JDU प्रवक्ता ने पत्र लिखकर फिर कसा तेजस्वी पर तंज, जानिए क्या लिखा

बिहार के अररिया लोकसभा, कैमूर और जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र के लिए उपचुनाव की घोषणा होते ही राज्य में सियासत तेज हो गई हैं. इसी क्रम में आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा और तेजस्वी यादव की न्याय यात्रा को लेकर राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं.

JDU प्रवक्ता ने पत्र लिखकर फिर कसा तेजस्वी पर तंज, जानिए क्या लिखा
नीरज कुमार ने लिखा तेजस्वी यादव को पत्र.(फाइल फोटो)

पटना: बिहार में उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. खासकर जदयू और आरजेडी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चरम पर पहुंच गया है. प्रवक्ताओं के बीच हमलों के साथ दोनों पार्टियां सोशल मीडिया पर भी एक दूसरे पर तंज कस रहे हैं. इस बार उपचुनाव में अररिया लोकसभा सीट और कैमूर व जहानाबाद सीट पर वोटिंग होनी है. उपचुनाव के बीच आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा और तेजस्वी यादव की न्याय यात्रा पर निकलने की घटना के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं.

नीरज कुमार ने लिखा तेजस्वी यादव को पत्र
इस बार जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने पत्र के माध्यम से आज चौथे दिन भी हमला जारी रखा और लिखा खुला पत्र. जिसमें उन्होंने लिखा है कि ''हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, विकास के मुद्दे पर राजनीति होनी चाहिए.'' साथ ही प्रवक्ता नीरज कुमार ने राबड़ी देवी के शासन काल में हुई अररिया की आपराधिक घटनाओं' शिक्षा की बदहाली और सड़क की दुर्दशा को लेकर भी सवाल उठाएं हैं.

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नीरज कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के नाम भी लिखा था पत्र
इससे पूर्व जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के नाम भी पत्र लिखा था. नीरज कुमार ने अपने लिखे पत्र में कहा था कि 'माननीय पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी जी, सबसे पहले आपको अपनी पार्टी आरजेडी के उपाध्यक्ष बनने पर बधाई. आपके पुत्र और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद जी अपनी कथित संविधान बचाओ न्याय यात्रा पर जा रहे हैं.

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परंतु, यहां भी उनकी उच्च शिक्षा नहीं ग्रहण करना, आड़े आ गई. नीरज कुमार ने आगे लिखा था कि आपके पुत्र ने अपनी यात्रा का नामकरण भी माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी की न्याय यात्रा के नाम की नकल से किया है. खैर, तेजस्वी जी की मजबूरी है. नीरज ने आगे एक और चौपाई लिखते हुए कहा है कि करम है मूल जगत में, चंचल मन है अंधकार, ऊंच नाच के भरम में, जाये गिरे बीच मंझधार. नीरज कुमार ने लिखा है कि वे नेता बनने के भ्रम में मंझधार में फंस गये हैं.  उनका कर्म उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है.

 

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