रोडवेज विभाग की लापरवाही से खस्ताहाल डूंगरपुर बस डिपो, हुआ लाखों का नुकसान

जहां डिपो को नुकसान हो रहा है वहीं बसे नहीं होने से यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है

रोडवेज विभाग की लापरवाही से खस्ताहाल डूंगरपुर बस डिपो, हुआ लाखों का नुकसान
डूंगरपुर डिपो को प्रतिमाह करीब 23 लाख राजस्व का नुकसान हो रहा है

अखिलेश शर्मा/डूंगरपुर: प्रदेश के आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले में राजस्थान रोडवेज विभाग की उदासीनता डूंगरपुर डिपो के बड़ी भारी पड़ रही है. राजस्थान रोडवेज विभाग की लापरवाही से डूंगरपुर डिपो की कई बसे ऑफ रोड पड़ी है. जिसके चलते जहा डूंगरपुर डिपो को लाखो रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है वहीं ऑफ रोड बसे होने से यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. 

डूंगरपुर जिले के बस डिपो में लोगों को सुविधा युक्त परिवहन की सुविधा देने के लिए चल रही रोडवेज इन दिनों खस्ताहाल है. खासकर डूंगरपुर जिले की हालत बहुत ही नाजुक है. रोडवेज बेड़े में 90 बसों की जरूरत है लेकिन 79 ही उपलब्ध है और वह भी पूरी तरह से खस्ताहाल है. इसमें से 11 रोडवेज बस तो पूरी तरह से कंडम हो चुकी है, जिन्हें लोगों के परिवहन करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. विभागीय उदासीनता व लापरवाही के चलते डूंगरपुर डिपो राजस्व नुकसान उठाने को मजबूर है. वर्तमान में डूंगरपुर डिपो की 11 बसे इंजन, टायर व पुर्जो के अभाव में ऑफ रोड होकर डिपो में खस्ताहाल खड़ी है. 

डूंगरपुर डिपो की 11 बसों के पिछले दो माह से ऑफ रोड होने से डूंगरपुर डिपो को लाखो के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है. डिपो की 11 बसे ऑफ़ रोड होने से 2200 किलोमीटर प्रतिमाह बसे रन नहीं कर पा रही हैं. जिसके चलते डूंगरपुर डिपो को प्रतिमाह करीब 23 लाख राजस्व का नुकसान हो रहा है. इधर जहां डिपो को राजस्व नुकसान हो रहा है वहीं बसे नहीं होने से यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ः

रोडवेज बेड़े में बसों की कमी और 11 बसों के ऑफ होने के चलते कई स्थानीय रूप पूरी तरह से प्रभावित हो चुके हैं. जहां पहले रोडवेज बस चलती थी अब वहां के लोग निजी वाहनों पर ही निर्भर चुके हैं. डूंगरपुर रोडवेज की बात करें तो बांसवाड़ा, उदयपुर, अहमदाबाद वह बड़े रूट हैं जिन पर सिर्फ रोडवेज बसें चल रही है. जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के रूट पर चलने वाली बसें बंद हो चुकी है ऐसी हालत में गांव के लोग निजी बस जीप फोटो पिकअप अन्य वाहनों से ओवरलोड बैठकर सफर करने को मजबूर हो गए हैं.

वहीं सरकार और प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे पा रहा है जबकि परेशानी यात्री लोग भुगत रहे हैं. इधर इस मामले में जब डूंगरपुर डिपो संचालन प्रबंधक से बात की गई तो उन्होंने कहा की बसों की कमी व सामान की कमी से ऑफ़ रोड होने से नुकसान हो रहा है इस सम्बन्ध में प्रतिमाह जयपुर विभाग को डिमांड भेजी जाती है लेकिन डिमांड के अनुसार सामान नहीं मिलता. हालाकि उन्होंने कहा जैसे ही सामान मिलेगा बसों को ठीक कर ऑन रोड किया जाएगा. 

बहरहाल डूंगरपुर डिपो के अधिकारी जल्द ही ऑफ रोड बसों को ओन रोड लाने की बात कर रहे हो लेकिन पिछले दो माह से अपनों की अनदेखी डूंगरपुर डिपो को भारी पड़ रही है. अब देखना होगा की राज्य सरकार व रोडवेज के उच्चाधिकारी डूंगरपुर डिपो की इस समस्या का समाधान कब तक कर पाते है या युं ही अभी और डूंगरपुर डिपो व स्थानीय लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ेगा.