डूंगरपुर जिले में 70 फीसदी कम हुआ बालश्रम, बच्चों को मिला सरकारी योजनाओं का लाभ

चाइल्ड लाइन ने जहां नन्हें हाथों को बालश्रम से मुक्त करवाते हुए शिक्षा से जोड़ा है वहीं उन्हें सरकार की कई योजनाओ का भी लाभ दिलाया है.

डूंगरपुर जिले में 70 फीसदी कम हुआ बालश्रम, बच्चों को मिला सरकारी योजनाओं का लाभ
डूंगरपुर जिले में बाल श्रम धीरे धीरे दूर होने लगा है

अखिलेश शर्मा/डूंगरपुर: प्रदेश के आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले में एक समय ऐसा था जब स्कूल जाने की उम्र में नौनिहाल हजारों की संख्या में मजदूरी के लिए गुजरात पलायन करते थे या जिले में ही किसी कंस्ट्रक्शन साइट, होटल व दुकान में मजदूरी किया करते थे. लेकिन डूंगरपुर जिले में चाइल्ड लाइन सेवा की शुरुआत होने के बाद से लगातार बालश्रम में कमी आई है.

चाइल्ड लाइन की सतत निगरानी व सेवा का ही असर है की डूंगरपुर जिले में 70 फीसदी बालश्रम में कमी आई है. चाइल्ड लाइन ने जहां नन्हें हाथो को बालश्रम से मुक्त करवाते हुए शिक्षा से जोड़ा है वहीं उन्हें सरकार की कई योजनाओ का भी लाभ दिलाया है

प्रदेश का डूंगरपुर जिला आदिवासी बहुल जिला माना जाता है.अशिक्षा, गरीबी व रोजगार के पर्याप्त साधन न होने की वजह से यहां के लोग खेती व मजदूरी पर ही निर्भर रहते है. ऐसे में आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से कई परिवार अपना घर चलाने के लिए बच्चो से भी मजदूरी करवाते आये है. इधर जिले में 2011 में चाइल्ड लाइन सेवा की शुरूआत हुई. जिसके बाद जिले में चाइल्ड लाइन ने अपना काम शुरू किया.

जिसके बाद स्थानीए लोगों में पैदा की गई जागरूकता व चाइल्ड लाइन के लगातार प्रयासों से जिले में बालश्रम उन्मूलन में काफी सफलता मिली. चाइल्ड लाइन के जिला कोर्डिनेटर मुकेश गौड़ के अनुसार पिछले सात सालो में जिले में सैकड़ो बच्चो को बालश्रम से निजात दिलाई है वहीं लगातार कार्रवाई व निगरानी से जिले में बालश्रम में 70 फीसदी तक कमी आई है.

इतना ही नहीं चाइल्ड लाइन ने नन्हें हाथों को बालश्रम से मुक्त करवाने का ही काम नहीं किया है बल्कि मुक्त करवाए बच्चो को जिला प्रशासन से कॉर्डिनेट करते हुए शिक्षा से जोड़ने का काम किया. साथ इस संस्था ने बच्चों को शेल्टर की सुविधा और पालनहार योजना सहित अन्य योजनाओं से लाभान्वित करवाने का भी काम किया है. 

एक ऐसा ही बालक है खेडा पंचायत के नवाघरा गांव निवासी मोहन जो की पारिवारिक मजबूरी के चलते खेड़ा की एक किराणा की दूकान पर बाल मजदूरी किया करता था चाइल्ड लाइन ने साल 2017 में मुकेश को वहा से मुक्त करवाया और गांव के ही स्कूल में उसका दाखिला करवाया. आज मुकेश स्कूल की कक्षा में पढ़ते हुए अपना भविष्य सुधार रहा है.

कुछ ऐसी ही कहानी है बिलडी गांव के तीन नन्हें भाइयो की जिनको चाइल्ड लाइन ने शेल्टर की सुविधा उपलब्ध करवाने के साथ स्कूल से भी जोड़ा हैं दरअसल इन तीनो बच्चो की मां की मौत हो चुकी थी और पिता शराब के नशे में इन बच्चो के साथ मारपीट किया करता थां चाइल्ड लाइन पर मिली शिकायत के बाद चाइल्ड लाइन की टीम ने इन बच्चो को वहा से रेस्क्यू किया और बाल कल्याण समिति की मदद से इन बच्चो को बाल सम्प्रेष्ण गृह में शेल्टर सुविधा उपलब्ध करवाई साथ ही तीनो भाइयो का तीजवड़ राजकीय विद्यालय में प्रवेश भी दिलाया. आज तीनो भाई प्रतिदिन स्कूल आते हुए मन लगाकर पढ़ाई कर रहे है. वहीं तीनों बच्चों को पालनहार योजना से भी जोड़ा गया है. 

पिछड़ेपन के साथ बाल श्रम का कलंक अपने माथे पर ढोने वाले डूंगरपुर जिले में बाल श्रम धीरे धीरे दूर होने लगा है, जनता और चाइल्ड लाइन के प्रयासों की भूमिका के बाद अब जिले के नौनिहालों का शिक्षा की मूल धारा में जुड़ना जिले के भावी विकास के लिए शुभ संकेत है. 

By continuing to use the site, you agree to the use of cookies. You can find out more by clicking this link

Close