राजस्‍थान विधानसभा चुनाव 2018: अलवर और अजमेर में BJP की राह नहीं है आसान

लोकसभा उपचुनाव में अपनाई गई रणनीति को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस लगातार बीजेपी की दुगती रग पर हाथ रख मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है.

राजस्‍थान विधानसभा चुनाव 2018: अलवर और अजमेर में BJP की राह नहीं है आसान
एससी-एसटी एक्‍ट में संशोधन बिल से सवर्णों की नाराजगी बीजेपी की मुश्‍किल बढ़ाने के लिए काफी है. (फाइल फोटो)
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नई दिल्‍ली: राजस्‍थान विधानसभा चुनाव 2018 में जीत हासिल करने के लिए सत्‍तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी दल कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. जनवरी 2018 के लोकसभा उपचुनावों में अजमेर और अलवर संसदीय सीट से शानदार जीत हासिल करने वाली कांग्रेस बेहद उत्‍साहित है. लोकसभा उपचुनाव में अपनाई गई रणनीति को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस लगातार बीजेपी की दुगती रग पर हाथ रख मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है. 

वहीं बीजेपी की कोशिश है कि बीते 5 सालों में उत्‍पन्‍न हुए वैचारिक जख्‍मों पर नई योजनाओं का मरहम लगाकर मतदाताओं को अपने पक्ष में बनाए रखे. दोनों दलों की इस कवायद के बावजूद जीत का ऊंट किस करवट बैठता है, इसका फैसला अब विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजे आने के बाद ही स्‍पष्‍ट हो सकेगा. 

कांग्रेस ने बनाई मजबूत की पकड़
राजस्‍थान विधानसभा चुनाव 2013 में बीजेपी ने 200 में से 163 सीट जीतकर सत्‍ता में शानदार वापसी की थी. राजस्‍थान में बीजेपी की जीत का यह सिलसिला लोकसभा चुनाव 2014 में भी जारी रहा. इन चुनावों में राजस्‍थान की सभी 25 संसदीय सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी. पहले विधानसभा, फिर लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बावजूद कांग्रेस ने अपनी हिम्‍मत नहीं छोड़ी. 

समय के साथ विभिन्‍न मुद्दों पर लोगों की प्रदेश सरकार के प्रति बढ़ती नाराजगी को कांग्रेस ने अवसर के तौर पर लिया. इन्‍हीं मुद्दों की मदद से कांग्रेस ने मतदाताओं के बीच अपनी जगह बनाना शुरू कर दी. कांग्रेस को अपनी इस कवायद के सकारात्‍मक नतीजे 2014 से 2018 के बीच हुए विधानसभा उपचुनावों में मिलना शुरू हो गए. उपचुनावों में कांग्रेस ने लगातार नासिराबाद, वैर और सूरजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की. 

कांग्रेस को सबसे बड़ी जीत अजमेर और अलवर के लोकसभा उपचुनावों में मिली. जनवरी 2018 में हुए इन उपचुनावों में कांग्रेस ने बीजेपी को करारी मात दी थी. 

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इन मुद्दों से कमजोर हुई बीजेपी 
बीजेपी बीते 5 वर्षों में मतदाताओं को अपने पक्ष में रखने में नाकाम रही. बीजेपी को अपनी इस नाकामी का खामियाजा 2018 की शुरूआत में हुए लोकसभा के उपचुनावों में भुगतना पड़ा. इन चुनावों में बीजेपी अमजेर और अलवर की लोकसभा सीट बचाने में नाकाम रही. लोकसभा के इन उनचुनावों में अजमेर और अलवर की एक भी विधानसभा सीट ऐसी नहीं थी, जहां से बीजेपी को जीत मिली हो. 

अजमेर और अलवर के लोकसभा उपचुनावों में मिली हार ने बीजेपी को न केवल मतदाताओं के बदले मिजाज का संकेत दिया था, बल्कि यह नसीहत भी दी थी कि समय रहते नहीं चेते तो आगामी विधानसभा चुनावों के परिणाम कांग्रेस के पक्ष में भी जा सकते हैं. लोकसभा उपचुनाव के बाद हुई समीक्षा में उन मुद्दों को चिंहित किया गया, जिनके चलते बीजेपी की पकड़ मतदाताओं में लगातार कमजोर होती गई. 

इन मुद्दों में कर्ज से डूबे किसानों की नाराजगी, महंगाई, बेरोजगारी, जीएसटी, गैंगेस्‍टर आनंदपाल का इनकाउंटर, पद्यमावत फिल्‍म विवाद शामिल हैं. 

ये मुद्दे बीजेपी की राह करेंगे मुश्किल
बीते छह महीनों के दौरान भले ही पद्यमावत फिल्‍म और गैंगेस्‍टर आनंदपाल के इनकाउंटर का मुद्दा शांत हो गया हो, लेकिन बेरोजगारी, मंहगाई, जीएसटी सहित कई अन्‍य मु्द्दे बीजेपी की राह मुश्किल करने के लिए राजस्‍थान में मौजूद हैं. वहीं, कर्ज से डूबे किसानों की नाराजगी अभी भी वसुंधरा राजे सरकार से बनी हुई है. कांग्रेस ने अजमेर मे पेयजल की समस्‍या को लेकर भी अब वसुंधरा राजे सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. 

इसी बीच, एससी-एसटी एक्‍ट में संशोधन बिल से सवर्णों की नाराजगी बीजेपी की मुश्‍किल बढ़ाने के लिए काफी है. उल्‍लेखनीय है कि बीते दिनों सवर्णों द्वारा बुलाए गए भारत बंद को अजमेर में सत-प्रतिशत सफल माना गया था. वहीं, बीजेपी ने शिक्षकों और पुलिस की भर्ती के जरिए बेरोजगारी की मुद्दे पर काबू पाने का प्रयास किया है, लेकिन बीते वर्षों में हुई चयन परीक्षा के बाद अब तक नौजवान को नियुक्ति पत्र नहीं मिला है. जिसके चलते बेरोजगारी के मुद्दे पर अभी भी नाराजगी बनी हुई है. 

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