहास में ब्रिटिश औपनिवेशिक विस्तार के प्रतिरोध के प्रतीक हैं. कर्नाटक में टीपू सुल्तान की विरासत को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच शब्दों के तीर चलाए गए हैं. 

ये भी पढ़ें: टीपू सुल्‍तान था दक्षिण का औरंगजेब, जबरन लाखों लोगों का धर्मांतरण कराया: पांचजन्य

बीजेपी ने 10 नवम्बर को ‘टीपू जयंती’ समारोह मनाये जाने की कांग्रेस सरकार की योजना का विरोध किया है. बीजेपी का एक वर्ग उन्हें (टीपू को) 'धार्मिक कट्टरवादी' और 'क्रूर हत्यारे' मानता है जबकि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनकी एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में प्रशंसा की है. 

ये भी पढ़ें: टीपू सुल्तान ने ब्रिटिश राज से लड़ते हुए बहादुरों की मौत पाई : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

प्रख्यात इतिहासकार इरफान हबीब ने बताया कि टीपू सुल्तान को तानाशाह बताया जाना 'अनुचित' होगा. उन्होंने कहा, 'वह निश्चित रूप से ब्रिटेन का प्रतिरोध करने में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे.' उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी टीपू सुलतान पर लागू नहीं होता है क्योंकि उन्होंने किसी के खिलाफ विद्रोह नहीं किया, बल्कि अपने राज का बचाव किया और उपनिवेशवाद का प्रतिरोध किया.
इनपुट: भाषा

By continuing to use the site, you agree to the use of cookies. You can find out more by clicking this link

Close