वोटिंग के बाद ही डगमगा गया था सिद्धारमैया का कांफिडेंस, तुरंत ही BJP को रोकने की शुरू कर दी थी कोशिशें

कांग्रेस ने जेडीएस को अपने पाले में लाने के लिए मतदान के अगले दिन यानि की 13 अप्रैल से ही कवायद शुरू कर दी थी.

वोटिंग के बाद ही डगमगा गया था सिद्धारमैया का कांफिडेंस, तुरंत ही BJP को रोकने की शुरू कर दी थी कोशिशें
कर्नाटक में मतगणना पूरी होने से पहले ही कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था. (फोटो साभार : IANS)

नई दिल्ली : कर्नाटक चुनावों में गिनती के दौरान जिस तरह बीजेपी को बढ़त की ओर जाते देख कांग्रेस ने जेडीयू का समर्थन देने की बात कही उससे हर कोई हैरान है. सत्ता और लाज दोनों बचाए रखने के लिए कांग्रेस ने रणनीति के तहत जेडीयू को ना सिर्फ समर्थन देने की बात कही बल्कि इस एचडी कुमारस्वामी को सीएम बनाने का ऑफर तक दे दिया. अब सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन देने और उसको अपने साथ लाने की कवायद बहुत पहले से ही शुरू कर दी थी.

मतदान के अगले दिन से ही हो गई थी शुरुआत
इंडियन एक्स्प्रेस में छपी खबर के मुताबिक, कांग्रेस ने जेडीएस को अपने पाले में लाने के लिए मतदान के अगले दिन यानि की 13 अप्रैल से ही कवायद शुरू कर दी थी. कांग्रेस के सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, दोनों पार्टियों ने इस बात को तय कर लिया था कि वह बिना समय गंवाए एक-दूसरे को समर्थन देंगी. जैसे-जैसे नतीजे स्पष्ट होने लगे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से फोन पर बात कर उन्हें पूरे हालात की जानकारी दी थी. कांग्रेस को जैसे ही लगा कि वो बहुमत से बहुत दूर है और बीजेपी बेहद करीब है, उसने अपनी रणनीति शुरू कर दी है. बता दें कि एचडी देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी उस स्थिति में मुख्यमंत्री होंगे, अगर कांग्रेस और जेडीएस मिलकर प्रदेश की सरकार में सत्तासीन होते हैं.

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क्या कहता है विधानसभा सीट का गणित
राज्य की 224 में से 222 विधानसभा सीटों पर 12 मई को मतदान हुआ था. 15 मई को आए नतीजों के मुताबिक, बीजेपी ने 104 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस ने 78 और जेडीएस गठबंधन ने 38 सीटों पर जीत हासिल की. 

लोकसभा चुनावों की तैयारी में कांग्रेस
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, जेडीएस के कुमारस्वामी और देवेगौड़ा से कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बातचीत की और इस बात की अपील की वह बीजेपी को समर्थन दें. इतना ही नहीं सीएम के अलावा उपमुख्यमंत्री भी जेडीएस से ही होगा इस बात का दावा तक किया. इसके अलावा 2019 लोकसभा चुनावों में पार्टी जेडीएस को अहम भूमिका में रखेगी इसका वादा तक किया. सूत्रों का कहना है कि गुलाम नबी आजाद के कहने पर कांग्रेस ने यह सब किया है ताकि वह प्रदेश में अपनी सत्ता बनाए रखें. 

इतिहास दोहरा पाएगा ? 
कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास को पलटकर देखा जाए तो, यहां पर किसी भी पार्टी ने लगातार दो बार सत्ता में वापसी नहीं है. ऐसे में अगर कांग्रेस दोबारा सरकार बना पाती है तो 1985 के बाद यह बार होगा जब कोई पार्टी लगातार दूसरी बार सरकार बनाएगी. 1985 में तत्कालीन जनता दल ने रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी.