राजस्थान: चुनावों की तारीख की घोषणा के बाद प्रदेश में लागू हुई आचार संहिता

आदर्श आचार संहिता वो नियम है जो चुनाव के दौरान प्रत्याशियों और राजनीतिक पार्टियों पर लागू होती है.

राजस्थान: चुनावों की तारीख की घोषणा के बाद प्रदेश में लागू हुई आचार संहिता
आचार संहिता का पालन करना सभी पक्षों को लिए अनिवार्य होता है.

जयपुर/ दीपक गोयल: राजस्थान में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर 7 दिसंबर को मतदान होंगे. विधानसभा चुनाव के लिए राज्य में एक ही चरण में मतदान होंगे. वही मतगणना की बात करें तो वह 11 दिसंबर के होगी. वहीं राजस्थान में मतदान को लेकर 12 नवंबर को नोटिफकेशन जारी होगा. जबकि 19 नवंबर तक भरे जा सकेंगे नामांकन. वहीं 20 नवंबर को नामांकनों की छटनी की जाएगी और 22 नवंबर तक उम्मीदवार अपना नाम चुनाव से वापस ले सकेंगे.

बता दें कि राज्य में चुनाव की तारीख के ऐलान साथ राज्य में आचार संहिता भी लागू हो गई है. गौरतलब है कि आचार संहिता लागू होने के साथ ही पार्टियों, मंत्री, आयोग अध्यक्षों के साथ अफसरों और चुनाव कार्य में लगी प्रशासनिक टीमों पर कई तरह की पाबंदियां लग गई हैं. बता दें कि आदर्श आचार संहिता वो नियम है जो चुनाव के दौरान प्रत्याशियों और राजनीतिक पार्टियों पर लागू होती है. जिसका पालन करना सभी पक्षों को लिए अनिवार्य होता है.

मंत्रियों पर यह अंकुश
मंत्री गाड़ी में वीवीआईपी संकेतक तो दूर सायरन भी नहीं लगा सकेंगे. वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान वाहन, बेरिकेडिंग, मंच, प्लेटफॉर्म जैसी जरूरतों का खर्च पार्टी ही उठाएगी. राजकीय वाहनों और निजी स्टाफ का चुनाव संबंधी यात्राओं, अभियानों, चुनावी कार्यों में साथ नहीं रख सकेंगे. सरकारी खर्च पर होने वाले धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों में मंत्री अतिथि के बतौर शामिल नहीं हो सकेंगे.

वहीं मंत्री व अन्य नेता कवि सम्मेलन, मुशायरा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल तो हो सकेंगे, मगर राजनीतिक भाषणबाजी नहीं कर पाएंगे. मंत्री या अन्य अथॉरिटी स्वविवेक फंड से अनुदान या भुगतान मंजूर नहीं कर पाएंगे.  मंत्री चुनाव से जुड़े अधिकारियों को कार्यालय तो दूर गेस्ट हाउस में भी नहीं बुला पाएंगे. गेस्ट हाउस में 48 घंटे से ज्यादा रुक भी नहीं सकेंगे.

साथ ही आयोगों के पदाधिकारी भी अब राजकीय यात्राएं नहीं कर पाएंगे. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति सहित सभी आयोगों के पदाधिकारियों की राजकीय यात्राओं पर रोक लगेगी, जब तक कि कोई आपातकाल जैसी स्थिति न हो. जिन अफसरों की पत्नियां या पति सक्रिय राजनीति में हैं वे उस क्षेत्र का टूर नहीं कर सकेंगे. जिन अधिकारियों का परिवार मुख्यालय से दूर रहता हो तो भी वे निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने तक मुख्यालय छोड़कर नहीं जा सकेंगे. 

वहीं चुनाव अधिकारियों के पास अगर 50 हजार रुपए से ज्यादा नकद, 10 हजार से ज्यादा का गिफ्ट चुनाव सामग्री के साथ मिला तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. हालांकि इस बार शादी व अन्य समारोह के लिए छूट दी गई है, लेकिन 50 हजार से ज्यादा रुपयों का हिसाब भी देना होगा.

वहीं प्रदेश में जिन विभिन्न योजनाओं में जिन कामों के टेंडर हो चुके हैं और काम शुरू नहीं किए गए तो संहिता लागू होने के बाद ये काम भी शुरू नहीं हो सकेंगे. चुनाव संबंधी किसी भी गड़बड़ी की शिकायत भारत निर्वाचन आयोग से C-VIGIL एप पर कर सकते हैं. शिकायतकर्ता साक्ष्य के तौर पर फोटो, वीडियो व अन्य तथ्य भेज सकते हैं. आयोग शिकायत को राज्य-जिला स्तरीय एमसीएमसी कमेटी के पास कार्रवाई के लिए भेजेगा. 

बता दें कि आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में पांच साल में 16.58 फीसदी मतदाता बढ़े हैं. इन पांच सालें में 67 लाख 53 हजार 258 मतदाता नए जोड़े गए. शहरों में विस्तार के साथ ही इनकी संख्या में इजाफा हुआ है. 2013 में 4 करोड़ 7 लाख 26 हजार 144  मतदाता थे जो 2018 में बढ़कर 4,74,79, 402 हो गए. आयोग के मुताबिक राज्य में 1,13,642 सर्विस मतदाता भी हैं. उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 4,07,26,144 थी. 

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