सत्‍ता का सस्‍पेंस: ...तो ये है कर्नाटक में BJP का बहुमत के आंकड़े को छूने का गणित!

222 सीटों में से बहुमत के अपेक्षित आंकड़े(112) से आठ सीटें पीछे रहने वाली बीजेपी को आखिर समर्थन कहां से मिलेगा?

सत्‍ता का सस्‍पेंस: ...तो ये है कर्नाटक में BJP का बहुमत के आंकड़े को छूने का गणित!
बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्‍पा ने राज्‍यपाल मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया.(फाइल फोटो)

बेंगलुरू: कर्नाटक में जबर्दस्‍त सियासी सस्‍पेंस के बीच 104 सीटें हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी बनने वाली बीजेपी के नेता बीएस येदियुरप्‍पा ने राज्‍यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा किया है. सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि सरकार बनाने का आमंत्रण मिलने की स्थिति में वह 17 मई को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ भी ले सकते हैं. 222 सीटों में से बहुमत के अपेक्षित आंकड़े(112) से आठ सीटें पीछे रहने वाली बीजेपी को आखिर समर्थन कहां से मिलेगा? सबसे बड़ा सवाल यही है क्‍योंकि कांग्रेस(78 सीटें) और जेडीएस(38) ने हाथ मिला लिया है और दो में से एक विधायक को उनके समर्थन में बताया जा रहा है. इस तरह कांग्रेस-जेडीएस के पास इस वक्‍त बहुमत से ज्‍यादा 117 विधायकों का आंकड़ा है.

BJP का गणित
सूत्रों के मुताबिक बुधवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में चार विधायक नहीं पहुंचे. इसी तरह जेडीएस के दो विधायक एचडी कुमारस्‍वामी को पार्टी का नेता चुने जाने के वक्‍त नहीं दिखे. इसके अतिरिक्‍त एक निर्दलीय विधायक बीजेपी खेमे के साथ देखा गया. कहा जा रहा है कि बीजेपी इन्‍हीं सात विधायकों के दम पर अपेक्षित बहुमत का जुगाड़ करने के मूड में हैं. यदि ये विधायक पाला बदलकर बीजेपी के पास आ जाएं तो कुल मिलाकर पार्टी के पास 111 विधायकों का समर्थन होगा फिर भी बहुमत के लिए जरूरी 112 अंकों के आंकड़े को पार्टी नहीं छू पाएगी.

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लिहाजा इस कमी को पूरा करने के लिए बीजेपी की नजर जेडीएस नेता एचडी कुमारस्‍वामी की दो सीटों पर है. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी, राज्‍यपाल ये से आग्रह कर सकती है पार्टी को बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्‍त समय दिया जाए और विश्‍वासमत के परीक्षण से पहले कुमारस्‍वामी जीती गई अपनी दोनों सीटों में से एक सीट से इस्‍तीफा दें. इसके चलते एक सीट कम होने के कारण बहुमत का आंकड़ा 111 तक पहुंच सकता है, जो‍कि बीजेपी के लिए मददगार होगा.

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प्‍लान बी
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी का प्‍लान बी ये है कि यदि उसका पहला प्‍लान फेल हो जाता है तो विश्‍वासमत परीक्षण के दौरान वह कांग्रेस और जेडीएस के 15 विधायक किसी तरह सदन में उपस्थित नहीं रहें. यानी वे विश्‍वास मत के दौरान गैरमौजूद रहें. इससे यह होगा कि सदन में बहुमत का अपेक्षित आंकड़ा 222 में से 15 कम हो जाएगा. स्‍पष्‍ट है कि बीजेपी के इस वक्‍त 104 विधायकों के लिहाज से यह आंकड़ा बहुमत के लिए एकदम सटीक होगा और बीजेपी अपना बहुमत साबित करने में कामयाब हो जाएगी.

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लिंगायत मुद्दा
चुनावों में कांग्रेस धर्म के आधार पर लिंगायतों को अल्‍पसंख्‍यक का दर्जा देने का कार्ड खेल चुकी है और चुनाव नतीजों से साफ है कि वह कार्ड फेल रहा. अब चुनाव बाद बीजेपी इस कार्ड को खेल सकती है. चूंकि बीएस येदियुरप्‍पा लिंगायत समुदाय से ताल्‍लुक रखते हैं. लिहाजा बीजेपी अभी से यह कह रही है‍ कि इस समुदाय के नेता को सत्‍ता में पहुंचने से रोकने के लिए कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन किया है. लिहाजा इस आधार पर BJP लिंगायतों के सम्‍मान को एक मुद्दा बनाने के मूड में है और इस आधार पर कांग्रेस और जेडीएस के लिंगायत समुदाय से ताल्‍लुक रखने वाले विधायकों से येदियुरप्‍पा को समर्थन देने की अपील कर सकती है. उल्‍लेखनीय है कि कांग्रेस के टिकट पर 21 और JDS के टिकट पर 10 लिंगायत विधायक जीतकर आए हैं. ऐसे में जितने भी लिंगायत विधायक इन दलों से टूटकर बीजेपी में जाएंगे, उताना ही फायदा बीजेपी को होगा.

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