वध के लिए पशुओं की बिक्री: केरल हाई कोर्ट का केंद्र की अधिसूचना में दख़ल से इनकार, कहा- कोई संवैधानिक उल्लंघन नहीं

केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार (31 मई) को उस जनहित याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया जिसमें वध के लिए पशुओं की खरीद-बिक्री पर रोक संबंधी केंद्र की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गयी है. अदालत ने कहा कि नियमों में कोई संवैधानिक उल्लंघन नहीं है.

Updated: Jun 1, 2017, 12:39 AM IST
वध के लिए पशुओं की बिक्री: केरल हाई कोर्ट का केंद्र की अधिसूचना में दख़ल से इनकार, कहा- कोई संवैधानिक उल्लंघन नहीं
पीठ ने कहा कि अधिसूचना में उसे बीफ की बिक्री या उपभोग पर रोक नहीं दिखती है. (फाइल फोटो)

कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार (31 मई) को उस जनहित याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया जिसमें वध के लिए पशुओं की खरीद-बिक्री पर रोक संबंधी केंद्र की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गयी है. अदालत ने कहा कि नियमों में कोई संवैधानिक उल्लंघन नहीं है.

मुख्य न्यायाधीश नवनीति प्रसाद सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्र की अधिसूचना में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है. पीठ ने कहा कि अधिसूचना में उसे बीफ की बिक्री या उपभोग पर रोक नहीं दिखती है. इसके बाद याचिकाकर्ता ए जी सुनील ने जनहित याचिका वापस ले ली.

याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि अधिसूचना संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(जी) के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और इसे रद्द किया जाना चाहिए. हालांकि, पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जैसी आशंका जतायी है, नियमों में वैसे कोई अवैधता नहीं दिखती. पीठ ने कहा कि अधिसूचना में कोई संवैधानिक उल्लंघन नहीं है.