मजबूत आईटी सुरक्षा प्रणाली के अभाव में बढ़ रहे हैं साइबर हमले: रिपोर्ट

देश के अधिकतर संगठनों में मजबूत आईटी सुरक्षा तंत्र नहीं होने के कारण हीं साइबर हमले बढ़े हैं. 

मजबूत आईटी सुरक्षा प्रणाली के अभाव में बढ़ रहे हैं साइबर हमले: रिपोर्ट
65 प्रतिशत संगठनों में नेटवर्क सुरक्षा के प्रबंधन के लिए अलग विभाग भी नहीं है.(फाइल फोटो)
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नई दिल्ली: देश के अधिकतर संगठनों में मजबूत आईटी सुरक्षा तंत्र नहीं होने के कारण हीं साइबर हमले बढ़े हैं. यहां तक कि 65 प्रतिशत संगठनों में नेटवर्क सुरक्षा के प्रबंधन के लिए अलग विभाग भी नहीं है. नेटरिका कंसल्टेंसी के एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि 25 कर्मियों से अधिक संख्याबल वाले केवल 18 फीसदी संगठनों के पास सूचना और प्रौद्योगिकी के लिए समर्पित कर्मी हैं. वहीं 21 फीसदी कंपनियों के पास इस कार्य के लिए समर्पित कर्मी नहीं हैं. सर्वेक्षण में कहा गया है कि 18 फीसदी संगठनों में आईटी दल में केवल एक से तीन कर्मी ही हैं. उसके मुताबिक सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 65 फीसदी संगठनों में नेटवर्क की सुरक्षा के प्रबंधन के लिए समर्पित विभाग तक नहीं है.

32 फीसदी कंपनियों पर नहीं हुए साइबर हमले
ये आंकड़े चिंताजनक हैं, क्योंकि पिछले 12 माह में 62 फीसदी भागीदार संगठन किसी ना किसी रूप में साइबर हमले झेल चुके हैं. हालांकि, 32 फीसदी कंपनियों ने कहा है कि इसी अवधि में उन्हें वायरस हमले, मालवेयर, फिशिंग हमले, रैंसमवेयर जैसे किसी भी तरह के साइबर हमले का सामना नहीं करना पड़ा. अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी सिमेंटेक के इंटरनेट सुरक्षा जोखिम रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के बाद भारत साइबर हमले से सर्वाधिक प्रभावित देश है.

रैनसमवेयर के हमले में भारत शीर्ष सात देशों में शामिल
आपको बता दें कि भारत उन शीर्ष सात देशों में शामिल है, जहां रैनसमवेयर परिसंचरण का खतरा सबसे ज्यादा है. बीते साल दुनिया भर में विंडोज, एंड्रॉयड, लिनक्स और मैकओएस सिस्टम पर साइबर हमलों में तेजी आई थी. वैश्विक नेटवर्क और एंड प्वाइंट सिक्यूरिटी के क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सोफोस की 'सोफोसलैब्स 2018 मालवेयर फोरकास्ट' के मुताबिक दो तरह के एंड्रॉयड हमले का खतरा बढ़ रहा है- बिना एनक्रिप्टिंग डेटा के फोन लॉक करना और डेटा के एनक्रिप्टिंग के दौरान फोन को लॉक करना.

रैनसमवेयर ज्यादातर विंडोज कंप्यूटर को बनाता है निशाना
सोफोसलैब्स के सुरक्षा शोधार्थी डोरका पालोटे ने शनिवार (4 नवंबर, 2017) को एक बयान में कहा था, "रैनसमवेयर ज्यादातर विंडोज कंप्यूटर को निशाना बनाता है, लेकिन साल 2017 सोफोसलैब्स ने दुनियाभर के हमारे ग्राहकों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले अलग-अलग डिवाइसों और ऑपरेटिंग सिस्टम्स पर इनके हमले में बढ़ोतरी को देखा है." वन्नाक्रिप्ट साल 2017 के मई में सामने आया था, जो दुनिया का सबसे बड़ा रैनसमवेयर था. इससे पहले साल 2016 की शुरुआत में सेरवेर नाम रैनसमवेयर आया जो उस समय का सबसे बड़ा रैनसमवेयर था, जिसे वन्नाक्रिप्ट ने पीछे छोड़ दिया.

(इनपुट भाषा से)

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