टोंक: एसीबी की टीम ने की कार्रवाई, रिश्वत लेते रंगे हाथ एएसआई को किया गिरफ्तार

मामला बरोनी पुलिस थाने में 4 अक्टूबर को एक परिवादी किसान की शिकायत से जुड़ा है. जिसमें किसान ने थाने में गांव के ही एक दूसरे व्यक्ति पर जबरन जमीन पर कब्जा करने की शिकायत की थी. 

टोंक: एसीबी की टीम ने की कार्रवाई, रिश्वत लेते रंगे हाथ एएसआई को किया गिरफ्तार
जिसके बाद एएसआई मुंशीराम जाट ने परिवादी से 2 हजार रूपए की मांग की.

पुरूषोत्तम/टोंक: प्रदेश के टोंक जिलें में भ्रष्टाचार की जड़ मजबूत होती जा रही है. राजस्व कार्मिकों से लेकर खाकी वर्दी वाले अधिकारी तक आए दिन भ्रष्टाचार के मामलों में पकडे जाते है. इसी कड़ी में एक बार फिर से एक ही सप्ताह में टोंक एसीबी टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए बरोना पुलिस थाने में कार्यरत एएसआई मुंशीराम जाट को रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया. इससे पहले 4 अक्टूबर को निवाई एसडीएम के ड्राइवर किशनलाल खंगार को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था.

दरअसल पूरा मामला बरोनी पुलिस थाने में 4 अक्टूबर को एक परिवादी किसान की शिकायत से जुड़ा है. जिसमें किसान ने थाने में गांव के ही एक दूसरे व्यक्ति पर जबरन जमीन पर कब्जा करने की शिकायत की थी. जिसके बाद एएसआई मुंशीराम जाट ने मामले की जांच शुरू की. खबर के मुताबिक जाट ने परिवादी की शिकायत पर कार्रवाई करने से पहले ही आरोपी व्यक्ति से मोटी रकम लेकर परिवादी को जबरन हवालात में डाल दिया.

जिसके बाद एएसआई मुंशीराम जाट ने परिवादी से 2 हजार रूपए की मांग की. जिसके बाद करीब दो घंटे बाद एएसआई ने परिवादी को हवालात से छोड़ा और तय वादे के अनुसार परिवादी एक हजार रूपए लेकर पुलिस थाने पहुंच गया. जैसे ही परिवादी ने एएसआई को रकम सौंपी तो पहले से जाल बिछाए बैठी टोंक एसीबी टीम ने रंगे हाथ दबोच लिया.

एसीबी एएसपी विजय सिंह ने बताया कि एएसआई मुंशीराम जाट ने परिवादी से जबरन राशि की मांग की तो परिवादी ने एसीबी कार्यालय टोंक पहुंच शिकायत दी. शिकायत का सत्यापन में ही एएसआई मुंशीराम जाट रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है. अब आरोपी एएसआई मुंशीराम जाट को एसीबी कोर्ट अजमेर में पेश किया जाएगा.

हैरत की बात तो यह है कि किसान के साथ हुए दुर्व्यवहार को बरौनी पुलिस ने चार दिन तक दबाए रखा. अब भी थानाधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है. वहीं सबसे बड़ा सवाल पुलिस अधीक्षक योगेश दाधीच की कार्यशैली को लेकर भी उठ रहा है. क्योंकि जब से एसपी योगेश दाधीच ने टोंक जिले की कमान सम्भाली है तब से लेकर अब तक आधा दर्जन पुलिस कर्मी रिश्वत लेते रंगे हाथ धरे जा चुके है. 

लेकिन ना तो किसी थानाधिकारी के खिलाफ एसपी दाधीच ने कोई एक्शन लिया और ना ही सर्किल इंचार्ज के खिलाफ. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि कही थानों में दर्ज परिवादों और परिवादियों से मोटी वसूली तो नहीं की जा रही है. फिलहाल उम्मीद तो यहीं है कि सूबे के पुलिस मुखिया डीजीपी सख्त एक्शन लेंगे.

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