कोटा: पहले से ज्यादा खतरनाक हुआ स्वाइन फ्लू, कई लोगों की हुई मौत

स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए अस्पताल भी संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं. सम्भाग के सबसे बड़े अस्पताल में स्वाइन फ्लू वार्ड में 4 वेन्टिलेटर में से 1 ही काम कर रहा है.

कोटा: पहले से ज्यादा खतरनाक हुआ स्वाइन फ्लू, कई लोगों की हुई मौत
फाइल फोटो

कोटा: राजस्थान के कोटा सम्भाग में स्वाइन फ्लू का वायरस इस साल फिर जानलेवा होता जा रहा है. हाड़ौती अंचल में इस सीजन में 250 से ज्यादा मरीज इसकी चपेट में आ चुके हैं. इनमें से 26 की मौत हो चुकी है. इनमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं. स्वाइन फ्लू का प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर ज्यादा हो रहा है.

केवल 17 सितम्बर से 3 अक्टूबर तक के आंकड़े चौंकाने वाले है. 8 माह से लेकर 12 साल तक के 26 बच्चे इस वायरस की चपेट में आ गए हैं. वहीं 50 से 70 साल की उम्र तक 39 लोग भी इससे नहीं बच सके. बड़ी बात यह है कि 5 चिकित्सक भी इसकी चपेट में आए. चिकित्सकों की माने तो स्वाइन फ्लू का वायरस अब अपना स्ट्रेंथ बदल रहा है. पहले एचवन व एनवन था. अब एचथ्री व एनटू भी हो रहा है. 

यही कारण है कि इस वायरस की चपेट में आने से हर दसवा रोगी की काल का ग्रास बन रहा है. हालांकि, चिकित्सा विभाग इसको पिछले साल के मुकाबले कम मान रहा है. विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, सितम्बर में स्वाइन फ्लू का कहर करीब आधा दर्जन से ज्यादा मरीजों की जान ले चुका है. जबकि अक्टूबर के शुरुवाती सप्ताह में स्वाइन फ्लू के कारण 10 मरीजो की जान गई है. जबकि बीते 10 दिन में करीब 100 मरीजो में स्वाइन फ्लू पॉजिटिव की पुष्टि हुई है. 

स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए अस्पताल भी संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं. सम्भाग के सबसे बड़े अस्पताल में स्वाइन फ्लू वार्ड में 4 वेन्टिलेटर में से 1 ही काम कर रहा है. शेष तीन वेन्टिलेटर ठीक नहीं हुए है. जबकि यहां 8 मरीज भर्ती हैं. वहीं नए अस्पताल में केवल 2 वेंटिलेटर के सहारे काम चल रहा है जबकि स्वाइन फ्लू वार्ड में 12 मरीज भर्ती हैं. ऐसे में अगर तीन से ज्यादा मरीजो को वेंटिलेटर की जरूरत पड़े तो इधर उधर से मांग कर काम चलाना पड़ता है. ऐसी स्थिति में कई बार वेंटिलेटर के अभाव में गम्भीर मरीजो की मौत होने की संभावना बनी रहती है. पिछले दिनों आरएमआरएस की बैठक में वेन्टिलेटर को ठीक करवाने के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है.

मौसमी बीमारियों के बेकाबू होने से चिकित्सा विभाग में हड़कंप मचा है. बीमारियों की रोकथाम के लिए चिकित्सा विभाग के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं. इसके चलते चिकित्सा विभाग ने सभी चिकित्सकों के दो माह के अवकाश रद्द कर दिए हैं. संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील सिंह ने कोटा सीएमएचओ ऑफिस में चारों जिलों की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए.

हाड़ौती सम्भाग में बेकाबू होते स्वाइन फ्लू से लोगो मे दहशत का माहौल है. अस्पतालों की ओपीडी में मरीजो की लंबी कतारे देखने को मिल रही हैं. नर्सिंग कर्मचारी और चिकित्सक भी वेक्सिनेशन (टीके) नहीं होने से डर के साये में काम करने को मजबूर हैं. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि ऐसे हालातो में चिकित्सा विभाग कैसे स्वाइन फ्लू पर काबू पाएगा. 

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