PM ने नौकरशाहों से कहा, नियामक की जगह सक्षम बनाने की भूमिका में आएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (21 अप्रैल) को विज्ञान भवन में आयोजित 11वें सिविल सर्विसेज डे (लोकसेवक दिवस) समारोह में कहा कि एक नियामक होने के नाते हमें सक्षम बनाने वाली इकाई बनने की आवश्यकता है.  

Updated: Apr 22, 2017, 11:36 AM IST
PM ने नौकरशाहों से कहा, नियामक की जगह सक्षम बनाने की भूमिका में आएं
11वें सिविल सर्विसेज डे (लोकसेवक दिवस) समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (एएनआई फोटो)

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सरकारी सेवकों से उनकी नियामक की भूमिका को सक्षम बनाने वाली इकाई में बदलने को कहा ताकि चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सके. ‘सिविल सेवा दिवस’ के मौके पर नौकरशाहों से डेढ़ घंटे से अधिक समय की बातचीत में मोदी ने कहा कि आजकल लोग अकसर यह धारणा बना लेते हैं कि निजी क्षेत्र सरकार से बेहतर सेवाएं देता है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि कई क्षेत्रों में आज जो विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं, उनके साथ सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारियां बढ़ी हैं और यह कामकाज के अवसरों के रूप में नहीं बल्कि चुनौती के रूप में बढ़ी है. मोदी ने कहा कि जितनी जल्दी सरकारी सेवकों का रवैया नियामक से सक्षम बनाने वाले के रूप में बदलेगा, उतनी ही जल्दी प्रतिस्पर्धा की यह चुनौती एक अवसर बन जाएगी.

'...तो चुनौतियां अवसरों में बदल जाएंगी'

उन्होंने कहा, ‘अगर आप अपनी कार्यशैली और सोचने का तरीका बदलेंगे तो अच्छा होगा. अगर आप नियामक की भूमिका से बाहर निकलेंगे और चीजों को सुगम बनाने के लिए काम करेंगे तो चुनौतियां अवसरों में बदल जाएंगी.’ प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की परिस्थितियां करीब दो दशक पहले से थोड़ी अलग हैं और अगले कुछ सालों में और बदलेंगी.

उन्होंने कहा कि पहले सरकार ही वस्तुएं और सेवाएं प्रदान करती थी जिससे किसी की खामियांे को अनदेखी करने की गुंजाइश बहुत ज्यादा थी. नौकरशाहों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि गतिविधियों के मामले में सरकार की अनुपस्थिति सुस्पष्ट होनी चाहिए वहीं गतिविधियों के मामले में उसकी मौजूदगी बोझ नहीं बननी चाहिए.

मोदी ने वरिष्ठ अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि अनुभव बोझ नहीं बनना चाहिए जो युवा अधिकारियों के अभिनव कामकाज को बाधित करता हो. उन्होंने कहा कि गुमनाम रहना प्रशासनिक अधिकारियों की सबसे बड़ी ताकत है.