छत्तीसगढ़: एंबुलेंस न मिलने पर पैदल चलकर अस्पताल पहुंची गर्भवती महिला, नवजात की मौत

छत्तीसगढ़ में प्रदेश सरकार द्वारा विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किये जा रहे वादों की पोल खोलने वाली खबरें आए दिन सामने आती रहती हैं.

छत्तीसगढ़: एंबुलेंस न मिलने पर पैदल चलकर अस्पताल पहुंची गर्भवती महिला, नवजात की मौत
पत्थलगांव विकासखंड क्षेत्र के पहाड़ी कोरवा बस्ती में गर्भवती महिला लेबर पेन से दो घंटे तक तड़पती रही.(प्रतीकात्मक फोटो)

नईदिल्ली/जसपुर: छत्तीसगढ़ में प्रदेश सरकार द्वारा विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किये जा रहे वादों की पोल खोलने वाली खबरें आए दिन सामने आती रहती हैं. छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में अभी भी मूलभूत सुविधाओं का टोटा है. ऐसा ही एक मामला पत्थलगांव विकासखंड क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम बलाझार के पहाड़ी कोरवा बस्ती में सामने आया है. यहां एक गर्भवती महिला लीलावती बाई लेबर पेन से दो घंटे तक तड़पती रही. परिजनों ने एंबुलेंस के लिए फोन किया तो, सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस नहीं आ सकी. परिजनों ने जैसे-तैसे महिला को महिला को अस्पताल पहुंचाया. जहां महिला की कोख में ही नवजात की मौत हो गई. 

गांव तक नहीं पहुंच पाई एंबुलेंस
दरअसल, ग्राम बलाझार के पहाड़ी कोरवा बस्ती में रविवार रात दस बजे के करीब गर्भवती महिला लीलावती को अचानक प्रसव का दर्द उठा. रात ज्यादा होने से महिला की स्थिति को देख परिजनों ने अस्पताल में फोन कर एंबुलेंस की मांग की. फोन पर उन्हें एंबुलेंस भेजे जाने का आश्वासन तो मिला, लेकिन सड़क नही होने के कारण एंबुलेंस उनके गांव तक नहीं पहुंच सकी. परिजनों ने बताया कि गांव में सड़कों की स्थिति बदहाल है और गांव तक पहुंचने के मार्ग के बीच में दो जगह पुलिया भी क्षतिग्रस्त है. इस बीच महिला का दर्द बढ़ने पर परिजनों ने उसे पैदल ही रोड तक लेकर गए. वहां से निजी वाहन की मदद से महिला को तमता के शासकीय अस्पताल में भर्ती किया गया. 

मेन रोड से गांव तक नहीं है सड़क
तमता प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के डॉक्टर ने महिला को तो प्रसव कराकर बचा लिया, लेकिन नवजात की मौत हो गई. बच्चे की मौत के बाद महिला और परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. महिला के पति का कहना है कि इस घटना के लिए केवल खराब सड़क ही जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि अगर सड़क ठीक ढंग से बनाई जाती तो, मेर बच्चे की मौत नहीं होती. सड़क से अस्पताल तक निजी वाहन में महिला को ले जाने वाले श्रवण शर्मा ने बताया कि मेन रोड से बलाझार कोरवा बस्ती तक पिछले दो सालों से सड़क निर्माण नहीं हुआ है और दो पुलिया भी टूटी हुई हैं. उन्होंने कहा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस पर ध्यान नहीं देता है. इसके कारण पिछले साल भी लोगों को बहुत तकलीफ झेलनी पड़ी थी. 

बच सकती थी बच्चे की जान- डॉक्टर
वहीं सहायक चिकित्सा अधिकारी हरिशंकर पटेल ने बताया कि महिला का बच्चा कोख में उल्टा था. गर्भवती महिला को पहले ही गायनेकोलॉजिस्ट को दिखाने की सलाह दी गई थी. रात को प्रसव सुरक्षित कराया गया, लेकिन बच्चा मृत निकला. यदि सड़क अच्छी होती तो, लेबर पेन होते समय ही महिला को यहां लाया जा सकता था और कोई परेशानी होती तो, रेफर भी किया जा सकता था.

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