कठुआ गैंगरेप केस: जम्मू के वकीलों ने बंद किया आंदोलन, 12 दिन काम पर लौटे

जम्मू हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (जेएचसीबीए) ने आंदोलन बंद कर काम फिर से शुरू कर दिया. वकीलों ने विभिन्न मांगों को लेकर 12 दिन से अदालत से दूरी बना रखी थी.

कठुआ गैंगरेप केस: जम्मू के वकीलों ने बंद किया आंदोलन, 12 दिन काम पर लौटे
जेएचसीबीए की आम सभा की बैठक में कामकाज फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया.(फाइल फोटो)
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जम्मू: जम्मू हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (जेएचसीबीए) ने आंदोलन बंद कर काम फिर से शुरू कर दिया. वकीलों ने विभिन्न मांगों को लेकर 12 दिन से अदालत से दूरी बना रखी थी. वह कठुआ बलात्कार और हत्या मामले को सीबीआई को सौंपने और अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या लोगों को वापस भेजने की मांग कर रहे थे. बार अध्यक्ष बी एस सलाथिया की अध्यक्षता में जेएचसीबीए की आम सभा की बैठक में कामकाज फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया. 

सलाथिया ने बताया कि, ‘‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया ( बीसीआई ) की अपील और सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुद्दे ( कठुआ बलात्कार और हत्या मामला ) का संज्ञान लेने की प्रतिक्रिया के रूप में आम सभा ने आंदोलन को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया.’’ बार एसोसिएशन चार अप्रैल को शुरुआत में चार दिन की हड़ताल पर गया था.

उसकी चार मांगे थी जिसमें राजौरी जिले में नौशेरा उप संभाग को जिले का दर्जा देने और जनजातीय मामलों पर सरकार की ओर से रूख स्पष्ट करने की मांग शामिल है. बाद में हड़ताल को 17 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया गया. जेएचसीबीए ने 11 अप्रैल को जम्मू में आम हड़ताल को भी प्रायोजित किया था लेकिन कई हलकों से उसे कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था. सलाथिया ने कहा कि बार केवल दो मुद्दों पर अपना आंदोलन जारी रखेगा जिसमें रोहिंग्या लोगों को वापस भेजना और आदिवासी मामलों पर स्पष्ट रूख की मांग शामिल है.

उन्होंने कहा, ‘‘दो मुद्दों पर हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे. हमने केवल आंदोलन का तरीका बदला है. हम अपने पेशेवर दायित्वों को पूरा करेंगे लेकिन साथ ही धरने, कैंडल मार्च का आयोजन करेंगे ताकि लोगों को अपनी मांगों के बारे में जागरूक कर सकें और रोहिंग्या लोगों के जल्द से जल्द निर्वासन को सुनिश्चित किया जाए. ’’ बीसीआई ने कल जम्मू और कठुआ बार एसोसिएशन से हड़ताल खत्म करने को कहा था. 

उसने उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एकदल को कठुआ मामले में वकीलों के कदाचार की कथित घटना की जांच के लिए भेजने का भी निर्णय लिया था. बीसीआई अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने संवाददाताओं से कहा कि किसी भी वकील के दोषी पाए जाने पर काउंसिल उसके लीगल प्रैक्टिस लाइसेंस को रद्द करने जैसा कदम भी उठा सकती है.  

इनपुट भाषा से भी