छत्तीसगढ़: छात्र ने बनाई ऐसी डिवाइस, बिना हेलमेट नहीं स्टार्ट होगी बाइक

सड़क हादसों मे मौत के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार एकमात्र कारण चालकों की लापरवाही है.

छत्तीसगढ़: छात्र ने बनाई ऐसी डिवाइस, बिना हेलमेट नहीं स्टार्ट होगी बाइक
सड़क हादसों में दोपहिया चालकों की मौत का एक बड़ा कारण हेलमेट ना पहनना भी होता है.(प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली/भिलाई: सड़क हादसों मे मौत के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार एकमात्र कारण चालकों की लापरवाही है. सड़क हादसों मे दोपहिया चालकों के लिए हेलमेट बहुत आवश्यक है. लेकिन लोग थोड़ी सी असुविधा के कारण हेलमेट नहीं पहनते हैं. सड़क हादसों में दोपहिया चालकों की मौत का एक बड़ा कारण हेलमेट ना पहनना भी होता है. ऐसा ही एक हादसा छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी खिलेश देवांगन के जीवन में भी हुआ. उन्होंने इस हादसे से प्रेरणा ली और एक ऐसे हेलमेट का निर्माण किया, जिसको पहने बिना आपका दोपहिया वाहन स्टार्ट ही नहीं होगा.

मिसाइल मैन कलाम को मानते हैं आदर्श
'विज्ञान में वह सारी ताकत है, जिससे हर जरूरतों को पूरा किया जा सके, सवाल सिर्फ यह है कि हम उससे क्या हासिल करना चाहते हैं.' पूर्व राष्ट्रपति एवं मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की कही ये चंद लाइनें खिलेश देवांगन ने अपने जीवन में गहरे से उतार ली हैं. दुर्ग के जेआरडी स्कूल में ग्याहरवीं के छात्र खिलेश देवांगन ने ऐसा हेलमेट तैयार किया है, जिसे पहनने के बाद ही बाइक स्टार्ट होगी. उन्होंने हेलमेट को ट्रांसमीटर और बाइक को रिसीवर से जोड़कर इसे तैयार किया है. खिलेश ने बताया कि जब आप हेलमेट पहनेंगे तो, हेलमेट में लगा ट्रांसमीटर एक्टिव हो जाएगा. ट्रांसमीटर बाइक में लगे रिसीवर को सिग्नल भेजेगा और बाइक स्टार्ट हो जाएगी. उन्होंने बताया कि एक बार इसे इंस्टाल करने पर आपकी बाइक बिना हेलमेट के स्टार्ट ही नहीं होगी. 

परिवार में हुए हादसे से मिली प्रेरणा
खिलेश देवांगन ने बताया कि हेलमेट के बिना गाड़ी चलाने के कारण उनके चाचा की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी. इसके बाद से ही खिलेश ने मन में निश्चय कर लिया था कि वो बिना हेलमेट गाड़ी चलाने वालों के लिए कुछ ऐसा बनाएगा कि उन्हें सड़क हादसों का शिकार ही न होना पड़े. उनका कहना है कि विकास में विज्ञान का तालमेल हो तो, दुनिया की सूरत संवरने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है. अगर आपकी सोच सही और स्पष्ट हो तो, छोटी-छोटी कोशिशों से भी जिंदगी आसान की जा सकती है. खिलेश अपने इस आविष्कार से खुश है और इसे पेटेंट कराने का भी मन बना रहे है.

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