गोरखपुर हादसा: बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल सस्पेंड, डैमेज कंट्रोल में जुटी उप्र सरकार

केशव प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा, 'गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज की त्रासदीपूर्ण एवं दर्दनाक प्रकरण में जो भी दोषी पाया गया, उसके खिलाफ निश्चित तौर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी ' 

अंतिम अपडेट: Aug 13, 2017, 07:58 AM IST
गोरखपुर हादसा: बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल सस्पेंड, डैमेज कंट्रोल में जुटी उप्र सरकार
बीआरडी अस्पताल में बच्चों की मौत पर गोरखपुर और लखनऊ में लोगों ने कैंडल मार्च निकाला. (एएनआई फोटो)

गोरखपुर (उत्तर प्रदेश): गोरखपुर स्थित बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में 48 घंटे के भीतर 30 बच्चों की मौत के प्रकरण में शनिवार (12 अगस्त) मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया. उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा, 'बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को कार्य में ढिलाई के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.' उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी. मौर्य ने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा, 'गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज की त्रासदीपूर्ण एवं दर्दनाक प्रकरण में जो भी दोषी पाया गया, उसके खिलाफ निश्चित तौर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी ' सिंह कह चुके हैं कि मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सात अगस्त से कल यानी 11 अगस्त तक विभिन्न बीमारियों से 60 बच्चों की मौत हुई है.

सिंह और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन मेडिकल कॉलेज के हालात का जायजा लेने गोरखपुर पहुंच गये हैं. टंडन ने यहां संवाददाताओं को बताया कि राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरतीय जांच का आदेश दे दिया गया है. जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द हासिल करके दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. गैर जिम्मेदारी के लिए हम बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को तत्काल प्रभा​व से निलंबित कर रहे हैं. टंडन ने बताया कि एक अगस्त को ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाले डीलर ने मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल को पत्र लिखकर बकाया धनराशि का भुगतान करने के लिए कहा था. पत्र महानिदेशक कार्यालय को भेजा गया और पांच अगस्त को बीआरडी मेडिकल कॉलेज को भुगतान कर दिया गया और सात अगस्त को रकम मेडिकल कॉलेज के खाते में आ गयी.

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टंडन के मुताबिक डीलर का दावा है कि उसे 11 अगस्त को भुगतान किया गया. भुगतान में विलंब क्यों हुआ? जीवनरक्षक ऑक्सीजन की आपूर्ति क्यों रोकी गयी? इन सभी सवालों पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय जांच में गौर किया जाएगा. इस प्रकरण को लेकर विपक्षी दलों द्वारा योगी आदित्यनाथ सरकार पर किये गये हमले के बीच राज्य प्रशासन 'डैमेज कंट्रोल' में जुट गया. बच्चों की मृत्यु की खबर शुक्रवार (11 अगस्त) रात आने के कुछ ही घंटे बाद राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गयी थी. सपा और बसपा ने प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.

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बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में पिछले छह-सात दिन में 60 बच्चों की मृत्यु हो गयी. यह भाजपा सरकार की आपराधिक लापरवाही का एक और नमूना है. इस त्रासदी के लिए योगी सरकार को दोषी ठहराते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया कि अस्पताल में ऑक्सीजन आपूर्ति की कमी के कारण यह घटना हुई. उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली कंपनी ने मेडिकल कॉलेज के​ प्रिंसिपल को सूचित किया था कि अगर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो वह आपूर्ति रोक देगी. सरकार को पता होना चाहिए कि ये मौतें आक्सीजन की कमी से हुई हैं.

सपा नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राम गोविन्द चौधरी के नेतृत्व में छह सदस्यीय सपा टीम से 13 अगस्त तक अध्यक्ष अखिलेश यादव को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है. बसपा प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर की अगुवाई में तीन सदस्यीय बसपा टीम से भी गोरखपुर पहुंचने को कहा गया है. कांग्रेस ने बच्चों की मौत के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को दोषी ठहराते हुए मुख्यमंत्री योगी और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के इस्तीफों की मांग की है. अस्पताल का दौरा करने पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने लिक्विड ऑक्सीजन की कथित कमी की वजह से बच्चों की मौत पर गहरा दुख प्रकट किया.

