राजस्थान: बीजेपी अब तक तय नहीं कर पाई नेता प्रतिपक्ष, वसुंधरा राजे दौड़ से बाहर

बीजेपी में विधायक दल के नेता और नेता प्रतिपक्ष के चुनाव को लेकर तस्वीर अभी तक साफ नहीं हो सकी है

राजस्थान: बीजेपी अब तक तय नहीं कर पाई नेता प्रतिपक्ष, वसुंधरा राजे दौड़ से बाहर
इस पद के लिए अब वसुंधरा राजे के नाम को दौड़ से बाहर माना जा रहा है

शशि मोहन/जयपुर: प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस की सरकार बन चुकी है. वहीं अब बीजेपी विपक्ष के रूप मे काम कर रही है लेकिन बीजेपी में अब तक प्रतिपक्ष के नेता का इन्तज़ार हो रहा है. हालांकि इस पद के लिए अब वसुंधरा राजे के नाम को दौड़ से बाहर माना जा रहा है लेकिन राजे का नाम हटते ही तीन-चार नाम अचानक आगे आए हैं. इस बारे में बीजेपी नेताओं की राय अलग-अलग है, लेकिन पार्टी के नेता और पूर्व मन्त्री राजेन्द्र राठौड़ इतना ज़रूर कहते हैं कि सदन की पहली बैठक में बीजेपी विधायक दल अपने नेता के साथ ही पहुंचेगा.

विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस विधायक दल का नेता दिल्ली से तय हुआ और उसमें तीन दिन का वक्त भी लगा. इधर बीजेपी में भी विधायक दल के नेता और नेता प्रतिपक्ष के चुनाव को लेकर तस्वीर अभी तक साफ नहीं हो सकी है. बीजेपी में नेता प्रतिपक्ष का ऐलान विधायक दल की बैठक में होना है और अभी हालात ऐसे हैं कि विधायक दल की बैठक के लिए तारीख़ ही तय नहीं है. अलबत्ता वसुंधरा सरकार में संसदीय कार्य मन्त्री और चूरू से बीजेपी विधायक राजेन्द्र राठौड़ इतना ज़रूर कहते हैं कि बीजेपी के विधायक पन्द्रहवीं विधानसभा की पहली बैठक में जब जाएंगे तो प्रतिपक्ष के नेता की अगुवाई में ही दाखिल होंगे. 

बीजेपी हिन्दी बेल्ट के तीन राज्यों में चुनाव हारी है. उसके बाद छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष तय हो चुका है. दोनों ही राज्यों में पूर्व मुख्यमन्त्री को नेता प्रतिपक्ष का ओहदा नहीं दिया गया. ऐसे में राजस्थान में भी इसी नीति का दोहराव होने के संकेत मिल रहे हैं. वसुंधरा राजे का नाम नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में कमज़ोर पड़ने के बाद इस कुर्सी के लिए पार्टी में कुछ चेहरे प्रमुखता से सामने आए हैं. पिछली बार विधानसभा अध्यक्ष रहे कैलाश मेघवाल के नाम पर चर्चा हुई है. 

इसके साथ ही 8 बार के विधायक और पूर्व मन्त्री गुलाबचन्द कटारिया, पूर्व मन्त्री राजेन्द्र राठौड़, नरपत सिंह राजवी जैसे नाम सामने आये हैं. इनमें से कटारिया तो मंगलवार को आरएसएस के पदाधिकारियों से भी मिले. उधर दलित वोटों को साधने की कवायद के मामले में कैलाश मेघवाल और सरकार को घेरने के लिहाज से राजेन्द्र राठौड़ का नाम दमदार बताया जा रहा है. नेता प्रतिपक्ष के सवाल पर कटारिया कहते हैं कि पार्टी उन्हें कोई ज़िम्मेदारी देगी तो वह उसे जरूर निभाएंगे.

हालांकि राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष के चुनाव के लिए बीजेपी ने पर्यवेक्षक के रूप में प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना और केन्द्रीय वित्त मन्त्री अरूण जेटली को ज़िम्मेदारी दी है. लेकिन अभी तक दोनों नेताओं के राजस्थान दौरे की तारीख़ तय नहीं हुई है. इस बीच पार्टी में चर्चा इस बात की भी है कि नेता प्रतिपक्ष पर भले ही वसुंधरा राजे नहीं आएं, लेकिन पार्टी में उनकी राय को दरकिनार नहीं किया जा सकता.