Zee जानकारी: योगी आदित्यनाथ का एक दूसरा चेहरा भी है

Updated: Mar 21, 2017, 12:28 AM IST
Zee जानकारी: योगी आदित्यनाथ का एक दूसरा चेहरा भी है

हम उत्तर प्रदेश के नये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आंसुओं की बात करेंगे. आप सोच रहे होंगे कि योगी आदित्यनाथ और आंसू, ऐसा कैसे हो सकता है. योगी आदित्यनाथ की छवि एक कट्टर हिंदूवादी नेता की रही है. योगी अपने कड़े बयानों और तीखे तेवरों की वजह से जाने जाते हैं. लेकिन उनका एक दूसरा चेहरा भी है. ये एक ऐसा भावुक और मार्मिक चेहरा है, जो ज़्यादातर लोगों ने अब तक नहीं देखा है. 

आज हम योगी आदित्यनाथ के 10 साल पुराने आंसुओं का DNA टेस्ट करेंगे. इन आंसुओं में भावनाएं हैं और हमारे देश की दूषित राजनीति के प्रति एक तरह का आक्रोश भी है. 2007 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने योगी आदित्यनाथ को जेल में डाल दिया था. और उसके बाद योगी आदित्यनाथ लोकसभा में अपनी बात कहते कहते रोने लगे थे. लेकिन वो दौर कुछ और था. अब उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ का ज़माना आ चुका है. आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ का पहला दिन है, इसलिए आज उनके दस साल पुराने आंसू, एक किस्म की राजनीतिक धरोहर बन गये हैं. पूरा देश उत्तरप्रदेश के नये मुख्यमंत्री के व्यक्तित्व के बारे में जानना चाहता है. इसलिए मीडिया में उनकी शख्सियत का विश्लेषण हो रहा है. मीडिया के ज़्यादातर हिस्सों में यही बताया जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ एक बहुत सख्त और कट्टर विचारों वाले नेता है. लेकिन योगी का एक दूसरा रूप भी है. 

आज से 10 वर्ष पहले, तारीख थी, 12 मार्च 2007 और जगह थी, लोकसभा. सवाल है कि आखिर वो कौन से हालात थे, जिनकी वजह से योगी आदित्यनाथ पूरे देश के सामने ऐसे फूट फूटकर रोए थे? दरअसल जनवरी 2007 में गोरखपुर में दंगा हुआ था. इस दंगे के विरोध में योगी आदित्यनाथ ने धरने पर बैठने का ऐलान किया था, लेकिन जब वो धरने के लिए जा रहे थे, तभी उन्हें पुलिस ने शांति भंग करने की धाराओं में गिरफ्तार कर लिया था. लेकिन ऐसी मामूली धाराओं में गिरफ्तारी के बावजूद उन्हें 11 दिनों तक गोरखपुर की जेल में रखा गया. और इसी वजह से योगी आदित्यनाथ लोकसभा में अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाए और रोने लगे. उस वक्त उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे. लेकिन राजनीति में वक्त बदलते देर नहीं लगती और अब 10 वर्षों में वक्त पूरी तरह से बदल चुका है. योगी आदित्यनाथ अब सांसद से मुख्यमंत्री बन चुके हैं और मुलायम सिंह यादव अब मुख्यमंत्री नहीं, सिर्फ एक सांसद हैं. अब उत्तर प्रदेश में सरकार समाजवादी पार्टी की नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी की है. इसीलिए हम ये कह रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ के आंसुओं वाली इन तस्वीरों में आने वाले समय की राजनीति के कई संकेत भी छिपे हुए हैं. 

