छगः यहां सालों से पेड़ के नीचे लग रही है बच्चों की क्लास

प्रस्तावित जगह पर 2009 में आंगनबाड़ी भवन बनने के बाद स्कूल भवन बनाने की कवायद की, लेकिन वह पूरी ना हो सकी जिसके चलते आज भी वह स्कूल नीम के छाव में ही लगती है.

छगः यहां सालों से पेड़ के नीचे लग रही है बच्चों की क्लास
2009 में स्कूल भवन के लिए प्रस्ताव भेजने के बाद भी नहीं हुई कार्यवाई

नई दिल्लीः छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में बच्चे स्कूल भवन की खराब हालत के चलते सालों से पेड़ के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं. यहां स्कूल भवन की हालत इतनी खराब है कि कभी भी इसके गिरने का डर बना रहता है और यही कारण है कि बच्चों की क्लास पेड़ के नीचे लगती है. वहीं स्कूल के शिक्षक कहना है कि "उन्होंने प्रस्तावित जगह पर 2009 में आंगनबाड़ी भवन बनने के बाद स्कूल भवन बनाने की कवायद की, लेकिन वह पूरी ना हो सकी जिसके चलते आज भी वह स्कूल नीम के छाव में ही लगती है और बारिश हो तो या तो स्कूल की छुट्टी कर दी जाती है या फिर स्कूली बच्चे आंगनबाड़ी में शरण ले लेते है, लेकिन बात करें पढ़ाई की तो इसके चलते बच्चों की पढ़ाई पर काफी असर पड़ रहा है."

1957 में अस्तित्व में आया था स्कूल
वहीं क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य और स्थाई शिक्षा समिति के सदस्यों के मुताबिक "उन्हें मामले की पूरी जानकारी है. पर मामला राजस्व विभाग से जा अटका इसलिए हम बेबस हैं." इसके साथ ही खंड शिक्षा अधिकार राम नगीना सिंह यादव के मुताबिक 1957 में अस्तित्व में आये इस प्रायमरी स्कूल के भवन को बनाने 2005 में शासन फंड रिलीज किया था, लेकिन जमीनी विवाद के आड़े आने से स्कूल भवन की नींव अबतक नही खुद पाई है. यही नही खण्ड शिक्षा अधिकारी कहते है कि यह स्कूल आंगनबाड़ी के एक कमरे में लगती है. जो कि सम्भव ही नही है. 

क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य स्थाई शिक्षा समिति के सदस्य हैं
बता दें कि यह प्राइमरी स्कूल जिस क्षेत्र में आता है वहां के विधायक कभी सत्तासीन सरकार में संसदीय सचिव हुआ करते थे और तो और इस क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य आज भी स्थायी शिक्षा समिति के सदस्य हैं. फिर भी यह स्कूल पेड़ के नीचे ही लगता है. भला प्रदेश के लिए इससे बड़ी दुर्भाग्य की बात और क्या हो सकती है कि विद्यालय भवन का निर्माण कराने के लिए अध्यापकों को दर-दर भटकना पड़ रहा है.

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