MP: रस्सियों के सहारे जान-जोखिम डालकर नाला पार करने को मजबूर हैं ग्रामीण

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में दो दिन पूर्व जनता के बीच आशीर्वाद लेने निकले सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने विधायकों के गुण गाए और भाजपा के राज में विकास की गाथा का बखान भी किया.

MP: रस्सियों के सहारे जान-जोखिम डालकर नाला पार करने को मजबूर हैं ग्रामीण
विकास की घोषणाओं के विपरीत रतलाम जिले के बाजेडा गांव में आज भी जिंदगियां मौत की रस्सी पर झूल रही है.

नई दिल्ली/रतलाम: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में दो दिन पूर्व जनता के बीच आशीर्वाद लेने निकले सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने विधायकों के गुण गाए और भाजपा के राज में विकास की गाथा का बखान भी किया. विकास की घोषणाओं के विपरीत रतलाम जिले के बाजेडा गांव में आज भी जिंदगियां मौत की रस्सी पर झूल रही है. दरअसल, बाजेडा गांव से होकर एक बरसाती नाला गुजरता है. बारिश के मौसम में ये नाला पानी से लबालब हो जाता है. गांव के सभी लोग बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इस नाले को पार करने लिए मजबूर हैं. ग्रामीणों ने नाला पार करने के लिए दो रस्सियां बांध रखी हैं. इन रस्सियों के सहारे ही जान जोखिम में डालकर ग्रामीण नाला पार करते हैं. 

वैकल्पिक मार्ग गांव से तीन किलोमीटर दूर 
ग्रामीणों का कहना है कि कई लोगों के खेत नाले के दूसरी ओर हैं. खेतों में जाने के लिए मजबूरीवश ग्रामीणों ने नाले पर दो रस्सियां को अस्थायी रूप से बांधकर उसे पार करने का मार्ग बनाया है. गांव की महिलाओं ने बताया कि छोटे बच्चों की तबीयत खराब होने पर उन्हें पीठ पर बांधकर नाला पार करना पड़ता है. महिलाओं ने बताया कि नाले के दूसरी ओर जाने के लिए दूसरा मार्ग गांव से तीन किलोमीटर दूर है. उन्होंने बताया कि आपात स्थिति में 40 फीट के नाले को रस्सी के सहारे पार कर काफी समय बच जाता है. पुलिया न होने के कारण मजबूरी में हमें ऐसा करना पड़ता है. 

स्टॉप डैम से नाला पार करना भी है खतरनाक- ग्रामीण
वहीं, गांव के बच्चे भी स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में डालकर इसी रास्ते का प्रयोग करते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वे कई सालों से एक छोटी पुलिया की मांग कर रहे है, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है. वहीं, तहसीलदार अजय हिंगे ने ग्रामीणों को रस्सी के सहारे रास्ता पार नही करने की हिदायत देने की बात कही है. उन्होंने बताया कि गांव का सिर्फ एक परिवार ही पुलिया निर्माण की मांग कर रहा है. हिंगे ने बताया कि गांव के पास ही स्टॉप डैम से लोगों के आने-जाने का वैकल्पिक मार्ग है. वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि स्टॉप डैम केवल नाले का पानी रोकने के लिए है. उससे नाला पार करना भी खतरनाक है. ग्रामीणों ने बताया कि स्टॉप डैम पर रेलिंग नही है और बारिश के समय फिसलन बढ़ने से नाले में गिरने का खतरा भी है.

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