LIVE : रेप केस में आसाराम की सजा पर बहस पूरी, थोड़ी देर में आ सकता है फैसला

आसाराम के अलावा अदालत ने शिल्‍पी और शरदचंद्र को दोषी करार दिया. जबकि शिवा और प्रकाश को बरी कर दिया. जोधपुर सेंट्रल जेल के अंदर बनी विशेष कोर्ट के जज मधुसूदन शर्मा ने अपना अहम फैसला सुनाया.

LIVE : रेप केस में आसाराम की सजा पर बहस पूरी, थोड़ी देर में आ सकता है फैसला
जोधपुर सेंट्रल जेल में बनी एससी/एसटी विशेष अदालत ने नाबालिग से बलात्कार के मामले में आसाराम को दोषी करार दिया. (फाइल फोटो)

जोधपुर/नई दिल्ली: जोधपुर सेंट्रल जेल में बनी एससी/एसटी विशेष अदालत ने नाबालिग से बलात्कार के मामले में आसाराम को दोषी करार दिया. आसाराम के अलावा अदालत ने शिल्‍पी और शरदचंद्र को दोषी करार दिया, जबकि शिवा और प्रकाश को बरी कर दिया. जोधपुर सेंट्रल जेल के अंदर बनी विशेष कोर्ट के जज मधुसूदन शर्मा ने अपना अहम फैसला सुनाया. जोधपुर सेन्ट्रल जेल में आसाराम बीते चार साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं. दोष निर्धारण के बाद अदालत में लंबे समय पर दोनों पक्षों के बीच सजा पर बहस चली, जिसमेें आसाराम के वकील ने जज से कम से कम सजा दिए जाने की मांग की.

आसाराम को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और यौन अपराध बाल संरक्षण अधिनियम (पोस्को) के तहत दोषी ठहराया गया. वह यौन उत्पीड़न के दो मामलों में मुकदमे का सामना कर रहे हैं. एक मुकदमा यहां राजस्थान में चल रहा है, जबकि दूसरा गुजरात में चल रहा है.

आसाराम को दोषी करार दिए जाने के बाद पीड़िता के पिता ने कहा कि अदालत से हमें इंसाफ मिला. आसाराम को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

 

 

अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद आसाराम की प्रवक्‍ता नीलम दुबे ने कहा कि हम अपनी लीगल टीम से चर्चा करेंगे और अपने अगले कदम के बारे में सोचेंगे. हमें न्‍यायपालिक पर पूरा भरोसा है. बाद में उनकी तरफ से कहा गया कि हम इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे.

 

 

फैसले के चलते सुरक्षा के मद्देनजर जोधपुर सेंट्रल जेल समेत पूरे जिले में सुरक्षा व्‍यवस्‍था कड़ी रखी गई और निषेधाज्ञा लागू की गई. राम रहीम पर फैसले के बाद पंचकूला में हुई हिंसा को ध्‍यान में रखते हुए केन्द्र ने राजस्थान, गुजरात और हरियाणा सरकारों से सुरक्षा बढ़ाने और अतिरिक्त बल तैनात करने को कहा था, क्योंकि इन तीनों राज्यों में 77 साल के आसाराम के बड़ी संख्या में अनुयायी हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक संदेश जारी कर तीनों राज्यों से सुरक्षा मजबूत करने को कहा. साथ ही यह सुनिश्चित करने को भी कहा गया कि अदालत के आदेश के बाद कोई हिंसा नहीं फैले. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि तीनों राज्यों से संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात करने के लिए कहा गया. 

आसाराम पर नाबालिग से रेप का था आरोप
आसाराम पर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की एक नाबालिग से बलात्कार करने का आरोप था, जिसमेें वो दोषी साबित हुए. यह लड़की मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में आसाराम के आश्रम में पढ़ाई कर रही थी. पीड़िता का आरोप है कि आसाराम ने जोधपुर के निकट मनई आश्रम में उसे बुलाया था और 15 अगस्त 2013 को उसके साथ दुष्कर्म किया था. आसाराम से इन आरोपों से इंकार किया है. 

शाहजहांपुर में पीड़िता के घर पर सुरक्षा
फैसले से पहले पीड़िता के पिता ने कहा था, ‘मुझे न्यायपालिका में पूरा भरोसा है और मुझे विश्वास है कि आसाराम को सख्त सजा दी जाएगी.’ उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पीड़िता के घर पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई. शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक के. बी. सिंह ने बताया कि पीड़िता के घर के बाहर सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जा रही है. आसाराम के शाहजहांपुर स्थित रुद्रपुर आश्रम पर भी नजर रखी जा रही हैं.

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गृह मंत्रालय ने जारी किया परामर्श
गृह मंत्रालय का यह परामर्श डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बलात्कार के जुर्म में सजा सुनाए जाने के बाद हरियाणा, पंजाब तथा चंडीगढ़ में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के मद्देनजर भेजा गया. आसाराम मामले में अंतिम दलीलें सात अप्रैल को पूरी हुई थीं और 25 अप्रैल को आदेश सुरक्षित रखा गया था. आसाराम को इंदौर में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें एक सितंबर 2013 को जोधपुर लाया गया था. वह दो सितंबर 2013 से न्यायिक हिरासत में हैं.

आसाराम के फैसले को देखते हुए दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट पर
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (24 अप्रैल) को बताया कि आसाराम द्वारा एक किशोरी से कथित रूप से बलात्कार के मामले में 25 अप्रैल को जोधपुर की एक अदालत द्वारा फैसला सुनाये जाने के मद्देनजर पुलिस को हाई अलर्ट पर है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिल्ली की सीमाओं पर उनका विभाग नजर रख रहा है. इसके अलावा शहर के अंदरूनी इलाकों पर उनकी नजर है, जहां आसाराम के समर्थक फैसले के बाद जमा हो सकते हैं. उन्होंने बताया, ‘‘हम किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पड़ोसी राज्यों के पुलिस बलों के संपर्क में हैं. उन राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों और एसएचओ को संबंधित क्षेत्रों में निगरानी रखने के लिए निर्देश दिए गए.’’

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