Zee जानकारी: कश्मीर में WhatsApp का आतंक

Last Updated: Tuesday, March 21, 2017 - 00:29
Zee जानकारी: कश्मीर में WhatsApp का आतंक

आज DNA में हमारा पहला विश्लेषण, उन लोगों को ध्यान से देखना चाहिए, जो अलग-अलग Social Media Platforms पर Active हैं. क्योंकि, हो सकता है, कि आपकी जानकारी के बगैर, किसी आतंकवादी गतिविधि के लिए आपका इस्तेमाल किया जा रहा हो. मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि, WhatsApp जैसे Social Media Platform पर बिना सोचे-समझे किसी भी Group का सदस्य बन जाना, आपको महंगा पड़ सकता है. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा ज़िले से हमारे पास एक चिंता में डालने वाली ख़बर आई है. क्योंकि अब कश्मीर घाटी में WhatsApp वाला आतंक फैलाने की कोशिश की जा रही है.

DNA में हमने कई बार तस्वीरों की मदद से कश्मीर के पत्थरबाज़ों की देशविरोधी सोच का विश्लेषण किया है. हम आपको बता चुके हैं, कि पत्थरबाज़ों की ये फौज, एक भीड़ के रूप में काम करती है. और मौका मिलते ही, अचानक सुरक्षाबलों पर हमला कर देती है. आम तौर पर इस भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता. क्योंकि, इन पत्थरबाज़ों के Boss.. पर्दे के पीछे रहकर इन्हें भड़काने का काम करते हैं. ख़बर ये है, कि कश्मीर घाटी में मौजूद पत्थरबाज़ों की फौज Hi-Tech हो गई है और उन्हें भड़काने के लिए अब WhatsApp Group जैसे Social Media Platform की मदद ली जा रही है.

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुलवामा ज़िले में 11 लोगों को हिरासत में लिया है, जो अलग-अलग Numbers से WhatsApp Group चला रहे थे. इन लोगों पर पत्थरबाज़ों को भड़काने का आरोप है. ये सभी 11 लोग इन WhatsApp Groups के Administrators थे. यानी इनके पास उन Groups के Admin Rights थे. इन सभी 11 WhatsApp Groups में शामिल 54 सदस्यों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है. इसके अलावा पुलिस ने 64 अन्य लोगों को हिरासत में लिया है और 30 से ज़्यादा ऐसे WhatsApp Groups की पहचान की है, जो अफवाहें फैलाकर, लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे थे. 

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा Twist ये है, कि 2 WhatsApp Groups ऐसे पाए गए हैं, जिनके Administrators देश से बाहर बैठे हैं. यानी ये दोनों ही Numbers पाकिस्तान के हैं. ऐसा शक है, कि इन दोनों ही Groups के Administrators, पाकिस्तान में बैठकर, घाटी में लोगों को भड़काने का काम करते हैं. आतंकवादियों के ख़िलाफ कार्रवाई के दौरान सेना और पुलिस के काम में रुकावट पैदा करने के लिए, ऐसे WhatsApp Groups की मदद ली जाती है. इन Groups पर भारत विरोधी संदेश भेजे जाते हैं. जिसके बाद पत्थरबाज़ों की फौज ख़तरनाक तरीके से Active हो जाती है.

आप ये भी कह सकते हैं, कि सीमापार से भारत में आतंकवाद की सप्लाई करने वाला पाकिस्तान, अब पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादियों को Free Data Pack दे रहा है. ताकि आतंकवादी घर बैठे WhatsApp की मदद से कश्मीर घाटी का माहौल खराब कर सकें. इसलिए आज इस गंभीर विषय पर आप सभी का ध्यान आकर्षित करना ज़रुरी है. यहां मैं दक्षिण कश्मीर और कश्मीर घाटी के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले सभी दर्शकों से अपील करना चाहूंगा, कि कृपया किसी भी WhatsApp Group का सदस्य बनने से पहले 100 बार सोचें. क्योंकि, आपकी छोटी सी ग़लती आपको बड़ी मुसीबत में फंसा सकती है. कश्मीर के बाहर रहने वाले लोगों को भी ऐसे Groups से सावधान रहना चाहिए.

ये बदलते ज़माने का आतंकवाद है. जिसमें Social Media की भूमिका काफी अहम हो गई है. Twitter, Facebook, Youtube और WhatsApp जैसे ना जाने कितने ऐसे Social Media Platforms हैं, जो आतंकवादियों के लिए एक तरह से Online Launching Pad बन गए हैं. और इन Launching Pads को रोकने का तरीका फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा. आपने ध्यान दिया होगा, कि जब Social Media का ज़माना नहीं था, उस वक्त अफ़वाहें फैलाना या दूषित प्रचार के ज़रिए लोगों को भड़काना मुश्किल होता था और इसमें समय लगता था. लेकिन अब Social Media, Internet Forum या Chat Room जैसी सुविधाओं की वजह से, हर उल्टी-सीधी बात का प्रचार करना और नए सदस्य या समर्थक जुटाना, बहुत आसान हो गया है. 

आतंकवादी अपने नए साथियों को आतंकवाद की ट्रेनिंग देने के लिए अब Virtual Training Camps लगाते हैं. इसके लिए Online War Simulators का इस्तेमाल किया जाता है. इस Training में आतंकवादियों को Real Time War जैसी स्थिति से गुज़रना पड़ता है. अगस्त 2016 में ब्रिटेन की संसद की Home Affairs Select Committee ने एक रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें कहा गया था, कि 21वीं सदी में Internet और Social Media, आतंकवाद को बढ़ावा देने, नफरत फैलाने और हत्या करने की मानसिकता को बढ़ावा देने की मूल वजह है.

इज़राएल की University of Haifa के प्रोफेसर Gabriel Weimann ने एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें उन्होंने कहा था, दुनिया भर में इंटरनेट पर हो रहे Organized Terrorism का 90 फीसदी Social Media की मदद से होता है. Social Media की मदद से आतंकवादी संगठन पूरी दुनिया में कहीं भी और किसी को भी अपने संगठन में शामिल कर सकते हैं. Internet Company, Recorded Future ने अपनी Study में पाया था, कि आतंकवादी संगठन ISIS ने Social Media पर अपना इतना प्रचार किया, कि 7 लाख से ज़्यादा Accounts ने उसके बारे में चर्चा की.

यानी आप अंदाज़ा लगा सकते हैं, कि जिस Social Media का इस्तेमाल आप और हम, एक दूसरे से संपर्क बनाए रखने के लिए करते हैं. उसी Social Media का इस्तेमाल, एक आतंकवादी अपना एजेंडा चलाने के लिए करता है. हमें लगता है, कि आपको भी ऐसे किसी भी Platform का इस्तेमाल करते वक़्त सावधान रहना चाहिए. क्योंकि, कौन, कब और कैसे आपका इस्तेमाल कर ले, ये कहना मुश्किल है. इसलिए किसी भी WhatsApp Group का हिस्सा बनने से पहले पूरी जांच पड़ताल कर लें.



First Published: Monday, March 20, 2017 - 23:13
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