डीडवाना का राजकीय अस्पताल बना सरकार के लिए बड़ी चुनौती, 99 पद खाली

डीडवाना का राजकीय बांगड़ अस्पताल नागौर जिले का सबसे बड़ा अस्पताल है

डीडवाना का राजकीय अस्पताल बना सरकार के लिए बड़ी चुनौती, 99 पद खाली
बांगड़ अस्पताल में स्वीकृत 195 पदों में से 99 पद खाली पड़े हैं

हनुमान तंवर/डीडवाना: नागौर जिले के सबसे बड़े डीडवाना के राजकीय बांगड़ अस्पताल में स्वीकृत 195 पदों मे से 99 पदों को भरना नई सरकार के विधायक चेतन डूडी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. विधायक चेतन डूडी ने सत्ता में आते ही बांगड़ अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी से हालात और व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अस्पताल की दशा सुधारने को लेकर चर्चा की.

डीडवाना का राजकीय बांगड़ अस्पताल नागौर जिले का सबसे बड़ा अस्पताल है मगर सुविधाओं के हिसाब से यहां आज भी कई कमियां है जो मरीजो पर भारी पड़ रही है. बांगड़ अस्पताल में 200 बेड स्वीकृत होने के बावजूद सुविधाएं में काफी कमी यहां नजर आती है. यहां 200 बेड के हिसाब से कुल 195 पद स्वीकृत है. 24 चिकित्सकों के पद स्वीकृत होने के बावजूद यहां अभी 18 चिकित्सकों के पद खाली पड़े है. अस्पताल के नर्सिंग और अन्य पदों मे से 81 पद खाली पड़े है.

बांगड़ अस्पताल में ट्रोमा सेंटर भी वसुंधरा राजे की पूर्व सरकार द्वारा खोला गया मगर वो शुरू नहीं हो पाया. दूसरी तरफ बांगड़ अस्पताल में ब्लड बैंक के नए भवन को उद्घाटन और लोकार्पण के बाद भी बीते 2 साल से शुरू होने का इंतज़ार है. यहां तक की स्थानीय विधायक यूनुस खान इसको शुरू करवाने में नाकाम रहे.  सत्ता परिवर्तन के बाद क्षेत्र की जनता को नए विधायक चेतन डूडी से एक उम्मीद जगी है. 

वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि आधे से ज्यादा पद अस्पताल में खाली है और जो चिकित्सक यहां वर्तमान में लगे हुए है वो अस्पताल समय पर यहां मिलते नहीं है. मरीजों को उनके घर जाकर दिखाना पड़ता है जहां मरीज से दो सौ रुपये फीस वसूली जाती है. ग्रामीणों ने पूर्ववर्ती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे यहां के स्थानीय विधायक यूनुस खान पर अस्पताल को बदहाल करने का आरोप लगाया है.

विधायक ने अस्पताल की बदहाली को लेकर बताया कि मैंने विधायक बनने के साथ ही इसको प्राथमिकता में लिया है और खाली पदों को लेकर जिले के सीएमएचओ से बात कर पदों पर नियुक्ति की बात की है. साथ ही अस्पताल की समस्याओं और जरूरतों के लिए बांगड़ अस्पताल के चिकित्सकों की भी एक मीटिंग ली गई है ताकि अच्छा स्वास्थ्य अच्छी चिकित्सा स्थानीय लोगो को मिल सके. खाली पदों को जल्द भरवाने की कोशिश की जायेगी. विधायक डूडी भी मानते हैं कि अच्छी सुविधा तभी मिल पाएगी जब यहां बराबर स्टाफ होगा. 

प्रदेश की गहलोत सरकार ने सत्ता में आते ही सबसे पहला काम प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था सुधारने और सुदृढ करने की पहल की है. गहलोत की पूर्व सरकार में चालू की गई चिकित्सा सुविधाओं को फिर से लागू किया जाएगी तो अब स्थानीय विधायक की पहल भी लोगो में उम्मीद की किरण बनकर आई हैं जरूरत इस बात की है कि दावों और वादों के मुताबिक धरातल पर काम हो.