चुनावी साल में ग्राम पंचायतों पर तालाबंदी, 9891 पंचायतों में काम ठप!

गांवबंद के इस आंदोलन में बीडीओ,ग्राम विकास अधिकारी और पंचायत प्रसार अधिकारी शामिल है, ऐसे में अब पंचायत में सरपंच के अलावा कोई भी काम पर नहीं.

चुनावी साल में ग्राम पंचायतों पर तालाबंदी, 9891 पंचायतों में काम ठप!
हडताल के बाद ऐलान के बाद आज सुबह से ही राजस्थान की सभी 295 पंचायत समितियों पर इसका असर देखा गया.

आशीष चौहान, जयपुरः चुनावी साल में अपनी मांगों को लेकर लगातार अधिकारी कर्मचारी संगठन सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में जुटे हुए है.इसी कडी में अब पंचायतीराज सेवा परिषद ने भी गांव बंद के ऐलान के साथ पंचायतों का कामकाज रोक दिया है,जिसके बाद राजस्थान की 9891 ग्राम पंचायतों पर ताले लटके पडे है.गांव में अनिशिचितकालीन आंदोलन के बाद राजस्थान और केंद्र सरकार से जुडी कई योजनाओं से विकास कार्य प्रभावित होंगे,जिसमें सबसे ज्याद प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना,स्वच्छ भारत मिशन, मुख्यमंत्री जलस्वावलंबन योजना और मनरेगा जैसी योजनाओं पर विपरित प्रभाव पडेगा.

गांवबंद के इस आंदोलन में बीडीओ,ग्राम विकास अधिकारी और पंचायत प्रसार अधिकारी शामिल है, ऐसे में अब पंचायत में सरपंच के अलावा कोई भी काम पर नहीं.इसलिए अब अनिश्चितकालीन हडताल के बाद गांव के विकास कार्यों पर संकट खडा हो सकता है.पंचायतीराज सेवा परिषद सरकार से हुए समझौते की मांगों पर अडा है,जिसमें पंचायत प्रसार अधिकारी का वेतन 4200  और सहायक सचिव का वेतन 4800 ग्रेड पे करने, अतिरिक्त भत्ता देने,राज्य अधिनस्थ सेवाओं में सम्मलित करने,ग्राम पंचायतों में सहायक कर्मचारी का पद सृजित करने की मांग है. 

हडताल के बाद ऐलान के बाद आज सुबह से ही राजस्थान की सभी 295 पंचायत समितियों पर इसका असर देखा गया.सभी पंचायतों पर ताले जडे दिखाई दिए और किसी का तरह कार्य पंचायतों में नहीं हुआ.इसके साथ ही सभी पंचायत समितियों में धरना प्रदर्शन जारी रहा.इससे पहले भी गांव अधिकारी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर जिलों में कलक्टर्स को ज्ञापन सौपा था.

परिषद के अध्यक्ष महावीर प्रसाद का कहना है कि सरकार ने पहले लिखित समझौता किया था,लेकिन अभी तक इन मांगों को नहीं माना गया.यदि हमारी मांगे नहीं मानी गई तो इसी तरीके से आंदोलन जारी रहेगा.आंदोलन से गांव के विकास कार्य पर विपरित प्रभाव पडेगा.इसलिए सरकार से हम मांग करते है कि जल्द से जल्द समझौते के अनुसार मांगों को पूरा किया जाए. 

ये पहली बार नहीं है जब राजस्थान की गांवों में कामकाज ठप हुआ हो,बल्कि इसी साल गांव कई बार चुनावी साल में सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन किया,पिछले साल गांधी जयंती पर भी गांधीवादी तरीके से स्वच्छता का संदेत देेते हुए आंदोलन किया था.अब गांव में इस आंदोलन के बाद देखना यह होगा कि सरकार वार्ता के लिए कब बुलाती है. 

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