मध्य प्रदेशः तीन माह पहले 8 करोड़ की लागत से बना था यह पुल, पहली ही बारिश में हुआ धराशाई

हरिबल्लभ शुक्ला ने कहा कि 'बड़े-बड़े पुल के निर्माण कार्य में भाजपा के बड़े-बड़े नेता पार्टनर हैं और वही ठेकेदारों को संरक्षण देते हैं.

मध्य प्रदेशः तीन माह पहले 8 करोड़ की लागत से बना था यह पुल, पहली ही बारिश में हुआ धराशाई
मई 2018 में हुआ था पुल का उद्घाटन

नई दिल्लीः मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में हुई मूसलाधार बारिश के बाद शनिवार को आठ करोड़ की लागत से तीन माह पूर्व बनाया कूनो का पुल पत्तों की तरह ढह गया. जिसके बाद शिवपुरी के लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. वहीं पुल बहने के बाद शिवराज सरकार को भी काफी विवादों का सामना करना पड़ रहा है. पुल ढ़हने के बाद मौके पर पहुंचे कांग्रेस जिलाध्यक्ष बैजनाथ सिंह यादव, पूर्व विधायक हरिबल्लभ शुक्ला सहित कई कांग्रेसियों ने भाजपा पर निशाना साधा है. मीडिया से बात करते हुए हरिबल्लभ शुक्ला ने कहा कि 'बड़े-बड़े पुल के निर्माण कार्य में भाजपा के बड़े-बड़े नेता पार्टनर हैं और वही ठेकेदारों को संरक्षण देते हैं.' बता दें राज्य सरकार ने इस पुल को अपने विकास मॉडल में भी शामिल किया था. बता दें कूनो नदी पर बना यह पुल श्योपुर को ग्वालियर और शिवपुरी से जोड़ता था. ऐसे में इस पुल के टूट जाने से शिवपुरी का ग्वालियर और श्योपुर से संपर्क टूट गया है.

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भाजपा के विकास मॉडल में शामिल
शुक्ला ने शर्मा ने केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर पर निशाना साधते हुए कहा कि 29 मई 2018 को आठ करोड़ की लागत से बने कूनो के पुल का लोकार्पण करते समय केन्द्रीय मंत्री जी ने दावा किया था कि यह पोहरी के विकास का मॉडल है जिसे पूरे जिले और संभाग को देखना चाहिए और इसकी हकीकत आज सबके सामने है. उन्होंने आगे कहा कि निर्माण के समय से ही इसका घटिया निर्माण कार्य चल रहा था, जनप्रतिनिधियों ने कई बार इसकी कई बार इसकी शिकायत भी की थी, नरेन्द्र जी को बताया, मुख्यमंत्री जी को बताया, पीडब्ल्यूडी के बड़े-बड़े अधिकारी सहित ब्रिज कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को बताया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई.

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घटिया निर्माण की भेंट चढ़ा पुल
पुल के घटिया निर्माण के लिए विधानसभा में भी प्रश्न उठाया, लेकिन कुछ नहीं हुआ और यह काम इसी तरह चलता रहा. हमारे यहां हुई बारिश में यह आठ करोड़ की लागत का पुल पत्ते की तरह बह गया. बिना राजनैतिक संरक्षण के इतना बड़ा भ्रष्टाचार नहीं हो सकता. सबसे दुखद बात यह है कि चार दिन बाद भी कलेक्टर से लेकर कोई भी प्रशासन का बड़ा अधिकारी, पीडब्ल्यूडी या फिर ब्रिज कॉर्पोशन का कोई बड़ा अधिकारी इसे देखने तक नहीं आया. जनता को न तो प्रशासन और न ही सरकार यह भरोसा दिला रही है कि पुल को कितने दिनों में तैयार किया जाएगा. वहीं जिला प्रशासन के अनुसार जिले के ग्रामीण इलाकों में करीब 500 घर इस बार की बारिश में बह गए हैं.

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