राजस्थान: यहां लोग खेलते हैं 'खतरनाक' दिवाली, एक-दूसरे पर फोड़ते हैं पटाखे

केकड़ी शहर में इस परंपरा को सालों से दिवाली के अलगे दिन टोलियों में घूमने से लेकर अलग अलग महिलाओं पर पटाखे फेंकने तक ऐसे मनाया जा रहा है कि अब प्रशासन या पुलिस भी यहां के लोगों को काबू नहीं कर पा रही है

राजस्थान: यहां लोग खेलते हैं 'खतरनाक' दिवाली, एक-दूसरे पर फोड़ते हैं पटाखे

केकड़ी: राजस्थान के केकड़ी शहर में सालों से दिवाली के अगले दिन एक अजीब सी परंपरा को निभाया जा रहा है. यहां दिवाली के अगले दिन यानी गोवर्धन पर लोग बाजार में एक दूसरे पर पटाखे फेंकते हैं. यह तो आमूमन हर व्यक्ति जानता है कि पटाखों को सावधानी से जलाना चाहिए लेकिन केकड़ी में लोग एक दूसरे पर पटाखे फेंकते हैं और यह समाज की जड़ में इस कदर रम चूका है कि प्रशासन भी अब बेबस नडर आने लगा है. दिन के वक्त जब महिलाएं और बच्चे बाजार में किसी भी कार्य से निकलते हैं तो कुछ युवा उन पर पटाखें फेंकते हैं. 

दरअसल, केकड़ी शहर में इस परंपरा को सालों से दिवाली के अलगे दिन टोलियों में घूमने से लेकर अलग अलग महिलाओं पर पटाखे फेंकने तक ऐसे मनाया जा रहा है कि अब प्रशासन या पुलिस भी यहां के लोगों को काबू नहीं कर पा रही है. नोजवान टोलियो में या झुंड में पटाखो से हमला करते हैं. सबसे चोकाने वाली बात यह हैं कि पटाखो को आदमियों द्वारा महीलाओं पर फेका जाता है. युवा, पटाखो की जगह सुतली बम फेकते हैं. शाम होते होते तो बाजार में पटाखों के धुंए के गुबार से धुंध सी छा जाती है.     

इस परम्परा को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने लाख जतन कर लिए लेकिन हर बार नाकामी ही हाथ लगी. कई बार तो ऐसा मौका होता है की युवा, पुलिस तक को शिकार बना लेते हैं जिस कारण पुलिस को भी मैदान छोड़कर भागना पड़ता है. इस अंधी दौड़ में कई लोगों का झुलस जाना मोत होना या आगजनी की घटना होना आम बात है. ईस पटाखेबाजी से हर साल झुलसने से नोजवानो की मोत भी होती है और पटाखे से करीब दो से तीन दजर्न लोग झुलसते है. 

पिछले कुछ सालों में ऐसे लोगों पर मुकदमे भी किए गए लेकिन इसका इन लोगों पर कोई असर नहीं हुआ. अब भी इनकी कारगुजारियां बदस्तूर जारी हैं. असामाजिक तत्त्वों से निपटने के लिए जिला प्रशासन पुलिस लाईन से हर साल जाब्ता भेजता है. इसके अलावा भिनाय, सावर, सरवाड सहित आसपास के थानो का जाब्ता भी मगवाया जाता है. साथ ही आरएसी की एक टुकड़ी भी तेनात कि जाती है लेकिन पटाखा युद्ध थमने का नाम नहीं लेता जिससे बाजार सुनसान और वीरान नजर आते है.

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