Zee जानकारी : भारत से युद्ध लड़ने के लिए चीन को बॉर्डर पर उतारने पड़ेंगे अपने दो तिहाई जवान

Zee जानकारी : भारत से युद्ध लड़ने के लिए चीन को बॉर्डर पर उतारने पड़ेंगे अपने दो तिहाई जवान

-बारा-होती के इलाके को चीन अपनी भाषा में वू ज़ी कहता है।

-बारा-होती के इसी इलाके से मैक महौन रेखा गुज़रती है. ये चीन और भारत की सीमा रेखा है. हालांकि चीन की सरकार इसे विवादित मानती है।

-बारा-होती के इन इलाकों में हर साल जुलाई और अगस्त के महीने में चीन के सैनिक देखे जाते हैं और इस बार भी ऐसा ही हुआ है।

-हालांकि, हमारे जवानों के कड़े विरोध के बाद उन्हें वापस जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। 

-वर्ष 2007 से 2016 तक बारा-होती के इलाकों में चीनी सैनिकों ने 40 से ज़्यादा बार घुसपैठ की है।

-LAC की लंबाई करीब 4 हज़ार किलोमीटर है. इस वक्त पूरी LAC पर भारतीय सेना की कम से कम 12 से 13 डिवीजन तैनात हैं। 

-युद्ध की भाषा में बात करें तो पहाड़ों पर लड़ाई के लिए हमला करने वाली फौज की संख्या बचाव करने वाली फौज से कम से कम 9 गुनी होनी चाहिए। 

-यानी अगर चीन की फौज को भारत की सेना का मुकाबला करना है तो उन्हें कम से कम 100 से 110 डिवीजन की ज़रूरत है।

-इसे हम आपको और आसान भाषा में समझाते हैं। सेना की एक डिवीजन में करीब 12 से 15 हज़ार जवान होते हैं। इस हिसाब से इस वक्त चीन बॉर्डर पर भारत के कम से कम डेढ़ लाख जवान तैनात हैं। ऐसे में अगर चीन को भारतीय सैनिकों का मुकाबला करना है तो उसे कम से कम साढ़े 13 लाख जवानों की ज़रूरत पड़ेगी। 

-इस वक्त चीन के पास साढ़े 22 लाख सक्रिय सैनिक हैं, और अगर चीन भारत से युद्ध करता है तो उसे अपने दो तिहाई जवान बॉर्डर पर तैनात करने पड़ेंगे। जिसकी संभावना बहुत कम है। 

भारी बारिश और कम पैदावार के चलते टमाटर हुआ 'लाल'

-पूरे देश में इस वक्त फरवरी से जुलाई के बीच तैयार होने वाली टमाटर की फसल पहुंच रही है।

-देश में टमाटर की सबसे ज्यादा पैदावार कर्नाटक, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में होती है।

-महाराष्ट्र में मौजूद एशिया की सबसे बड़ी टमाटर की मंडी पिंपलगांव में है। और वहां किसानों को एक किलो टमाटर के लिए 30 से 40 रुपये मिल रहे हैं. 

-बेंगलूरु से करीब 60 किलोमीटर दूर कोलार ज़िला, एशिया में टमाटर के उत्पादन में दूसरे नंबर पर है। कोलार में इस बार पिछले साल के मुकाबले टमाटर की खेती कम हुई है।

-पिछले वर्ष टमाटर की फसल के कम दाम मिलने की वजह से कोलार के किसानों ने इस बार पैदावार आधी कर दी।

-दिल्ली में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से टमाटर आता है लेकिन भारी बारिश की वजह से कई इलाकों से संपर्क टूट गया है जिसकी वजह से दिल्ली की मंडियों में टमाटर कम पहुंच रहा है.

-महाराष्ट्र और गुजरात में भारी बारिश से स्थिति बहुत बिगड़ गई है और नासिक से आने वाले टमाटर के ट्रक दिल्ली और देश के कई दूसरे हिस्सों में नहीं पहुंच पा रहे हैं.

-देश के ज़्यादातर राज्यों में भारी बारिश की वजह से टमाटर मंडियों तक नहीं पहुंच पा रहा है और बारिश का बहाना बनाकर कई बड़े व्यापारियो ने टमाटर की कीमतों को औसतन 100 रुपये किलो तक पहुंचा दिया है. 

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