राजस्थान: डीग-कुम्हेर विधायक विश्वेन्द्र कांग्रेस से नाराज,छोड़ सकते हैं पार्टी

राजस्थान में कांग्रेस की गठित 9 कमिटियो मे विश्वेन्द्र को जगह नहीं मिलने के कारण वो काफी खफा दिख रहे हैं.

राजस्थान: डीग-कुम्हेर विधायक विश्वेन्द्र कांग्रेस से नाराज,छोड़ सकते हैं पार्टी
फाइल फोटो

जयपुर/नई दिल्ली: भरतपुर के पूर्व राजपरिवार से सम्बन्ध रखने वाले डीग-कुम्हेर विधायक महाराजा विश्वेन्द्र सिंह कांग्रेस से नाराज चल रहे हैं. कांग्रेस की चुनाव से पहले गठित कमेटियों में विश्वेन्द्र का नाम ना आने की वजह से से नाराज विश्वेन्द्र पार्टी भी छोड़ सकते हैं. राजस्थान में कांग्रेस की गठित 9 कमिटियो मे विश्वेन्द्र को जगह नहीं मिली है. विधायक विश्वेन्द्र पार्टी के इस निर्णय से काफी खफा दिख रहे हैं. 

विश्वेन्द्र से जुड़े लोगो का कहना है कि प्रदेश चुनाव समिति में कांग्रेस के दिग्गज नेता और भरतपुर राजपरिवार  से संबंध रखने वाले विश्वेन्द्र को कोई भी पद नही दिया गया है. ऐसा कर  कांग्रेस ने दिग्गज जाट नेता का अपमान किया है. उनके समर्थकों का मानना है कि उन्हें नवगठित कांग्रेस की कमेटियों मे जगह मिलना चाहिए था. बताते चलें कि  विश्वेन्द्र सिंह का पूर्वी राजस्थान के भरतपुर और धौलपुर जिले में काफी प्रभाव है.

राजस्थान कांग्रेस में विश्वेन्द्र सिंह को नजरअंदाज करना कांग्रेस को भारी पड़ सकता है. वो कांग्रेस के पक्ष में होने वाले मतों को काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं.  फिलहाल विश्वेन्द्र इस मुद्दे पर मीडिया से कुछ भी कहने को तैयार नही हैं. 

भरतपुर के पूर्व राजपरिवार से सम्बन्ध रखने वाले विश्वेन्द्र फिलहाल भरतपुर जिले के डींग से विधायक हैं. जाट बाहुल्य भरतपुर जिले में विश्वेन्द्र सिंह का काफी प्रभाव भी है. राजपरिवार से सम्बन्ध रखने की वजह से जाट समुदाय का एक  बड़ा तबका उनके साथ खड़ा रहता है.  

वैसे पिछले दिनों विश्वेन्द्र वसुंधरा सरकार को जाट आरक्षण के मुद्दे पर अल्टीमेटम देने वाले विश्वेन्द्र ने चुनाव से पहले जाट समुदाय की नाराजगी को अपने पक्ष में भुनाने के लिए आंदोलन को फिर से चालु करने का प्रयास किया था. जो शुक्रवार को राज्य सरकार से बातचीत के बाद फिलहाल टल गया है. 

भरतपुर जिले के डीग-कुम्हेर विधायक से विधायक विश्वेंद्र की पत्नी दिव्या सिंह भी भरतपुर जिला परिषद् की सदस्य के अलावा लोकसभा सांसद भी रहीं हैं. उनके पिता महाराजा बिजेंद्र सिंह भरतपुर के आखिरी राजा थें और उन्होंने 1962 से लेकर 1971 तक लोकसभा में भरतपुर का प्रतिनिधित्व भी किया था.

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