राजस्थान के चुनावी रण में मुकाबला हुआ दिलचस्प, कई सीटों पर त्रिकोणीय लड़ाई

राजस्थान विधानसभा की 199 सीटों के लिए 7 दिसंबर को होने वाले मतदान में 61 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बनती दिख रही है. 

राजस्थान के चुनावी रण में मुकाबला हुआ दिलचस्प, कई सीटों पर त्रिकोणीय लड़ाई
राज्य के कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्दलीय और बागियों ने चुनावी मुकाबले को कठिन बना दिया है.

शशि मोहन, जयपुर: राजस्थान विधानसभा की 199 सीटों के लिए 7 दिसंबर को होने वाले मतदान में 61 सीटों पर त्रिकोणीय और 11 सीटों पर चतुष्कोणीय मुकाबले की स्थिति बनती दिख रही है. यह स्थिति तीसरे मोर्चे की पार्टियों और दोनों दलों के दमदार बागियों के साथ कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों ने बनाई है. क्षेत्रवार देखें तो मुख्य मुकाबले मे नजर आ रहे भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के लिए प्रदेश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्से में इनमें से कई से ज्यादा चुनौती मिलती दिख रही है.

उम्मीदवारों ने चुनावी मुकाबले को बनाया दिलचस्प

राजस्थान में टिकट वितरण और नाम वापसी के बाद यूं तो 199 सीटों के लिए 2258 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. जिसमें बीजेपी, कांग्रेस के साथ ही बसपा, माकपा, समाजवादी पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी प्रमुख रूप से शामिल हैं. इसके अलावा स्थानीय दलों में चुनाव से ठीक पहले बनी भारत वाहिनी पार्टी, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और जमींदारा पार्टी जैसे कई दल चुनाव मैदान में है. हालांकि अधिकांश सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आमने-सामने का मुकाबला है. लेकिन कई सीटों पर त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय लड़ाई भी हो सकती है. वहीं 72 सीटों पर दूसरे प्रत्याशियों ने चुनावी मुकाबले में रोचक स्थिति बनाई है. 

राज्य में तीसरे मोर्चे की कवायद रही विफल

राजस्थान मे तीसरे मोर्च की पार्टियां इस बार कोई मजबूत तालमेल नहीं बना पाई है. यही कारण है कि तीसरे मोर्चा का दावा करने वाले दल कई जगह अपने कथित सहयोगी के खिलाफ़ उसी सीट पर चुनाव लड़ते दिख रहे हैं. हालांकि माकपा के साथ समाजवादी पार्टी और कुछ दलों ने मिल कर लोकतांत्रिक मोर्चा जरूर बनाया है, लेकिन बसपा, आम आदमी पार्टी इससे दूर हैं. चुनाव में कुछ सीटों पर प्रभावी मौजूदगी दिखाने वाले हनुमान बेनीवाल, घनश्याम तिवाड़ी और ज़मींदारा पार्टी भी इस मोर्चे से बाहर ही है. यही कारण है  कि तीसरा मोर्चा बिखरा हुआ है. कथित तीसरे मोर्चे की पार्टियां श्रीगंगानगर, हनुमानगढ, बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं, सीकर आदि जिलों में ज्यादा असर दिखा रही है और इन जिलों की करीब 20 सीटें सीधे तौर पर इन दलो के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनावी समीकरण को प्रभावित किया है. वहीं मध्य राजस्थान की बात करें तो जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा और टोंक जिलों में करीब 16 सीटें पर मुकाबला काफी कठिन हो सता है. इन सीटों पर ज्यादा तीसरे मोर्चे की पार्टियों से ज्यादा असर निर्दलीय उम्मीदवारों का होने का आसार नजर आ रहे हैं. 

पूर्वी राजस्थान में बीएसपी का है प्रभाव

पूर्वी राजस्थान की बात करें तो यहां तीसरे मोेर्चे के दलो में केवल बहुजन समाज पार्टी ही असरदार दिखती है. यहां इक्का-दुक्का सीट पर भारत वाहिनी भी उपस्थिति दर्ज कराती दिख रही है. वहीं बसपा का असर अलवर, भरतपुर, धौलपुर, कराौली, सवाई माधोपुर और दौसा जिलों में दिख रहा है. माना जा रहा है कि इन जिलों के कुछ सीटों पर बसपा को सफलता मिलने की उम्मीद है. आपको बता दें कि, बसपा और निर्दलीयों के कारण इन सभी जिलों की करीब 15 सीटें त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबले में फंसी है.

नागौर से बाड़मेर तक बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का है असर

पश्चिमी राजस्थान में नागौर से बाड़मेर तक और गोडवाड़ के पाली, जालौर सिरोही में हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का असर ज्यादा दिख रहा है. इसके साथ ही यहां कुछ दमदार निर्दलीय भी चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं. इन समीकरणों के कारण क्षेत्र की दस सीटों पर बहुआयामी मुकाबले के आसार दिख रहा है. उदयपुर संभाग में मेवाड़-वागड़ की सीटों पर देखें तो कुछ जगह जनता सेना का असर है. तो कुछ सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी उपस्थिति दर्ज कराते हुए.समीकरण रोचकर बना दिए हैं. कभी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले रणधीर सिंह भीण्डर ने जनता सेना का व्यापक आधार बनाने की कोशिश की है. संभाग की 10 सीटों पर त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबला बन रहा है.

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