जयपुर में 'जीका' वायरस के दो केस मिले पॉजिटिव, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

मामला सामने आते ही इस सम्बन्ध में एक टीम का गठन कर दिया गया है, जो घरों में जाकर सर्वे करेगी.

 जयपुर में 'जीका' वायरस के दो केस मिले पॉजिटिव, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप
जीका वायरस का प्रकोप 2015 में ब्राजील से शुरू हुआ और 24 अमेरिकी देशों में फैल चुका है.

जयपुर: प्रदेश में स्वाइन फ्लू, डेंगू, मलेरिया, स्क्रबटाइटस के बाद अब 'जीका' वायरस की दस्तक से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. बदलते मौसम और बीमारियों से लोग उबर ही रहे थे कि राजस्थान में चिकित्सीय विभाग की जांच के बाद जीका वायरस के मामलों और स्क्रब टायफस से हो रही मौतों से प्रदेश में भय का माहौल पैदा हो गया है.

हाल ही में एक लैब में दिए गए टेस्ट सैंपल की रिपोर्ट मे दो व्यक्ति के 'जीका' वायरस से ग्रसित होने की पुष्टि हुई है. स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ये पता लगाने में लगा हुआ है कि जीका वायरस कहां से प्रदेश में आया और कितने लोग इससे पीड़ित हैं. हालांकि, मामला सामने आते ही इस सम्बन्ध में एक टीम का गठन कर दिया गया है, जो घरों में जाकर सर्वे करेगी.

साथ ही केंद्र से आई टीम ने भी राज्य का दौरा किया और जिला स्तरीय अधिकारियों को सजग कर दिया है. प्रदेश की सेहत संभालने वाले विभाग की सेहत जीका वायरस ने बिगड़ दी है. अब इसे विभाग की लापरवाही कहे या फील्ड अधिकारियों की अनदेखी, जिसके चलते इस साल की शुरूआत में स्वाइन फ्लू मौत बनकर उभरा. एक विधायक की मौत के बाद हरकत में आए सिस्टम ने जब घर-घर दस्तक दी तब जाकर हालात पर काबू पाया जा सका. 

लेकिन अब स्वाइन फ्लू के साथ-साथ प्रदेश में 'जीका' वायरस की दस्तक ने सबकी चिंता बढ़ा दी है. हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अफसर 'जीका' के बचाव को लेकर तो बड़ी बड़ी बातें कर रहे है, लेकिन अब तक राजधानी में कितने केस आए, इसको लेकर कोई भी बोलने को तैयार नहीं है. निदेशक से लेकर सीएमएचओ तक सब अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदार डालकर बचने का प्रयास कर रहे है.

खबरों की मानें तो प्रदेश में 'जीका' वायरस के दस्तक के बाद विभाग नें 10852 घरों में स्क्रीनिंग करवाई है. इस दौरान 57 केस बुखार के, 90 गर्भवती महिलाओं, 33 उन लोगों के सैम्पल लिए गए है जो पॉजिटिव मरीजों के सम्पर्क में आए. विभाग का दावा है कि शास्त्री नगर के आसपास के तीन किलोमीटर के एरिया को सर्विलांस पर लिया गया है. 

वहीं एसएमएस की जांच में अब तक 'जीका' वायरस के आठ मरीज पॉजिटिव मिले है, लेकिन विभाग पूना की रिपोर्ट के आधार पर दो ही पॉजिटिव बता रहा हैं. वहीं  अधिकारियों की मानें तो शेष 6 मरीज भी पॉजिटिव है, लेकिन कोई भी इसकी पुष्टि करने को तैयार नहीं है. चिंता की बात ये है कि जिन आठ मरीजों में पॉजिटिव की बात बताई जा रही है, उनमें से तीन गर्भवती महिलाएं है.

जीका वायरस आने के बाद नगर निगम पूरी तरह अलर्ट हो गया है. स्वास्थ्य विभाग की तरफ नगर निगम को शास्त्री नगर में फोगिंग और मच्छरों को खत्म करने के आदेश दिए गए हैं लेकिन शहर के अन्य जिलों में फोगिंग के लिए टीम अभी तक नहीं पहुंची है.  

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक जहां ऐडीज मच्छरों के वाहक पाए जाते हैं जो डेंगू और चिकुनगुनिया को भी जन्म देते हैं. ऐडीज ऐगिपटाए मच्छर जिका विषाणु को जन्म देते हैं जो डेंगू और चिकुनगुनिया भी फैलाता है. दोनों ही बीमारियां भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देशों के लिए बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याएं हैं. जीका वायरस का प्रकोप 2015 में ब्राजील से शुरू हुआ और 24 अमेरिकी देशों में फैल चुका है.

बता दें कि जीका वायरस जन्म दोष और माइक्रोसेफली जैसी मस्तिष्क संबंधी विकारों के लिए जिम्मेदार है. माइक्रोसेफली के कारण बच्चे असामान्य रूप से छोटे सिर के साथ पैदा होते हैं. इसी बीच डब्ल्यूएचओ प्रमुख मार्गरेट चान ने कहा कि जन्म दोष में तेजी से बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार कहा जा रहा 'जीका' वायरस भयावह ढंग से फैल रहा है. मार्गरेट ने कहा कि जीका अब भयावह ढंग से फैल रहा है. अलार्म का स्तर बहुत अधिक है.

बता दें कि हाल ही में पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान ने जयपुर की एक बुजुर्ग महिला के जीका वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि की थी. जिसके बाद प्रदेश की राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह चिकित्सालय के प्राचार्य डॉ. यू एस अग्रवाल ने बताया था कि एक बुजुर्ग महिला को जोडों में दर्द, आखें लाल होने और कमजोरी के कारण 11 सितम्बर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जिसके बाद डॉक्टरों की टीम ने बुजुर्ग महिला की प्रारंभिक जांच की. जिसके बाद डेंगू, स्वाइन फ्लू अन्य जांच सामान्य मिले. लेकिन फिर भी डॉक्टरों ने एहतियात के तौर पर नमूने को पुणे की प्रयोगशाला में जांच के लिये भेज दिया था. पुणे में जांच में महिला में जीका वायरस की पुष्टि हुई है.

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