फिल्मों में उपलब्धि के लिए नंदिता दास सम्मानित, मिलेगा एशिया पैसिफिक स्क्रीन अवार्ड

नंदिता को 1996 की फिल्म 'फायर', 1998 की 'अर्थ' और इसके बाद आई 'बिटवीन द लाइंस' जैसी मुद्दा आधारित फिल्मों में अपने शानदार अभिनय के लिए जाना जाता है.

 फिल्मों में उपलब्धि के लिए नंदिता दास सम्मानित, मिलेगा एशिया पैसिफिक स्क्रीन अवार्ड
नंदिता को एशिया प्रशांत क्षेत्र की फिल्मों में अपनी उपलब्धि के लिए सम्मानित किया जाएगा.

नई दिल्ली: भारतीय अभिनेत्री व फिल्मकार नंदिता दास को यहां 29 नवंबर को होने वाले 12वें एशिया पैसिफिक स्क्रीन अवॉर्ड्स (एपीएसए) में एफआईएपीएफ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नंदिता को एशिया प्रशांत क्षेत्र की फिल्मों में अपनी उपलब्धि के लिए सम्मानित किया जाएगा.

नंदिता को 1996 की फिल्म 'फायर', 1998 की 'अर्थ' और इसके बाद आई 'बिटवीन द लाइंस' जैसी मुद्दा आधारित फिल्मों में अपने शानदार अभिनय के लिए जाना जाता है. उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म 'फिराक' थी. उनके निर्देशन में बनी फिल्म 'मंटो' को कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में दिखाया गया.

एफआईएपीएफ के अध्यक्ष लुईस अल्बटरे स्कैलेला ने कहा, 'नंदिता दास ने एशिया प्रशांत के सिनेमा में पर्दे के पीछे और सामने, दोनों रूपों में असाधारण योगदान दिया है. बतौर अभिनेत्री और निर्देशक, उनके काम को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली है.' समारोह में सिंगापुर के फिल्मकार यिओ सिवु हुआ को यंग सिनेमा अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा.

आपको बता दें, 'मंटो' की कहानियां समाज के इर्द-गिर्द घूमती हुई होती हैं और समाज की सच्चाई को पेश करती हैं. जिसके चलते उनपर कई मुक्कदमे भी हुए. हालांकि, इसके बाद भी उन्होंने कभी लिखना नहीं छोड़ा. 'मंटो', सआदत हसन के जीवन पर आधारित है और स्वतंत्रता से पहले और स्वतंत्रता के बाद की कहानी को दिखाती है.

गौरतलब है कि नंदिता दास की फिल्म 'मंटो' के साथ सिंगापुर दक्षिण एशियाई अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव के दूसरे संस्करण का आगाज हुआ था. जिसको लेकर नंदिता ने कहा था, 'हम सिंगापुर दक्षिण एशियाई अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव में ओपनिंग फिल्म के रूप में मंटो की स्क्रीनिंग से काफी खुश हैं'. फिल्मोत्सव पांच से 14 अक्टूबर तक आयोजित किया गया था. फिल्मोत्सव के अध्यक्ष अभयानंद सिंह ने कहा, 'हमें खुशी है कि नंदिता दास ने महोत्सव आने और फिल्म पेश करने के हमारे निमंत्रण को स्वीकार कर लिया'.

वहीं मंटो के बारे में बात करते हुए नंदिता ने कहा था कि 'मंटो हमेंशा से ही अपने विचारों को रखने की आजादी के साथ खड़े थे. उन्होंने अपने जीवन में संघर्षों और अपने लेखन के जरिए इसे प्रदर्शित भी किया है. उन्होंने सभी प्रकार की रूढ़िवादिता को चुनौती दी. इसके चलते उन्हें छह मुकदमों का भी सामना करना पड़ा. फिल्म मंटो में मुख्य भूमिका के लिए उन्होंने नवाजुद्दीन सिद्दीकी को चुना क्योंकि उनमें उर्दू के महान लेखक और कहानीकार की तरह कई समानताएं हैं.'  

(इनपुट-आईएएनएस)  

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