अब इन हजारों परिवारों को मिल रही सहायता रोकेगी केंद्र सरकार, वापस लौटने की अपील की

राज्य के गृह विभाग, पुलिस और केंद्र के बीच सोमवार को एजल में एक बैठक हुई, जिसमें नागरिक समाज और राहत शिविरों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

अब इन हजारों परिवारों को मिल रही सहायता रोकेगी केंद्र सरकार, वापस लौटने की अपील की
(फाइल फोटो)

एजल : केंद्र ने त्रिपुरा के राहत शिविरों में रह रहे ब्रू परिवारों से वापस मिजोरम लौटने की अपील की है, क्योंकि उन्हें दी जा रही सहायता एक अक्तूबर से बंद कर दी जाएगी. राज्य के गृह विभाग, पुलिस और केंद्र के बीच सोमवार को एजल में एक बैठक हुई, जिसमें नागरिक समाज और राहत शिविरों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वोत्तर) सत्येंद्र गर्ग ने कहा कि ब्रू नेता राहत शिविरों में उन लोगों की पहचान करेंगे जो वापस जाना चाहते हैं और उनके नाम केंद्र तथा मिजोरम सरकार को सौंपेंगे.

त्रिपुरा के राहत शिविरों में रह रहे ब्रू विस्थापितों को फिलहाल निशुल्क राशन और केंद्र से प्रति व्यक्ति पांच रुपये प्रतिदिन गुजारा भत्ता मिलता है. अधिकारियों ने बताया कि यह बैठक 25 अगस्त से 25 सितंबर के बीच ब्रू विस्थापितों की घर वापसी की चल रही प्रक्रिया पर उदासीन प्रतिक्रिया की पृष्ठभूमि में हुई थी. इस प्रक्रिया के तहत अबतक सिर्फ तीन परिवार ही मिजोराम लौटे हैं.

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हजारों ब्रू परिवार 1997 के अंत से त्रिपुरा के राहत शिविरों में रह रहे हैं. दरअसल, 21 अक्तूबर को 1997 को दम्पा बाग अभयारण्य में ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट के आतंकवादियों ने एक वन गार्ड की हत्या कर दी थी, जिसके बाद सांप्रदायिक तनाव व्याप्त हो गया था.

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उल्‍लेखनीय है कि मिजो ब्रू जनजाति को बाहरी मानते थे. 1995 में यंग मिजो एसोसिएशन और मिजो स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने ब्रू जनजाति को बाहरी घोषित कर दिया था. ब्रू लोगों को निशाना बनाया जाने लगा. इसके बाद ब्रू उग्रवादियों ने ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट और ब्रू नेशनल यूनियन पार्टी भी बनाई गई. अक्टूबर 1997 को ब्रू उग्रवादियों ने यहां के एक वन अधिकारी की हत्या कर दी. इससे दोनों समुदायों में हिंसा बढ़ गई. ब्रू समुदाय के लोगों के घरों को जलाया जाने लगा. जान बचाने के लिए इन लोगों ने मिजोरम से पलायन शुरू कर दिया. ब्रू समुदाय के हजारों लोग उत्तरी त्रिपुरा के कंचनपुर और पानी सागर में बने राहत शिविरों में रह रहे हैं.

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