राजस्थान के चुनाव प्रचार में इन मुद्दों पर बीजेपी-कांग्रेस में रही तकरार

राजस्थान मे विधानसभा चुनाव के लिए हो रहे प्रचार में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेताओं के बयान सुर्खियों में रहे 

राजस्थान के चुनाव प्रचार में इन मुद्दों पर बीजेपी-कांग्रेस में रही तकरार
दोनों ही दलों की तरफ से स्टार प्रचारकों ने भी माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

जयपुर/सुशांत पारीक: राजस्थान विधानसभा चुनाव प्रचार में पिछले 15 दिनों में भाजपा कांग्रेस की तरफ से जमकर घमासान हुआ. एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के दौर चले. जाति से लेकर शुरू हुआ विवादों का मुद्दा गोत्र से होता हुआ बजरंगबली की जाति तक जा पहुंचा. फिर भारत माता की जय से लेकर कांग्रेस की विधवाएं जैसे शब्दों तक आकर ठहरा.

राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर जहां भाजपा के तमाम बड़े नेता खुद नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने अपनी पूरी ताकत लगाई. वहीं कांग्रेस की तरफ से चुनाव प्रचार की कमान राहुल गांधी के अलावा अशोक गहलोत सचिन पायलट जैसे नेताओं के पास रही. दोनों ही दलों की तरफ से स्टार प्रचारकों ने भी माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. 

चुनाव प्रचार में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेताओं के बयान सुर्खियों में रहे हैं. प्रचार के शुरुआती दौर में बीड़ी कला के सोनिया गांधी की जय के वीडियो से हंगामा हुआ तो सीपी जोशी की जाति का मुद्दे ने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को माफी मांगने पर मजबूर किया. एक तरफ योगी आदित्यनाथ के बजरंगबली की जाति के बयान पर भी खूब हो हल्ला हुआ तो वहीं अशोक गहलोत ने जहां मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के झुक कर प्रणाम करने की बात पर भाजपा ने हंगामा किया.

राहुल गांधी के गोत्र को लेकर दोनों दलों की तरफ से एक दूसरे पर हमले हुए. चुनाव प्रचार के आखिरी समय तक आते आते बयान बाजी का स्तर भारत माता की जय के विवाद से लेकर कांग्रेस की विधवाओं तक के स्तरहीन शब्दों तक जा पहुंचा. प्रमुख नेताओं स्टार प्रचारकों के अलावा दोनों ही दलों की तरफ से बड़े नेताओं ने चुनाव प्रचार की कमान संभाले रखी. 

यहां तक की पीएम मोदी ने भी कांग्रेस और गांधी परिवार के लिए 'नामदार' जैसे जुमलों का खूब प्रयोग किया. राजस्थान में मोदी सरकार का पूरा का पूरा मंत्रिमंडल उतर आया. पिछले 2 महीने से मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर जयपुर में कैंप किए हुए थे तो नितिन गडकरी और सुषमा स्वराज से लेकर पियूष गोयल जैसे मंत्री राजस्थान में प्रचार के लिए आए. जिन्होने जीएसटी से लेकर बिजली-पानी तक के मुद्दों पर जमकर चर्चा की.

जबकि कांग्रेस की तरफ से अहमद पटेल गुलाम नबी आजाद, मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला, अविनाश पांडे, राजीव शुक्ला, आनंद शर्मा, पवन खेड़ा और मनीष तिवारी जैसे नेता प्रेस वार्ताओं के जरिए ना केवल भाजपा पर हमला करते रहे, बल्कि चुनावी प्रबंधन की कमान भी संभाले रखी. साथ कांग्रेस ने बीजेपी से 5 साल में किए गए विकास कार्यों की रिपोर्ट भी मांगी और बीजेपी पर सिर्फ मंदिर -मस्जिद के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया. 

बहरहाल अब चुनावी प्रचार का शोर थम गया है.7 तारीख को मतदान होना है, 11 तारीख को परिणाम आएगा. देखना होगा कि दोनों दल के नेताओं के आकाओं और सेनापतियों की तरफ से जो कोशिशें हुई है जनता उन कोशिशों पर उन वादों पर कितना भरोसा करती है और किस दल के हाथों में राजस्थान की कमान सौंपती है. 

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