गोरखपुर हादसा: साक्षी महाराज ने 60 से ज्यादा मासूमों की मौत को बताया 'नरसंहार'

साक्षी महाराज ने कहा, ‘मैंने मुख्यमंत्री योगी से कहा है कि इस घटना में जो भी दोषी हो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो, जिससे प्रदेश में दोबारा ऐसी घटना नहीं घट सके.’

ज़ी न्यूज़ डेस्क | अंतिम अपडेट: Aug 12, 2017, 08:35 PM IST
गोरखपुर हादसा: साक्षी महाराज ने 60 से ज्यादा मासूमों की मौत को बताया 'नरसंहार'
साक्षी महाराज ने कहा कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन आपूर्ति न होने की वजह से हुई. (फाइल फोटो)

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज गोरखपुर के बाबा राघवदास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुए 60 से ज्यादा मौतों को नरसंहार बताया है. उन्होंने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मासूमों की मौत सिर्फ मौत नहीं, बल्कि नरसंहार है. साक्षी महाराज ने कहा, ‘गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत सामान्य नहीं मानी जाएगी. एक-दो मौतें ही सामान्य होती हैं, इतनी नहीं, यह नरसंहार है. बच्चों की मौत ऑक्सीजन आपूर्ति न होने की वजह से हुई. भुगतान न होने की वजह से ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति बंद की गई, इसके चलते यह भयावह स्थित हुई.’ साक्षी महाराज ने कहा, ‘मैंने मुख्यमंत्री योगी से कहा है कि इस घटना में जो भी दोषी हो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो, जिससे प्रदेश में दोबारा ऐसी घटना नहीं घट सके.’

कांग्रेस ने मांगा उप्र के सीएम का इस्तीफा, जांच के आदेश को बताया 'छलावा'

कांग्रेस ने गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में 30 शिशुओं की मौत के लिए उत्तर प्रदेश की सरकार को ‘‘जिम्मेदार’’ ठहराते हुए राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के इस्तीफे की शनिवार (12 अगस्त) को मांग की. साथ ही पार्टी ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को निलंबित करने और राज्य सरकार द्वारा घटना की जांच के आदेश को एक ‘‘छलावा’’ बताया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने शनिवार (12 अगस्त) को यहां संवाददातओं से कहा कि इस पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश अथवा विभिन्न पार्टियों के नेताओं वाले किसी संसदीय दल से करवानी चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मामले की कैसी जांच करवायी जाएगी, उसके बारे में हम सभी को मालूम है. उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को निलंबित करने और राज्य सरकार द्वारा घटना की जांच के आदेश को एक ‘‘छलावा ’’ बताया.

'बच्चों की मौत के मामले में राजनीति न करे विपक्ष, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा'

उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एवं राज्य सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले में स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग को खारिज करते हुए शनिवार (12 अगस्त) को कहा कि विपक्षी नेताओं को इस मसले पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. बलिया जिले के बांसडीह रोड थाना क्षेत्र के बजहा ग्राम में रागिनी की हत्या की घटना के बाद पीड़ित परिवार को ढांढस देने यहां आये ऊर्जा मंत्री शर्मा ने संवाददाताओं से कहा कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत का मामला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. सरकार की पीड़ित परिवार के प्रति पूरी संवेदना है. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की मांग पर कहा कि इस मसले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. सरकार इस मामले में हर पहलू की जांच करा रही है, दोषी कोई भी हो उस पर कठोर कार्रवाई होगी एवं कोई बख्शा नहीं जायेगा.

गोरखपुर में 60 से ज्यादा बच्चों की मौत पर बिफरा विपक्ष, सीएम योगी की 'चुप्पी' पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 60 से ज्यादा बच्चों की मौत को लेकर शनिवार (12 अगस्त) को योगी आदित्यनाथ सरकार की कड़ी निंदा की और राज्य के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की. वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (यूपीसीसी) के अध्यक्ष राज बब्बर के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार (12 अगस्त) को गोरखपुर में बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल का दौरा किया और इस त्रासदी के लिए आदित्यनाथ से व्यक्तिगत तौर पर माफी मांगने को कहा. राज्य में प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस मामले में मुख्यमंत्री के मौन पर सवाल उठाया.

सपा के महासचिव राम गोपाल यादव ने कहा, "गोरखपुर में जहां इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौतें हुई हैं, वह मुख्यमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र और गृह नगर है. पदभार संभालने के बाद से वह कई बार वहां जा चुके हैं और यह दुखद है कि पिछले 24 घंटों में उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा." यादव ने इस मामले में असक्रियता के लिए राज्य की भाजपा सरकार की भी निंदा की. उन्होंने कहा, "गोरखपुर में कोई भी अधिकारी किसी की नहीं सुनता या किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है. ऐसा मालूम होता है कि ऐसे अधिकारियों को खुद मुख्यमंत्री से संरक्षण प्राप्त है."

(इनपुट एजंसी से भी)