राजस्थान विधानसभा के पहले सत्र पर गहराया संकट, नाराज बैठे हैं विधानसभा अध्यक्ष

15 जनवरी को प्रस्तावित शपथ-ग्रहण के लिए विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने विधानसभा सचिव को नोटिस जारी करने के निर्देश अब तक नहीं दिए हैं. 

राजस्थान विधानसभा के पहले सत्र पर गहराया संकट, नाराज बैठे हैं विधानसभा अध्यक्ष
विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने संवैधानिक नियमों का हवाला देते हुए सत्र में विलंब होने की बात कही है. (फाइल फोटो)

शशि मोहन, जयपुर: राजस्थान में नई विधानसभा के पहले सत्र की तारीख को लेकर विवाद के बाद अजीबोगरीब स्थितियां बन गई हैं. प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद 12 दिसंबर 2018 को नई विधानसभा का गठन हो चुका है. इधर गहलोत सरकार ने भी 15 वीं विधानसभा का पहला सत्र 15 जनवरी को बुलाने का ऐलान कर दिया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल की आपत्ति के बाद नई विधानसभा के पहले सत्र की शुरुआत से पहले ही विवाद खड़ा हो गया है. 

दरअसल विधान सभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा है कि इतनी शॉर्ट नोटिस पर विधानसभा सत्र बुलाना सही नहीं है. इसके साथ ही लोकसभा के नियम-परंपराओं का हवाला देते हुए स्पीकर ने उनसे राय-मशविरा नहीं किए जाने को लेकर भी नाराजगी जताई है. पूरा मामला अब राजभवन पहुंच चुका है. ऐसे में इस बात को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है कि अब 15 जनवरी से नई विधानसभा का पहला सत्र शुरू हो भी सकेगा या नहीं?

आपको बता दें कि, नई विधानसभा के पहले सत्र में चुने गए विधायकों को शपथ दिलाई जानी है, लेकिन सत्र से पहले ही विधान सभा बुलाने की तारीख को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. राज्य की नई सरकार 15 जनवरी को सत्र बुलाकर विधायकों का शपथ करवाना चाहती है. जिसके लिए राजभवन से वारंट भी जारी हो चुका है, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने विधानसभा सचिव को नोटिस जारी करने के निर्देश अब तक नहीं दिए हैं. 

विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल खुद की अवहेलना से हैं नाराज

विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल का तर्क है की लोकसभा की परंपराओं को राज्यों में भी माना जाता है और लोकसभा में परिपाटी यही रही है कि सत्र बुलाने से पहले सदन के नेता या सरकार का प्रतिनिधि स्पीकर से बात करता है. उसके बाद ही सत्र की तारीख तय होती है. स्पीकर कैलाश मेघवाल खुद की अवहेलना से नाराज हैं. नियमों का हवाला देते हुए वे कहते हैं कि कम से कम 21 दिन का नोटिस तो सत्र से पहले विधायकों को दिया ही जाना चाहिए।

क्या है विधानसभा में सत्र बुलाने का नियम?

विधानसभा की इन नियमों में साफ तौर पर 21 दिन के नोटिस का प्रावधान है. पहले 14 दिन के नोटिस का प्रावधान हुआ करता था, लेकिन 14 दिन की अवधि कम लगी तो बाद में इसे बढ़ाकर 21 दिन किया गया. संविधान के अनुच्छेद 208(1) के अनुसरण में राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम विरचित किए गए हैं. प्रक्रिया नियमावली के नियम - 3(2) में 21 दिन के नोटिस का जिक्र किया गया है. 

क्या शॉर्ट नोटिस पर बुलाया जा सकता है विधानसभा सत्र?

स्पीकर खुद यह मानते हैं कि शॉर्ट नोटिस पर भी विधानसभा का सत्र बुलाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए ऐसी विशेष परिस्थितियों का ज़िक्र किया जाना जरूरी होता है. उनका कहना है कि पिछले 5 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने भी शार्ट नोटिस पर विधानसभा का सत्र आहूत किया है. जरूरी संविधान संशोधन को विधानसभा से अनुमोदित कराने के लिए यह सत्र बुलाया गया था और इन विशेष परिस्थितियों का ज़िक्र सत्र आहूत करने के शार्ट टर्म नोटिस में भी किया गया था. इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष यह भी कहते हैं कि अभी भी शार्ट टर्म नोटिस पर सरकार विधानसभा का सत्र बुला सकती है, लेकिन उसके लिए उत्पन्न हुई विशेष परिस्थितियों का जिक्र तो सरकार को करना ही होगा. 

राजभवन पहुंचा पूरा मामला, विधानसभा अध्यक्ष बोले - सरकार ने की गलती, वहीं करे भूल सुधार

स्पीकर कैलाश मेघवाल कहते हैं कि राजभवन से जारी वारंट 8 जनवरी की शाम 7 बजे विधानसभा पहुंचा. इसके बाद स्पीकर की तरफ से विधानसभा सचिव को सत्र बुलाने के लिए नोटिस जारी करने के निर्देश देने थे. मेघवाल कहते हैं कि इस बारे में सरकार के किसी प्रतिनिधि ने उनसे ना तो बातचीत की और न ही तारीख को लेकर कोई जानकारी दी, लिहाजा उन्होनें विधानसभा सचिव को नोटिस जारी करने के निर्देश नहीं दिये. विधानसभा अध्यक्ष ने इस सिलसिले में बुधवार को राज्यपाल कल्याण सिंह से मुलाकात भी की और उन्हें 3 पन्नों का अपना ज्ञापन भी सौंप दिया. स्पीकर की तरफ से राज्यपाल को जारी नियम-प्रक्रिया के बारे में भी बताया गया.

इसके साथ ही स्पीकर कैलाश मेघवाल ने 10 से 12 जनवरी तक अपने दिल्ली प्रवास का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया है. स्पीकर ने राज्यपाल को इस बात की सूचना दी है कि विधानसभा सत्र को लेकर उपजे घटनाक्रम के चलते दिल्ली दौरा निरस्त करके वह जयपुर में ही रहेंगे ताकि किसी भी समय उनसे चर्चा हो सके.