क्या योगी आदित्यनाथ 2007 के आंसुओं का प्रतिशोध 2017 में लेंगे? वैसे तो 10 वर्ष बहुत लंबा समय होता है, लेकिन राजनीति में बुरी यादें कई दशक बीत जाने के बाद भी ज़िंदा रहती हैं. ये भी आशंका जताई जा रही है कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने से मुलायम सिंह यादव और उनका परिवार असहज हो गया है. जब योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रियों का शपथ ग्रहण चल रहा था. शपथ ग्रहण समारोह खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तर प्रदेश सरकार के नये मंत्रियों से मिल रहे थे. लेकिन तभी बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह, मुलायम सिंह यादव को लेकर प्रधानमंत्री के पास पहुंच गए. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुलायम सिंह यादव के साथ बड़ी ही गर्मजोशी से मिले. इसके बाद अखिलेश यादव भी पहुंचे और उन्होंने नरेन्द्र मोदी को बधाई दी.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हुई इस छोटी सी मुलाक़ात ने मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव को एक साथ एक मंच पर मिला दिया. 2017 में ये पहला मौका था जब मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव एक साथ एक मंच पर दिखाई दिए. यानी आप ये भी कह सकते हैं कि बीजेपी के मंच ने मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे को भी आपस में मिला दिया. समाजवादी पार्टी के अंदरूनी झगड़े की वजह से अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव एक साथ किसी सार्वजनिक मंच पर नहीं दिख रहे थे. यहां तक कि चुनावों के दौरान भी अखिलेश यादव और मुलायम सिंह कहीं भी एक साथ नहीं दिखे. दोनों ने एक साथ कोई रैली नहीं की. 

कल की इन तस्वीरों से ऐसा भी लग रहा था कि जैसे अखिलेश और मुलायम के बीच की दूरियां खत्म हो गई हों, लेकिन विडंबना ये है कि इन दोनों नेताओं को अपनी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी के उस मंच पर एक होना पड़ा, जहां योगी आदित्यनाथ का शपथ ग्रहण हो रहा था. मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को शायद ये लग रहा होगा कि योगी आदित्यनाथ 2007 की बातों को अब तक भूले नहीं होंगे और हो सकता है कि आगे चलकर योगी आदित्यनाथ के आंसुओं का दुष्प्रभाव उन्हें झेलना पड़े. 

ख़ैर योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए हैं. हर कोई यही सोच रहा है कि वो अचानक कैसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए? हम आपको योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने की Inside Story भी आगे बताएंगे, लेकिन उससे पहले आपको योगी आदित्यनाथ के बारे में कुछ ऐसी बातें जाननी चाहिएं, जो शायद आपको पता नहीं होंगी. 

आदित्यनाथ हमेशा ये कहते रहे हैं कि उनके ऊपर बहुत से झूठे Cases दायर किए गए हैं. आज हमने दिन भर योगी आदित्यनाथ के Cases को Study किया हम बाकी Cases के बारे में तो कोई टिप्पणी नहीं कर सकते लेकिन एक केस ऐसा है जो बहुत ही हैरान करने वाला है. योगी आदित्यनाथ पर IPC की धारा 427 के तहत एक केस दर्ज है. जिसमें उन पर 50 रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है. ये आरोप सुनकर हो सकता है कि आपको हंसी आ रही हो. लेकिन इस कानून और इस धारा के पीछे की सच्चाई भी आज आपको जाननी चाहिए.
 
IPC की धारा-427 कहती है कि जब कोई व्यक्ति, किसी दूसरे को 50 रुपये या उससे ज्यादा का नुकसान पहुंचाता है तो ऐसे मामले में उसे दो साल तक की कैद की सजा दी जा सकती है. 1860 में जब IPC बना तब के 50 रुपये का अगर आज के संदर्भ में Valuation किया जाए तो ये रकम हजारों में होगी. इसलिए 50 रुपये के नुकसान का Limitation, मौजूदा संदर्भ में कोई मायने नहीं रखता.

आज उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ का पहला दिन था. और पहले ही दिन कुछ नया देखने को मिला. योगी आदित्यनाथ ने यूपी के बड़े अधिकारियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा देने को कहा है. आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के 65 वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली बैठक की, और सभी को 15 दिनों के अंदर अपनी चल और अचल संपत्ति की घोषणा करने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्वच्छता और ईमानदारी की शपथ भी दिलवाई. बैठक में अधिकारियों को बीजेपी के संकल्प पत्र की कॉपी भी दी गई, और उसे लागू करने का Roadmap बनाने को कहा गया. 

कुल मिलाकर अब उत्तर प्रदेश को योगी युग के लिए तैयार हो जाना चाहिए. योगी की अग्निपरीक्षा भी अब ज़्यादा दूर नहीं है. ये परीक्षा 2019 में हो जाएगी. जिसमें उत्तर प्रदेश ये बता देगा कि उसे योगी युग पसंद आया या नहीं.