शराबियों का अड्डा बना चित्तौड़गढ़ का यह तालाब, लोगों के लिए भी बन रहा खतरनाक

सातवीं शताब्दी में चित्तौड़गढ़ किले की चित्रांगद राजा द्वारा नीव रखी गई थी. उस दौरान मजदूरों और आम लोगों को पानी पीने के लिए चित्रांगद राजा द्वारा इस तालाब का निर्माण करा गया था.

शराबियों का अड्डा बना चित्तौड़गढ़ का यह तालाब, लोगों के लिए भी बन रहा खतरनाक
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चित्तौड़गढ़: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित चतुरंग मोर्य तालाब पर सालभर में कई लोग पिकनिक मनाने के लिए पहुंचते हैं. लोग यहां अपने परिवार के साथ अच्छा वक्त बिताने के लिए तो आते हैं लेकिन अपने परिवार की तरह वो इस तलाब की देखरेख करना भूल जाते हैं. तालाब के आस-पास हजारों की संख्या में पहुचंने वाले ये लोग लगातार इस तलाब को गंदा कर रहे हैं.

बता दें, सातवीं शताब्दी में चित्तौड़गढ़ किले की चित्रांगद राजा द्वारा नीव रखी गई थी. उस दौरान मजदूरों और आम लोगों को पानी पीने के लिए चित्रांगद राजा द्वारा इस तालाब का निर्माण करा गया था. जिसका नाम चतरंग मोर्य रखा गया था. इस तालाब में साल भर पानी की आवक बनी रहती है.

पानी कभी समाप्त नहीं होता है. वर्ष भर में इस तालाब पर पिकनिक मनाने पर्यटक पहुंचते हैं लेकिन असामाजिक तत्वों द्वारा शराब बीयर की बोतलों का सेवन कर यहीं पर बोतल फेंक दी जाती है. जिससे पूरे तालाब पर कांच के टुकड़े जगह-जगह फेल रहे हैं और वहीं आने वाले पर्यटकों द्वारा खाने पीने के बाद बचा सामान तालाब में फेंक देने के कारण यह तालाब लगातार गंदा होता जा रहा है. 

वहीं, पुरातत्व विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है. पुलिस सुरक्षा के भी यहां किसी प्रकार के इंतजाम नहीं हैं. जिससे असामाजिक तत्वों द्वारा प्रतिदिन यहां शराब का सेवन कर कांच की बोतल फेंक दी जाती है. जिस वजह से यह तलाबा यहां आने वाले लोगों के लिए खतरनाक भी बनता जा रहा है. तलाब के आसपास बीयर और शराब की बोतले फैंकने के कारण कांच से लोगों को जान का खतरा है. 

वहीं लोगों द्वारा यहां पिकनिक मनाने के बाद छोड़ा गया सामान भी यहां गंदगी का कारण बन रहा है. 

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