जयपुर: बारिश से बांधों में 26 फीसदी पानी ज्यादा, पर बीलसपुर बांध अब भी प्यासा

बीसलपुर बांध में केवल 28 फीसदी पानी की बचा है वो भी रोजाना चारों जिलों में पानी की सप्लाई से लगातार कम हो रही है.

जयपुर: बारिश से बांधों में 26 फीसदी पानी ज्यादा, पर बीलसपुर बांध अब भी प्यासा
बीसलपुर बांध केवल दिसंबर तक चार जिलों की प्यास बुझा पाएगा.

आशीष चौहान/जयपुर: राजस्थान में इस साल 20 जिलों में औसत जबकि 5 जिलों में औसत से अधिक बारिश हुई. प्रदेश में अच्छी बारिश का परिणाम यह रहा कि 16 बड़े बांधों में पिछले साल के मुकाबले 26 फीसदी पानी अधिक संचय हुआ. लेकिन 8 बांधों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. दूसरी ओर जयपुर, टोंक, दौसा और अजमेर की लाइफलाइन कहे जाने वाले बीसलपुर बांध की स्थिति सबसे बुरी हालत में है. 

पिछले साल बीसलपुर बांध में 778 एमक्यूएम पानी था आज उसी बांध का पानी घटकर मात्र 318 एमक्यूएम ही बचा है. एक एमक्यूएम में 1 अरब लीटर पानी होता है. इस लिहाजे से इस साल 460 अरब लीटर पानी बीसलपुर बांध में कम है. ऐसे में बीलसपुर बांध प्यासा हो गया तो चार जिलों में जलसंकट की घड़ी कुछ महीनों के बाद देखने को मिलेगी. 

अनुमानित तौर पर बीसलपुर बांध केवल दिसंबर तक चार जिलों की प्यास बुझा पाएगा. उसके बाद इन जिलों में जलसकंट शुरू हो जाएगा. बीसलपुर की भराव क्षमता 1095 एमक्यूएम से अधिक है लेकिन पानी महज 318 एमक्यूएम ही बचा है. ऐसे में बीसलपुर बांध में पानी का संचय कम होने से चारों जिलों में जलसंकट खडा होना लगभग तय है. 

अब बीसलपुर बांध में केवल 28 फीसदी पानी की बचा है वो भी रोजाना चारों जिलों में पानी की सप्लाई से लगातार कम हो रही है.पिछले साल 22 बडे बाधों में केवल 45 फीसदी पानी था जो इस साल बढकर 71 फीसदी पहुंच गया है. बांध में पानी की कम आवक देखते हुए पहले ही जल विभाग ने पानी की कटौती करना शुरू कर दिया था. अब जयपुर के घरों में मात्र 45 से 70 मिनट ही पानी की सप्लाई होती है. जबकि शहर में पिछले 10 साल से एक से डेढ घंटे रोजाना पानी की सप्लाई होती थी. 

वहीं जल विभाग के चीफ इंजीनियर दिनेश सैनी की मानें तो बीसलपुर बांध में पानी स्थिति को देखकर तो यही लगता है कि अब वो समय ऐसा आने वाला है जब शहर को दो दिन में एक बार पेयजल सप्लाई की नौबत आएगी. बीसलपुर बांध में पानी की आवक कम होने का सबसे बडा कारण ये रहा कि जिन जिलों से बीसलपुर बांध में पानी आता है उन जिलों में बारिश कम हुई. 

बीसलपुर को भरने वाले इन पांच जिलों में इस साल हुई बारिश के आंकड़ों पर गौर करें तो टोंक, भीलवाड़ा, अजमेर, राजसमंद, इनमें से एक भी जिला ऐसा नहीं है जहां बारिश ने 590 मिमी का भी आंकड़ा पार किया हो. चितौडगढ में बारिश औसम से कम हुई है. अजमेर में माइनस 4.1,भीलवाडा में माइनस 2.4, टोंक में माइनस 9.5,चितौडगढ में माइनस 6 और जयपुर में माइनस 3 प्रतिशत कम बारिश हुई. 

बांध में सबसे ज्यादा पानी की आवक दो साल पहले साल 2016 में थी. तब टोंक, भीलवाड़ा, अजमेर, राजसमंद, और चित्तौडगढ़ में औसत से 28 से 83 फीसदी अधिक बरसात हुई जिससे बीसलपुर बांध लबालब भरकर 45 दिन तक ओवरफ्लो रहा था. वहीं बीसलपुर के आलावा और अन्य बांधों की बात करे तो राजस्थान के सबसे बडे राणा प्रताप सागर की स्थिति सबसे अच्छी है.चितौडगढ के इस बांध में 88 फीसदी पानी है,जबकि कोटा बेराज की 99.07,जवाहर सागर 93.74,बांसवाडा का माही बजाज सागर 93,हारों 100 फीसदी और प्रतापगढ का जाखम डेम 100 फीसदी फुल है. 

राजस्थान के 22 बांधों में से राणा प्रताप सागर, कोटा बैराज, जवाहर सागर, माही बजाज सागर, हारो,पार्वती डेम, जयसमंद और जाखम डेम की स्थिति काफी अच्छी है.जबकि सिकरी, कालख, सरदार समन्द, रामगढ, गलवा बांध की हालत पिछले सालों से जस की तस बनी हुई है. वहीं बीलसपुर बांध की स्थिति को देखते हुए लगता पानी का संकट इन चार जिलों में आने वाला है. 

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