कौन हैं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हराने वाले दूसरे 'देवेगौड़ा', कभी थे गहरे दोस्त

कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका सिद्धारमैया के कारण लगा है. वह चामुंडेश्वरी सीट से करीब 33 हजार मतों से हार गए हैं.

कौन हैं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हराने वाले दूसरे 'देवेगौड़ा', कभी थे गहरे दोस्त

नई दिल्ली : कर्नाटक चुनाव में सरकार किसी की भी बने, लेकिन कांग्रेस के हाथ से सत्ता छिन गई है. लेकिन वह जेडीएस के साथ सरकार बनाने की कोशिश कर रही है. इस दौरान कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका सिद्धारमैया के कारण लगा है. वह चामुंडेश्वरी सीट से करीब 33 हजार मतों से हार गए हैं. बादामी सीट पर भी उन्हें मामूल बढ़त है. चामुंडेश्वरी सीट पर सिद्धारमैया को जीटी देवेगौड़ा ने करारी मात दी.

सिद्धारमैया को शायद पहले से ही चामुंडेश्वरी में अपनी स्थिति को लेकर खतरा था. इसीलिए वह दो सीटों से चुनाव लड़े. मजे की बात ये है कि सिद्धारमैया को करारी हार देने वाले जेडीएस के जेटी देवेगौड़ा कभी उनके करीबी दोस्त थे. दोनों ही जेडीएस में रह चुके हैं. जीटी देवेगौड़ा जेडीएस के ''एक और देवेगौड़ा'' के नाम से जाने जाते हैं. वह मैसूर के गंगरालु चैत्रा गांव से ताल्लुक रखते हैं. ये इलाका देवेगौड़ा की राजनीति का गढ़ माना जाता है.

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1970 में कोऑपरेटिव सोसायटी के सचिव के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले जीटी देवेगौड़ा कर्नाटक के पूर्व मंत्री रह चुके हैं. वह तीन बार हनसुर और चामुंडेश्वरी से एमएलए रह चुके हैं. 1978 के चुनावों में वह तब सबसे ज्यादा चर्चा में आए, जब उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार केंपर गौड़ा को समर्थन दिया था. थोड़े समय बाद देवेगौड़ा ने कांग्रेस छोड़ जनता पार्टी को ज्वाइन कर लिया. 1983 में वह सिद्धारमैया के संपर्क में आए.

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इसके बाद दोनों की दोस्ती करीब दो दशक तक चली. सिद्धारमैया से दोस्ती टूटने के बाद 2007 में उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली. 2013 में जेडीएस में लौटे और चांमुडेश्वरी से चुनाव जीता.

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