भारत की यात्रा पर पहुंचे तुर्की राष्ट्रपति इर्दोगान, मोदी से करेंगे बातचीत

तुर्की के राष्ट्रपति रज्जब तैयब इर्दोगान रविवार को यहां पहुंचे और सोमवार को वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भारत के एनएसजी सदस्यता प्राप्त करने की कोशिश और आतंकवाद-निरोध एवं व्यापार के क्षेत्र में सहयोग को मजबूती देने के विकल्पों समेत प्रमुख द्विपक्षीय और क्षेत्रीय हितों के व्यापक मुद्दों पर बातचीत करेंगे. इस महीने की 16 तारीख को विवादित जनमत संग्रह के बाद इर्दोगान का यह पहला विदेश दौरा है. इस जनमत संग्रह से उनकी कार्यकारी शक्तियों में इजाफा हुआ है. तुर्की के राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी एमीन इर्दोगान, मंत्रिमंडल के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और 150 सदस्यों का एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जो भारत-तुर्की व्यापारिक फोरम की एक बैठक में हिस्सा लेगा.

भारत की यात्रा पर पहुंचे तुर्की राष्ट्रपति इर्दोगान, मोदी से करेंगे बातचीत

नई दिल्ली: तुर्की के राष्ट्रपति रज्जब तैयब इर्दोगान रविवार को यहां पहुंचे और सोमवार को वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भारत के एनएसजी सदस्यता प्राप्त करने की कोशिश और आतंकवाद-निरोध एवं व्यापार के क्षेत्र में सहयोग को मजबूती देने के विकल्पों समेत प्रमुख द्विपक्षीय और क्षेत्रीय हितों के व्यापक मुद्दों पर बातचीत करेंगे. इस महीने की 16 तारीख को विवादित जनमत संग्रह के बाद इर्दोगान का यह पहला विदेश दौरा है. इस जनमत संग्रह से उनकी कार्यकारी शक्तियों में इजाफा हुआ है. तुर्की के राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी एमीन इर्दोगान, मंत्रिमंडल के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और 150 सदस्यों का एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जो भारत-तुर्की व्यापारिक फोरम की एक बैठक में हिस्सा लेगा.

इर्दोगान की यात्रा से पहले भारत ने तुर्की और पाकिस्तान के बीच नजदीकी के साथ ही जम्मू कश्मीर पर अंकारा के बयानों को तवज्जों नहीं देने का प्रयास किया और कहा कि सरकार इससे अवगत है कि तुर्की का पाकिस्तान के साथ बहुत नजदीकी संबंध है और यह उनका द्विपक्षीय मामला है. विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) रूचि घनश्याम ने कहा, हमने हमेशा ही इस बात पर जोर दिया है कि भारत-तुर्की संबंध अपने बल पर कायम है और हमारा मानना है कि तुर्की पक्ष हमारी भावनाओं को साझा करता है. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर पर भारत का यह रूख बहुत अच्छी तरह से ज्ञात है कि यह देश का अभिन्न हिस्सा है.

यद्यपि यह पूछे जाने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया कि क्या भारत यह मुद्दा उठाएगा. ऐसे में कि तुर्की परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का एक सदस्य है भारत का इस समूह की सदस्यता के लिए दावेदारी दोनों देशों के नेताओं के बीच बातचीत के दौरान उठने की उम्मीद है. यह पूछे जाने पर कि क्या भारतीय पक्ष बातचीत के दौरान देश के एनएसजी की दावेदारी का मुद्दा उठाएगा, रूचि ने कहा, हम तुर्की के साथ सम्पर्क में रहेंगे. राजनयिक सूत्रों ने कहा कि तुर्की सीधे तौर पर भारत की एनएसजी की सदस्यता की दावेदारी के खिलाफ नहीं है लेकिन उसका कहना है कि इस शक्तिशाली समूह को ऐसी व्यवस्था के साथ सामने आना चाहिए जिसमें ऐसे देशों के प्रवेश पर विचार हो जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किया है, जो कि पाकिस्तान के मामले के भी पक्ष में है.

तुर्की के राष्ट्रपति इर्दोगान की यहां की यात्रा के दौरान दोनों पक्षों के बीच आतंकवाद के खिलाफ सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा किये जाने की उम्मीद है. इर्दोगान को सत्ता से बेदखल करने के लिए गत वर्ष जुलाई में एक असफल तख्तापलट के बाद तुर्की ने इसके लिए फतहुल्ला गुलेन टेरर्रिस्ट आर्गेनाइजेशन (एफईटीओ) को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि संगठन ने भारत में भी पैठ बना ली है. तुर्की ने भारत से संगठन के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भी कहा था. भारत की ओर से अभी तक की गई कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर रूचि ने कहा कि तुर्की ने उसे सरकार के समक्ष उठाया था जिसने उनकी चिंता पर गौर किया था.

तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोगलू ने गत वर्ष यहां की अपनी एक यात्रा के दौरान एफईटीओ को एक गोपनीय अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क बताया था जिसकी विश्वभर में मौजूदगी है। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से एफईटीओ ने संगठनों और स्कूलों के जरिये भारत में भी पैठ बना ली है. मोदी और इर्दोगान के बीच बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया, विशेष तौर पर सीरिया में क्षेत्रीय सुरक्षास्थिति पर चर्चा होने की उम्मीद है.

 

By continuing to use the site, you agree to the use of cookies. You can find out more by clicking this link

Close