असम: बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव देने के लिए NRC कोऑर्डिनेटर की आलोचना की

असम में सत्तारूढ़ दल भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव देने के लिए राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला की तीखी आलोचना की है. 

असम: बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव देने के लिए NRC कोऑर्डिनेटर की आलोचना की
मुख्यमंत्री सर्वाणंद सोनोवाल ने भी पुष्टि की कि वह जब मुद्दे को लेकर हजेला से मिले तो उनसे भी विचार विमर्श नहीं किया गया.(फाइल फोटो)

गुवाहाटी: असम में सत्तारूढ़ दल भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव देने के लिए राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला की तीखी आलोचना की है. हजेला ने सुझाव दिया था कि राज्य के नागरिकों की सूची में दावा करने के लिये दावेदार सूची ‘ए’ में प्रदत्त कुल 15 दस्तावेजों की सूची से 10 में से किसी भी एक दस्तावेज को आधार बना सकते हैं.

पांच सितंबर को हाईाकेर्ट ने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के लिये दावे और आपत्तियां स्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू करने की तारीख को अगले आदेश तक के लिये टाल दिया था और आदेश दिया था कि दावेदार विरासत साबित करने के लिये प्रयुक्त 15 दस्तावेजों में से दस में से किसी भी एक दस्तावेज का इस्तेमाल कर सकते हैं.

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन की पीठ ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी समन्वयक प्रतीक हजेला की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद यह आदेश दिया था.  इस रिपोर्ट में हजेला ने सुझाव दिया था कि राज्य के नागरिकों की सूची में दावा करने के लिये दावेदार सूची ‘ए’ में प्रदत्त कुल 15 दस्तावेजों की सूची से 10 में से किसी भी एक दस्तावेज को आधार बना सकते हैं. 

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पीठ समन्वयक के इस सुझाव से सहमत थी. पीठ ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी के मसौदे में शामिल नहीं किये गये लोगों के दावे स्वीकार करने के तरीके के बारे में समन्वयक की रिपोर्ट की प्रति केन्द्र के साथ साझा करने में यह कहते हुये असहमति व्यक्त की कि यद्यपि सरकार की ‘‘बहुत अधिक दिलचस्पी’’ है परंतु न्यायालय को ‘‘संतुलन कायम करना’’ है.

शीर्ष न्यायालय ने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी के लिये दावे और आपत्तियां स्वीकार करने की प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित कर दी.  न्यायालय ने केंद्र और दूसरे हितधारकों से मामले को लेकर जवाब भी मांगे. भाजपा की असम इकाई के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हजेला के सुझाव असम समझौता, 1985 के तहत लिए गए फैसलों को अप्रभावी करते हैं.

उन्होंने ने कहा, ‘‘हम प्रतीक हजेला से पूछना चाहते हैं कि उन्हें दावे एवं आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान पहचान साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेजों की संख्या कम करने के लिए इस तरह का सुझाव देने का अधिकार किसने दिया है. ’’ दास ने हजेला पर शीर्ष न्यायालय में चल रहे एनआरसी मामले में पक्षकार समूहों से विचार विमर्श ना करने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘हजेला ने राज्य सरकार तक से संपर्क नहीं किया.

 मुख्यमंत्री सर्वाणंद सोनोवाल ने भी पुष्टि की कि वह जब मुद्दे को लेकर हजेला से मिले तो उनसे भी विचार विमर्श नहीं किया गया. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर इन दस्तावेजों को एनआरसी में शामिल करने के लिए (2015 में) आवेदन स्तर पर मंजूरी दी गयी थी तो उन्हें अब नामंजूर कैसे किया जा सकता है? यह किसी खेल के खत्म होने से 15 मिनट पहले उसके नियम बदलने जैसा है. ’’ 

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