अजमेर शरीफ पर चढ़े फूलों से बन रही खाद पर खादिमों का विरोध, दिया धार्मिक भावनाओं का हवाला

हाल ही में अजमेर शरीफ दरगाह के फूलों से जैविक खाद बनाने का कार्य दरगाह कमेटी और हिंदुस्तान जिंक ने शुरू किया था.

 अजमेर शरीफ पर चढ़े फूलों से बन रही खाद पर खादिमों का विरोध, दिया धार्मिक भावनाओं का हवाला
खादिमों का कहना है कि दरगाह कमेटी ख्वाजा साहब के मज़ार के फूलों की बेकद्री कर रही है.

अजमेर: विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह अजमेर शरीफ, यहां हज़ारो लाखों जायरीन अपना मत्था टेकने आते है और अपनी अक़ीदत के फूल दरबार मे पेश करते है. दरगाह में हज़ारों क्विंटल फूल हर रोज पेश किए जाते है तो उन्हें बाद में एक फूल बावड़ी में ठंडा किया जाता था लेकिन अब इसे दरगाह कमेटी जैविक खाद बनाने में इस्तेमाल कर रही है तो खादिमों का जबरदस्त विरोध भी शुरू हो गया है.

गौरतलब है कि हाल ही में अजमेर शरीफ दरगाह के फूलों से जैविक खाद बनाने का कार्य दरगाह कमेटी और हिंदुस्तान जिंक ने शुरू किया था. इस उद्धघाटन कार्यक्रम में खादिमों की अंजुमन के पदाधिकारी भी मौजूद थे और इस पहल को उन्होंने सराह भी था. यही वजह रही कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत बीते दिनों पीएम नरेंद्र मोदी से वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिए बातचीत में अंजुमन के सदर सैय्यद मोईन हुसैन चिश्ती ने कहा था कि दरगाह के दो हज़ार खादिम इस जैविक खाद के पैकेट को ज़ायरीन में बांटेंगे और हर अकीदतमंद को कहेंगे कि वो इस खाद को अपने घर के गमले में मिलाएं ताकि उनके घर मे ख्वाजा साहब के करम से सुख शांति और खुशहाली बनी रहे.

एक तरफ जहां दरगाह कमेटी के द्वारा दरगाह के फूलों से जैविक खाद का समर्थन करते हुए खादिमो की अंजुमन सदर ने ज़ायरीन को खाद के पैकेट ज़ायरीन में बांटने की बात कही तो दूसरी तरफ फूलों की बेकद्री और जैविक खाद बनाने का मामला अब बेहद तूल पकड़ता ही जा रहा है. विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह कमेटी को अब वहीं के खादिमों के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है.

खादिमों में इस बात को लेकर बेहद नाराज़गी है कि दरगाह कमेटी ख्वाजा साहब के मज़ार के फूलों की बेकद्री कर रही है. जबकि ये फूल लाखो करोड़ो लोगो की आस्था से जुड़े हुए है. इसी सिलसिले में खादिमों और स्थानीय मुस्लिमों ने मिलकर दरगाह कमेटी के खिलाफ एक जुटता दिखाते हुए दरगाह के फूलों की बनाई जा रही जैविक खाद को तुरंत रुकवाने का फैसला लिया है. वहीं मजार के फूलों को दरगाह कमेटी को ना देकर खुद ज़ायरीन को ज्यादा से ज्यादा तबर्रुक यानी प्रसाद के तौर पर देने की बात कही है.

गौरतलब है कि दरगाह कमेटी और हिंदुस्तान जिंक के बीच दरगाह के फूलों को लेकर जैविक खाद बनाने का कार्य कायड़ विश्राम स्थल पर शुरू किया गया है. जिसमे लाखो रुपयों की मशीनें लगाई गई है. इसी के साथ साथ फूलों से तैयार हो रही जैविक खाद को किसानों को फायदे में बेचा जा रहा है. खादिमों का आरोप है कि दरगाह के फूल आस्था से जुड़े है और इन्हें अकीदतमंद बीमारियों से निजात के लिए भी ले जाते है. इसके अलावा खादिम समुदाय के लोग अपने अपने मेहमानों में इस अनमोल तबर्रुख को बांटते है. इस लिए दरगाह कमेटी को कोई हक नहीं बनता की वो दरगाह के फूलों को खाद बनाने में इस्तेमाल करें और अक़ीदत मंदो की आस्था को ठेस पहुंचाए.

खादिमों ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज की बारगाह में सभी धर्म के अनुयायी आते है और सबकी इन फूलों में आस्था बनी हुई है. खादिमों ने निर्णय लिया है कि मज़ार शरीफ पर हर रोज़ पेश होने वाले हज़ारो क्विंटल फूलों को दरगाह कमेटी के हवाले नहीं किया जाएगा बल्कि खादिम खुद ही इसे इस्तेमाल करेंगे. कुछ खादिमो का मानना है कि तबर्रुख के तौर पर ज़ायरीन को दिए जाने वाले फूलों से हर मर्ज का इलाज़ हो जाता है. यहां तक कि किसी भी गंभीर बीमारी से अकीदतमंद को फायदा मिलता है.

अजमेर दरगाह के फूलों से एक दो नहीं बल्कि लाखो करोड़ो लोगो की आस्था जुड़ी हुई है. यही वजह है कि पहले दरगाह के फूलों को एक बावड़ी में ठंडा यानी नमक डाल कर गला दिया जाता था. अब जबकि इन फूलों को जैविक खाद में तब्दील कर दरगाह कमेटी इसे किसानों को बेच रहे है तो इसे आस्था का मामला बता कर खादिमों का विरोध शुरू हो चुका है जो आगे चल कर बड़ा रूप ले सकता है.

By continuing to use the site, you agree to the use of cookies. You can find out more by clicking this link

Close