उज्जैनः महाकाल को बंधी देश की पहली राखी, लगाया गया सवा लाख लड्डुओं का भोग

महाकाल को राखी बांधने के बाद परंपरानुसार भगवान महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का भोग भी लगाया गया. मान्यता है कि देश की पहली राखी महाकाल को ही बांधी जाती है.

उज्जैनः महाकाल को बंधी देश की पहली राखी, लगाया गया सवा लाख लड्डुओं का भोग
भस्म आरती के बाद बांधी गई हीरा जड़ित राखी

नई दिल्ली/उज्जैनः आज भाई-बहन के प्यार का त्यौहार रक्षा बंधन है. ये सिर्फ भाई और बहन ही नहीं मानते बल्कि देवों के देव बाबा महाकाल भी मनाते हैं. राखी पर सबसे पहली राखी भगवान महाकाल को बांधी गई. अल सुबह भस्मारती के बाद मंत्रोच्चारण के साथ भगवान महाकाल को राखी बांधी गई और भगवान महाकाल से प्रदेश की रक्षा की प्रार्थना की गई. साथ ही जिन बहनों के भाई नहीं हैं उन्होंने भी महाकाल को राखी अर्पित की. महाकाल को राखी बांधने के बाद परंपरानुसार भगवान महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का भोग भी लगाया गया. मान्यता है कि देश की पहली राखी महाकाल को ही बांधी जाती है और बाबा से देश की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. इसके अलावा महाकाल को राखी बांधने के अलावा महाकाल को पवित्रता का ध्यान रखते हुए बनाया गया महाभोग अर्पित किया जाता है.

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महाकाल को बांधी गई चांदी और हीरा जड़ित राखी
राखी के पावन अवसर पर इस बार महाकाल को हीरे और चांदी से जड़ित राखी बांधी गई. बता दें राखी पर बाबा महाकाल को राखी बांधने और सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाने की परंपरा काफी पुरानी है. जिसके लिए महाकाल धर्मशाला में ही महाभोग तैयार किया जाता है. महाभोग बनाने के दौरान पवित्रता का पूरा ध्यान रखा जाता है. दरअसल, राखी पर महाकाल को राखी बांधने की परंपरा करीब तीन दशक पहले शुरू की गई थी. जिसे मंदिर के ही पुजारी ने शुरू किया था.

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भस्म आरती के बाद बांधी गई राखी
मंदिर में श्रावण मास के दौरान जिस भी पुजारी की भस्म आरती चलती है उन्हें बाबा महाकाल को महाभोग अर्पित करने का अवसर प्राप्त होता है. महाकाल परिक्षेत्र में स्थित धर्मशाला में 8 कारीगरों और 16 सहयोगियों द्वारा मिलकर महाभोग तैयार किया गया. महाभोग तैयार करने के बाद बाबा महाकाल को भाग अर्पित किया गया. जिसके बाद मंदिर आए दर्शनार्थियों को लड्डुओं का प्रसाद बांटा गया.

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