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आजाद ने कहा कि राज्य सरकार की ढिलाई की वजह से यह घटना हुई. हम इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार मानते हैं. स्वास्थ्य मंत्री एवं स्वास्थ्य सचिव को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए. इसके लिए डॉक्टरों को दोषी नहीं ठहराना चाहिए. कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को बच्चों की मौत की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए. कांग्रेस नेता ने ट्वीट किया कि उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री केवल लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर वोट मांगते हैं. वह राजनीति में शास्त्री के उच्च नैतिक मूल्यों का पालन नहीं करते. रेलवे दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शास्त्री ने इस्तीफा दे दिया था. नवजात शिशुओं की मौत के बाद भी सिद्धार्थ नाथ सिंह पद पर बने हुए हैं. सिंह पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाती हैं.

रालोद नेता मसूद अहमद ने कहा कि यह गहरी चिन्ता की बात है कि जिला प्रशासन और अस्पताल खामियों को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आधिकारिक टि्वटर एकाउण्ट के मुताबिक योगी ने निर्देश दिया है कि प्रकरण की गहन जांच करायी जाए और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. गोरखपुर रवाना होने से पहले सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री को डॉक्टरों और अधिकारियों ने ऑक्सीजन की कमी के बारे में नौ जुलाई और नौ अगस्त दौरे के समय सूचित नहीं किया था. चिकित्सा शिक्षा मंत्री को भी इसके बारे में नहीं बताया गया था . इन बातों को ध्यान में रखकर उचित कार्रवाई की जाएगी. टंडन ने कहा कि मुख्यमंत्री स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं. सभी पहलुओं की जांच के बाद हम उचित कार्रवाई करेंगे.

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गोरखपुर के जिलाधिकारी ने मौतों की हालांकि कोई वजह नहीं बतायी थी, लेकिन केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने कहा था कि गोरखपुर के पुलिस अधीक्षक के मुताबिक 21 बच्चों की लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी के कारण मृत्यु हुई है .गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार (11 अगस्त) को कहा था कि एसपी गोरखपुर के मुताबिक बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी के चलते पिछले 36 घंटे में 21 बच्चों की मौत हो गयी. वरिष्ठ अधिकारी मौके पर हैं. प्रशासन असल वजह का पता लगा रहा है. भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि बकाया राशि का भुगतान नहीं करने के कारण ऑक्सीजन आपूर्ति बंद करने से गोरखपुर के अस्पताल में ​नवजात शिशुओं की मृत्यु हुई है. उन्होंने इस त्रासदी के लिए दोषी लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की. साक्षी महाराज ने उन्नाव में कहा कि बच्चों की मौत अत्यंत दुखद है. बकाये का भुगतान नहीं होने के बहाने जिस व्यक्ति ने ऑक्सीजन आपूर्ति बंद की, वही इस घटना के लिए जिम्मेदार है.

सीएम के दौरे के समय नहीं उठा ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी का मुद्दा

उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार (12 अगस्त) को कहा कि बाबा राघव दास अस्पताल के प्राचार्य और डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नौ अगस्त के यहां के दौरे के समय ऑक्सीजन सिलेंडरों की कमी का मुद्दा नहीं उठाया. उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौ जुलाई और नौ अगस्त को बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का दौरा किया था और डॉक्टरों तथा प्राचार्य के साथ विस्तृत चर्चा की थी. गैस आपूर्ति का मुद्दा नहीं उठा और डॉक्टरों तथा प्राचार्य द्वारा उनके संज्ञान में भी नहीं लाया गया.’ एक दिन में कई मौतों को ‘स्तब्ध करने वाला’ बताते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ‘संवेदनशील सरकार’ है और वह एक दिन (10 अगस्त) में 23 बच्चों की मौतों की खबर को कमतर करने का प्रयास नहीं कर रही है.