स्वाइन फ्लू से गिरफ्त में कोटा, सरकारी आदेश के बाद भी नहीं आई जांच की मशीनें

चिकित्सा मंत्री के आदेश के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने अब तक स्वाइन फ्लू की जांच में काम आने वाली पीसीआर मशीन अब तक नहीं खरीदी है.

स्वाइन फ्लू से गिरफ्त में कोटा, सरकारी आदेश के बाद भी नहीं आई जांच की मशीनें
इस साल कोटा सम्भाग में स्वाइन फ्लू से अब तक 29 मौतें हो चुकी हैं

कोटा: प्रदेश के कोटा संभाग में स्वाइन फ्लू ने तांडव मचा रखा है लेकिन उसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग इस वायरस की रोकथाम को लेकर सक्रियता नहीं दिखा रहा है. लापरवाही का आलम यह है कि चिकित्सा मंत्री के आदेश के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने अब तक स्वाइन फ्लू की जांच में काम आने वाली पीसीआर मशीन अब तक नहीं खरीदी है.

गौरतलब है कि कोटा सम्भाग में इन दिनों मौसमी बीमारियों ने आंतक फैला रखा है. डेंगु चिकनगुनियां को साथ स्वाइन फ्लू से पूरा शहर बेहाल है. हालत यह है कि स्वाइन फ्लू वायरस रोज मरीजों की जान ले रहा है. कल भी दो महिला मरीजो की इस वायरस के चपेट में आने से मौत हो गई. सितम्बर व अक्टूबर के शुरुआती दिनों में स्वाइन फ्लू करीब दो दर्जन मरीजो की जान ले चुका है.

उसके बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं कर पा रहा है. खबरों की मानें तो चिकित्सा मंत्री कालीचरण सर्राफ ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को 40 लाख की नई स्वाइन फ्लू जांच (पीसीआर) मशीन खरीदने के आदेश दिए थे. लेकिन जिम्मेदार आला अधिकारियों ने रूचि नहीं दिखाई. जिसके चलते एक साल बाद भी नई पीसीआर मशीन की खरीद नहीं हो पाई है. मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ गिरीश वर्मा का कहना है कि नई मशीन नहीं आने तक सैंपल जांच की वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी है. ज्यादा सेम्पल आने पर जयपुर भेजे जाते है. 

मेडिकल कॉलेज के पास वर्तमान में जो मशीन है वह करीब 6-7 साल पुरानी है. इसकी क्षमता एक बार में 12 सेम्पल जाचने की है. मशीन में दिनभर में दो बार ही राउंड लग सकते हैं लेकिन मरीजों की संख्या अधिक के कारण मजबूरन 3 से 4 बार तक राउंड लगा रहे हैं. संभाग मुख्यालय पर हाड़ौती के अलावा टोंक, सवाईमाधोपुर, मध्यप्रदेश तक से मरीज आते हैं. अधिक मात्रा में मरीज आने से एक दिन में जांच नहीं हो पाती है. कुछ दिन पहले मशीन में खराबी आई थी तो विभाग ने  झालावाड़ मेडिकल कॉलेज लैब में सैंपल भेजना शुरू किया था. लेकिन अब झालावाड़ ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं.

अब अगर भविष्य में यदि कोई दिक्कत आती है तो मरीजों के सैंपल जयपुर एसएमएस अस्पताल में जांच के लिए भेजे जाएंगे. आपको बता दें इस साल कोटा सम्भाग में स्वाइन फ्लू से अब तक  29 मौतें हो चुकी हैं. जबकि स्वाइन फ्लू पॉजीटिव का आंकड़ा 270 के पार हो गया है. स्वाइन फ्लू को लेकर लोगो मे दहशत का माहौल है यही कारण है कि अब तक करीब 1200 लोग स्वाइन फ्लू की जांच करवा चुके है. मेडिकल कॉलेज प्राचार्य भी मानते है कि स्थिति भयावक है. प्राचार्य ,मरीजो व तीमारदारों को हाथ नहीं मिलाने व सावधानी बरतने की सलाह देकर इति श्री कर रहे है.

मशीन को आरएमआरएस से एमबीएस अस्पताल को खरीदना था, लेकिन अस्पताल के पास बजट नहीं होने के कारण नए अस्पताल को इसकी जिम्मेदारी दे दी गई. किंतु वहां भी अधिकारियों की सुस्ती के चलते मशीन नहीं खरीदी गई. पिछले दिनों नए अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए टेण्डर जारी किए थे, लेकिन उसमें एकल निविदा आने व शर्तों की पालना नहीं होने के बाद टेण्डर निरस्त करने पड़े. 

अब स्थिति ये है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन के पास वर्तमान में एक ही स्वाइन फ्लू जांच मशीन है ऐसे मे अगर वह मशीन भी खराब हो जाती है तो प्रशासन के पास स्वाइन फ्लू जांच के लिए अन्य कोई विकल्प नहीं है. जबकि सम्भाग मुख्यालय होने के चलते यहां एक अतिरिक्त पीसीआर मशीन होना जरूरी है. लेकिन स्वाइन फ्लू के प्रकोप के बाद भी प्रसाशन को इसकी कोई फिक्र नहीं है. 

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