MP: तीन साल से मजदूरी के लिए भटक रहे रेशम की खेती करने वाले आदिवासी किसान

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में रेशम की खेती कर कृमि पालन करने वाले लगभग तीन सौ आदिवासी किसान अपनी मजदूरी नही मिलने से परेशान है.

MP: तीन साल से मजदूरी के लिए भटक रहे रेशम की खेती करने वाले आदिवासी किसान
किसानों ने तीन साल पहले अपने खेतों में सरकार की रेशम उत्पादन योजना के तहत रेशम उत्पादन प्रारम्भ किया था.

नई दिल्ली/खंडवा: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में रेशम की खेती कर कृमि पालन करने वाले लगभग तीन सौ आदिवासी किसान अपनी मजदूरी नही मिलने से परेशान है. इन किसानों ने तीन साल पहले अपने खेतों में सरकार की रेशम उत्पादन योजना के तहत रेशम उत्पादन प्रारम्भ किया था. इन किसानों को रेशम कीट पालने, शहतूत का पौधा लगाने आदि करने के लिए 5600 रुपए महीने के आधार पर मजदूरी दिया जाना था. इन किसानों ने तीन साल तक काम किया, लेकिन मजदूरी का भुगतान आज तक नही हुआ है. अफसरों के चक्कर लगा-लगा कर हार चुके इन आदिवासी मजदूरों ने कलेक्टर ऑफिस का घेराव कर लिया. आपको बता दें कि तीन साल पहले सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए रेशम उत्पादन योजना शुरू की थी. जिसमें अनुदान भी था. 

कलेक्टर ने दिया मजदूरी दिलाने का आश्वासन
सरकार की इस रेशम उत्पादन योजना में ऐसे लगभग 282 मजदूरों का दो करोड़ रुपए का भुगतान बाकी है. इन मजदूरों ने लगभग सभी बड़े अधिकारियों तक अपनी व्यथा सुनाई, लेकिन अभी तक कुछ नही हुआ. मजदूरों ने बताया कि इस योजना में आदिवासी किसानों को शहतूत के पौधे लगाने के लिए जिला प्रशासन ने मनरेगा योजना से जोड़ा था. इस योजना के अंतर्गत मजदूरों को रेशम कीट के खाने के लिए शहतूत के पौधे लगाने, पौधे के बढ़ने तक उसकी देखरेख करने के लिए मजदूरी भुगतान किया जाना था. उन्होंने बताया कि आज तीन साल बीत जाने के बाद भी मजदूरी का भुगतान नही हो पाया है. मजदूरों ने बताया कि कई आला अधिकारियों तक शिकायत की, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई. जिला कलेक्टर ने इन मजदूरों की समस्या सुनकर रेशम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की. साथ ही जल्दी मजदूरों को भुगतान का भरोसा दिलाया. यह पीड़ित मजदूर पिछले तीन दिनों से किसान मजदूर महासंघ के तले खंडवा में धरने पर बैठे है.

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