एमसीआई ने किया 'नीट' में बदलाव का ब्योरा देने से इंकार

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा देश भर के चिकित्सा महाविद्यालय में दाखिले के लिए आयोजित की जाने वाली 'नीट' परीक्षा में बड़ा बदलाव हुआ है.

एमसीआई ने किया 'नीट' में बदलाव का ब्योरा देने से इंकार
12वीं कक्षा में भौतिकी, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी को मिलाकर दो वर्ष का अध्ययन होना चाहिए. (फाइल फोटो)

भोपाल: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा देश भर के चिकित्सा महाविद्यालय में दाखिले के लिए आयोजित की जाने वाली 'नीट' परीक्षा में बड़ा बदलाव हुआ है. मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने इस बदलाव से लाखों छात्रों को मुसीबत में डाल दिया है. वहीं यह बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किए गए हैं, इसका ब्योरा देने से भी एमसीआई ने इंकार कर दिया है. एमसीआई ने मामला न्यायालय में विचाराधीन होने की बात कही, जबकि सूचना के अधिकार में प्रकरण विचाराधीन होने के बावजूद मांगा गया ब्योरा देने का प्रावधान है. गौड़ के मुताबिक, पिछले दिनों दिल्ली उच्च न्यायालय का एक फैसला आया था, जिसमें कहा गया था कि विचाराधीन मामलों की जानकारी सूचना के अधिकार में दी जा सकती है. उसके बावजूद एमसीआई ने ब्योरा देने से इंकार किया है.

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नियम सात और आठ ने निर्मित की भ्रम की स्थिति 
नीट के नियम सात और आठ ने बड़ी भ्रम की स्थिति निर्मित कर दी है. नियम के तहत, सभी अभ्यार्थियों के लिए 12वीं कक्षा में भौतिकी, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी को मिलाकर दो वर्ष का नियमित एवं निरंतर अध्ययन होना चाहिए. दो से ज्यादा वर्षो में यह परीक्षा पास करने वालों को प्रवेश परीक्षा के लिए अयोग्य करार दिया गया है. आगे कहा गया है कि, ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने 12वीं की परीक्षा मुक्त विद्यालय अथवा प्राइवेट अभ्यर्थी के तौर पर उत्तीर्ण की है, वह राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा के लिए पात्र नहीं होंगे. इसके अलावा 12वीं स्तर पर जीव विज्ञान व जैव प्रौद्योगिकी के अतिरिक्त विषय के रूप में किए गए अध्ययन की भी अनुमति नहीं होगी.

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एमसीआई ने किया ब्योरा देने से इंकार 
इस बदलाव को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने सूचना के अधिकार के तहत सीबीएसई से जानकारी चाही तो सीबीएसई ने बताया कि नियम में बदलाव एमसीआई ने किया है. गौड़ ने एमसीआई से जानना चाहा कि एमसीआई की कब, कहां हुई बैठक में यह बदलाव के फैसले हुए. साथ ही यह भी जानना चाहा कि इन बैठकों में कौन-कौन उपस्थित था. उसका पूरा ब्योरा उपलब्ध कराएं. गौड़ ने बताया कि एमसीआई ने यह कहते हुए ब्योरा देने से इंकार कर दिया है कि यह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है.

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