इसी तरह के सियासी माहौल में कभी यूपी के CM बने थे ज‍गदम्बिका पाल, 24 घंटे में चली गई कुर्सी

बीएस येदियुरप्‍पा कर्नाटक के 23वें सीएम बने हैं. लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं. कर्नाटक में जनता ने खंडित जनादेश दिया है. येदियुरप्‍पा को 15 दिन में बहुमत साबित करना है.

इसी तरह के सियासी माहौल में कभी यूपी के CM बने थे ज‍गदम्बिका पाल, 24 घंटे में चली गई कुर्सी
गवर्नर के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. हाईकोर्ट ने गवर्नर का आदेश बदल दिया. फिर पाल को कुर्सी छोड़नी पड़ी. (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: बीएस येदियुरप्‍पा कर्नाटक के 23वें सीएम बने हैं. गुरुवार (17 मई) को उन्‍हें राज्‍यपाल ने सीएम पद की शपथ दिलाई. उन्‍होंने तीसरी बार कर्नाटक के सीएम पद की शपथ ली है. इससे दक्षिण में बीजेपी का कमल दोबारा खिला है. पहली बार जब येदियुरप्‍पा सीएम बने थे मात्र 7 दिन ही इस पर रह पाए थे. इसके बाद दोबारा यह पद ग्रहण करने पर करीब तीन साल तक वह सीएम रहे, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं. कर्नाटक में जनता ने खंडित जनादेश दिया है. इसमें किसी दल को बहुमत नहीं मिला है. बीजेपी 104 सीट पाई तो कांग्रेस सिमटकर 78 और जेडीएस 38 पर रह गई. राज्‍यपाल ने सबसे बड़े दल के रूप में बीजेपी को सरकार बनाने का न्‍योता दिया है. येदियुरप्‍पा को 15 दिन में बहुमत साबित करना है. दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी से विधायकों के समर्थन की लिस्‍ट मांग ली है, वह शुक्रवार को इस मामले की आगे सुनवाई करेगा. अगर बीजेपी की समर्थन सूची से वह संतुष्‍ट नहीं होगा तो आशंका है कि येदियुरप्‍पा की कुर्सी चली जाए. ऐसे में वह मात्र एक दिन के मुख्‍यमंत्री बनकर रह जाएंगे. ऐसा ही एक मामला यूपी में करीब दो दशक पहले सामने आया था जब जगदम्बिका पाल मात्र एक दिन के मुख्‍यमंत्री बने थे लेकिन अगले ही दिन उन्‍हें कुर्सी छोड़नी पड़ी थी.

गवर्नर ने रातों रात बर्खास्‍त कर दी थी सरकार
उस दौरान जग‍दम्बिका पाल कांग्रेस में थे. 21-22 फरवरी 1998 की रात यूपी के गवर्नर रोमेश भंडारी ने राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की. लेकिन केंद्र ने इसे ठुकरा दिया. बीजेपी के मुख्‍यमंत्री कल्‍याण सिंह ने अन्‍य दलों के विधायकों के साथ 93 सदस्‍यीय मंत्रिमंडल बनाया था. लेकिन अन्‍य राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया और सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया. भंडारी ने बाहरी लोगों को कैबिनेट में शामिल करने पर ऐतराज जताया था और सरकार को बर्खास्‍त करने का फैसला किया. इसके बाद उन्‍होंने जगदम्बिका पाल को सरकार बनाने का न्‍योता दिया. लेकिन उनकी सरकार एक दिन भी नहीं टिक पाई. पाल ने सीएम पद छोड़ने का फैसला किया और कल्‍याण सिंह को फिर मुख्‍यमंत्री के तौर पर स्‍वीकार कर लिया.

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13वीं विधानसभा में लगा था राष्‍ट्रपति शासन
1996 में यूपी में चुनाव में खंडित जनादेश आया. भाजपा को करीब पौने दो सौ सीट मिली थी लेकिन बहुमत से वह काफी दूर थी. सपा 100 से अधिक तो बसपा को 60 से अधिक सीटें मिलीं. कांग्रेस सिर्फ 33 सीट पाई थी. कोई दल अकेले सरकार बना पाने की स्थिति में नहीं था. गवर्नर ने राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन लगा दिया. इस बीच बीजेपी और बसपा में तालमेल बैठा और राज्‍य में गठबंधन की सरकार बनी लेकिन वह ज्‍यादा दिन नहीं चल सकी. फिर कल्‍याण सिंह ने जोड़-तोड़ कर सरकार बनाई. 21 फरवरी 1998 को राज्यपाल भंडारी ने कल्याण सिंह को बर्खास्त कर जगदंबिका पाल को शपथ दिलाई थी. लेकिन अगले ही दिन गवर्नर के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. हाईकोर्ट ने गवर्नर का आदेश बदल दिया. फिर पाल को कुर्सी छोड़नी पड़ी.

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