मॉडल से 'संत' बने भय्यूजी महाराज से जुड़ी खास बातें

भय्यूजी महाराज के संत नगरी परियोजना की घोषणा की थी. इस परियोजना में भारत के सभी धर्मों के 2,700 से ज्यादा संत-महात्माओं की मूर्तियां और इतिहास संजोया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी भारत की आध्यात्मिक विरासत से रू-ब-रू हो सके.

मॉडल से 'संत' बने भय्यूजी महाराज से जुड़ी खास बातें
आध्यात्मिक गुरु भैय्यूजी महाराज (फाइल फोटो)

नई दिल्लीः उदय सिंह देशमुख उर्फ भय्यूजी महाराज की खुदकुशी की घटना से हर कोई स्तब्ध है. यूं तो भय्यूजी महाराज की पहचान कई राजनेताओं से थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इनकी नजदीकी कई बार सुर्खियां बनी. पीएम नरेंद्र मोदी जब 26 मई को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे थे तो उनके 4,000 वीआइपी मेहमानों में 46 साल के उदय सिंह देशमुख (भय्यूजी महाराज) भी तशरीफ लाए थे. आमतौर पर बाबा लोग किसी मठ-मंदिर या श्रृद्धालु के घर रुकते हैं, लेकिन भय्यूजी दक्षिण दिल्ली के एंबेसडर होटल में ठहरे और कुछ चुनिंदा लोगों से मुलाकात के बाद अगले दिन इंदौर लौट गए. आइए इस खास शख्स से जुड़ी 11 बातें जानते हैं.-:

1. साल 2011 में भय्यूजी महाराज रामलीला मैदान में अण्णा हजारे का अनशन तुड़वाने आए थे तो सबकी नजर उन पर थी.

2. जेडी(यू) अध्यक्ष शरद यादव ने लोकसभा में जब अण्णा आंदोलन को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी, उस वक्त उन्होंने भय्यूजी का भी जिक्र किया था. उस समय लोगों ने पहली बार एक गोरे-चिट्टे, ऊंचे-पूरे हीरो की तरह दिखने वाले शख्स को एक साधु के रूप में देखा था. यह भारतीय आध्यात्मिक जगत का बिल्कुल नया कलेवर था. तलवारबाजी और घुड़सवारी में निपुण इस मराठा ने तब की यूपीए सरकार के एक मंत्री के बुलावे पर अण्णा को मनाने की कोशिश की थी.

3. 28 जनवरी, 2011 को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही भय्यूजी महाराज के संत नगरी परियोजना की घोषणा की थी. इस परियोजना में भारत के सभी धर्मों के 2,700 से ज्यादा संत-महात्माओं की मूर्तियां और इतिहास संजोया जाना था, ताकि नई पीढ़ी भारत की आध्यात्मिक विरासत से रू-ब-रू हो सके.

4. मां जीजाबाई की उंगली पकड़कर खड़े बाल शिवाजी के चित्र और भगवान गणेश के सुंदर विग्रहों से सजी इंदौर की अपनी बैठक में 'संत नगरी’ के बारे में साइंस ग्रेजुएट संत ने कहा, 'यहां भारत के सभी धर्मों के गुरुओं की मूर्तियां और विचार उद्धृत किए जाएंगे.' दरअसल उन्होंने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को संत नगरी का प्रस्ताव भेजा था, जिसे उन्होंने हाथों-हाथ स्वीकार कर लिया.

5. 2011 में मोदी जब अहमदाबाद में सद्भावना उपवास पर बैठे थे (यह उपवास उस समय विवाद में आ गया था जब मोदी ने मुस्लिम टोपी पहनने से मना कर दिया था) उस वक्त दूसरे संतों के साथ भय्यूजी भी वहां मौजूद थे. और वे उन लोगों में से थे जिन्होंने गुजरात के विकास का हवाला देते हुए मोदी का पक्ष लिया था.

6. अपने आश्रम में लगे चित्र में भारत माता के हाथ में हल थमाने वाले यह संत बड़े चाव से बताते थे कैसे उन्होंने महाराष्ट्र में पारदी समाज की महिलाओं को वेश्यावृत्ति से निकालने के लिए काम किया है और कैसे उनका 'श्री सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट’ अब तक 7,709 कन्याओं का विवाह करा चुका है. 

7. भय्यूजी महाराज कभी सियाराम सूटिंग्स के लिए मॉडलिंग भी कर चुके हैं. वह एक ऐसे अध्यात्मिक गुरु रहे जो महंगी गाडिय़ों से परहेज नहीं करते थे, लेकिन ट्रस्ट के खाते में कितने पैसे हैं, इसे उंगलियों पर गिनाने के लिए तैयार रहते थे. जब कोई उनसे धार्मिक कार्यों के बारे में पूछता था तो वह सामाजिक कार्यों का ब्यौरा देते थे.

8. भय्यूजी महाराज ने मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में सैकड़ों तालाबों का पुनर्निर्माण कराया था. देशभर में उन्होंने 19.39 लाख पौधे लगवाए थे और लोकतंत्र में लोगों का भरोसा जगाने के लिए उनका ट्रस्ट अब तक संविधान की साढ़े 15 लाख प्रतियां बांट चुका है. 

9. भय्यूजी महाराज एक नए किस्म के कर्मयोगी की छवि गढऩे में जुटे थे. वे विवाहित थे. उनकी एक बेटी है. और वे आम गृहस्थ की तरह (2 मई को अपने पिताजी के निधन से पहले तक) माता-पिता के साथ घर में रह रहे थे. वह हर रोज कई सौ किमी की यात्रा करते थे, ताकि जो सामाजिक कार्य वह कर रहे हैं, उस पर उनकी नजर बनी रहे. वह फेसबुक, ट्विटर पर सक्रिय थे औैर अपना ब्लॉग भी चलाते थे.

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